NEET PG 2026 re-exam: जयपुर के परीक्षा केंद्र पर तकनीकी खराबी के बाद हंगामा, अब दोबारा होगा एग्जाम
NEET PG 2026 re-exam: नीट पीजी-2026 (NEET PG-2026) की परीक्षा के दौरान जयपुर के एक परीक्षा केंद्र पर उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई जब परीक्षार्थियों ने बार-बार कंप्यूटर बंद होने (शटडाउन) का गंभीर आरोप लगाया। अभ्यार्थियों के अनुसार, तकनीकी बाधाओं ने उनकी परीक्षा प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया।
इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने विद्यार्थियों को हुई असुविधा पर खेद प्रकट किया है और प्रभावित परीक्षार्थियों के लिए आगामी 5 सितंबर को दोबारा परीक्षा आयोजित करने का आधिकारिक ऐलान किया है।
दो घंटे में 10 बार बंद हुए सिस्टम, छात्रों का प्रदर्शन
यह तकनीकी व्यवधान जयपुर के सीतापुरा स्थित आयन डिजिटल जोन (ION Digital Zone) केंद्र पर सामने आया। परीक्षार्थियों की शिकायत थी कि परीक्षा के दौरान उनके कंप्यूटर सिस्टम बार-0बार (दो घंटे के भीतर लगभग 10 बार) बंद हो रहे थे। निर्धारित समयानुसार परीक्षा सुबह 9 बजे शुरू होनी थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण यह करीब 10 बजे शुरू हो पाई।
#WATCH | Jaipur, Rajasthan: NEET-PG 2026 candidates protest at an examination centre in Sitapura, alleging disruptions during the exam due to technical issues.
— ANI (@ANI) August 30, 2026
A candidate, Vishnu Sharma, said, “I have come here to take the exam. Right from the start, even before the exam could… pic.twitter.com/AZEz01eDqj
छात्रों का यह भी आरोप था कि सिस्टम दोबारा चालू होने के बाद भी स्क्रीन पर सवाल ठीक से लोड नहीं हो रहे थे और केंद्र का स्टाफ इन तकनीकी गड़बड़ियों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। परीक्षा समाप्त होने के बाद गुस्साए छात्रों ने सेंटर के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि प्रदर्शन जारी रखने पर उन्हें कार्रवाई की धमकी दी गई। बार-बार सिस्टम फेल होने से परीक्षा की गोपनीयता पर संदेह जताते हुए छात्रों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
5 सितंबर को होगा री-एग्जाम, बोर्ड ने जारी की आधिकारिक सूचना
छात्रों की शिकायतों और हंगामे को देखते हुए, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने नीट-पीजी 2026 परीक्षा के दौरान जयपुर के सीतापुरा स्थित आयन डिजिटल जोन आईडीजी (ION Digital Zone IDG) के दो परीक्षा केंद्रों के प्रभावित उम्मीदवारों के लिए री-एग्जाम कराने का बड़ा निर्णय लिया है।
राज्य सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, एनबीईएमएस (NBEMS) ने स्वीकार किया कि आंतरिक बिजली आपूर्ति की समस्याओं के चलते केंद्र संख्या 41682 और 41683 पर परीक्षा सफलतापर्वक संपन्न नहीं हो सकी थी। बोर्ड ने इस असुविधा के लिए प्रभावित अभ्यर्थियों से माफी मांगी है।
तय कार्यक्रम के अनुसार, यह पुनर्परीक्षा 5 सितंबर 2026 (शनिवार) को दोपहर 3 बजे जयपुर में आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्र की विस्तृत जानकारी और संशोधित एडमिट कार्ड (Revised Admit Cards) जल्द ही अलग से जारी किए जाएंगे।
देश भर में क्या रहे नीट-पीजी 2026 के आंकड़े?
एनबीईएमएस के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष देश भर के 1,111 केंद्रों पर नीट-पीजी 2026 की मुख्य परीक्षा 30 अगस्त को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के लिए कुल 273,096 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 265,980 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि लगभग 263,535 उम्मीदवारों ने अपनी परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी की। जयपुर के सीतापुरा केंद्र के प्रभावित छात्रों के लिए अब बोर्ड ने री-एग्जाम का रास्ता साफ कर दिया है ताकि किसी भी योग्य छात्र का भविष्य संकट में न पड़े।
Joymoti Rescue: इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर वंतारा लाई गई 53 साल की हथिनी 'जॉयमोती', नगालैंड में बाढ़ से किया गया था रेस्क्यू
नागालैंड और असम में जुलाई के दौरान आई भीषण बाढ़ के बीच रेस्क्यू की गई 53 साल की हथिनी जॉयमोती को अब बेहतर इलाज के लिए जामनगर स्थित वंतारा लाया गया है। बाढ़ के दौरान जॉयमोती को कई गंभीर चोटें लगी थीं। उसकी उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत विशेषज्ञ इलाज की जरूरत थी, इसलिए उसे एयरलिफ्ट करके वंतारा के विशेष हाथी अस्पताल पहुंचाया गया।
बाढ़ में बह गई थी जॉयमोती
जॉयमोती जुलाई के दूसरे सप्ताह में नागालैंड में बाढ़ के तेज बहाव में बह गई थी। स्थानीय लोगों ने सरकारी एजेंसियों की मदद से उसे रेस्क्यू किया। इस दौरान उसके शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं। जॉयमोती के माथे, दाहिने कान, पूंछ के ऊपर के हिस्से, बाईं जांघ के अंदरूनी हिस्से और पेट पर घाव हैं। उसके बाहरी जननांग के आसपास भी गहरा घाव हो गया था, जिसमें कीड़े पड़ गए थे। इसके अलावा उसकी दाहिनी आंख भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। वह इस आंख से देख नहीं सकती और आंख से लगातार पानी आने की समस्या बनी हुई है।
पैर की पुरानी चोट से भी परेशान है हथिनी
जॉयमोती के बाएं पिछले पैर में भी लंबे समय से चोट की समस्या है। बताया गया है कि लकड़ी काटने के दौरान उसे फ्रैक्चर हुआ था। इस वजह से वह ठीक से चल नहीं पाती है। चलने में परेशानी के कारण उसके लिए भोजन और पानी तक पहुंचना भी मुश्किल होता है। बाढ़ के बाद लगी नई चोटों और पहले से मौजूद इस समस्या ने उसकी हालत को और गंभीर बना दिया।
स्थानीय स्तर पर दिया गया था शुरुआती इलाज
रेस्क्यू के बाद जॉयमोती को स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार दिया गया। उसके घावों की ड्रेसिंग की गई और दर्द कम करने के लिए दवाएं दी गईं। इसके अलावा उसे मल्टीविटामिन, मिनरल सप्लीमेंट्स और जरूरी सपोर्टिव ट्रीटमेंट भी दिया गया। लेकिन कई जगहों पर गंभीर चोटें होने, उम्र ज्यादा होने और चलने-फिरने में परेशानी को देखते हुए उसे ज्यादा विशेषज्ञ इलाज की जरूरत थी। इसी वजह से उसे वंतारा ले जाने का फैसला किया गया।
क्यों एयरलिफ्ट किया गया जॉयमोती को?
जॉयमोती को सड़क के रास्ते लंबी दूरी तक ले जाने में काफी समय लगता और उसकी चोटों को देखते हुए यह उसके लिए शारीरिक रूप से मुश्किल हो सकता था। ऐसे में एयरलिफ्ट के जरिए उसे कम समय में विशेषज्ञ अस्पताल तक पहुंचाने की कोशिश की गई।
यात्रा से पहले उसकी मेडिकल जांच और जरूरी तैयारियां की गईं। एयरलिफ्ट के दौरान भी उसकी सेहत और सुरक्षा पर लगातार नजर रखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर चोट या चलने-फिरने में परेशानी वाले हाथियों के लिए लंबी सड़क यात्रा का समय कम करना उनके स्वास्थ्य और आराम के लिहाज से अहम हो सकता है।
वंतारा में होगा जॉयमोती का पूरा इलाज
वंतारा पहुंचने के बाद जॉयमोती की विस्तृत मेडिकल जांच की जाएगी। उसके शरीर पर मौजूद घावों और दाहिनी आंख की स्थिति का विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम इलाज करेगी। इसके साथ ही उसे उसकी जरूरत के मुताबिक पौष्टिक आहार और सपोर्टिव केयर भी दी जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता उसकी चोटों का इलाज करने और उसकी सेहत में सुधार लाने की है।
भारत में पहली बार इस तरह हाथी का एयर ट्रांसफर
किसी हाथी को अस्पताल में गहन इलाज के लिए एयरलिफ्ट करके ले जाना भारत में अपनी तरह का पहला प्रयास बताया जा रहा है। इसके लिए पशु चिकित्सकों, एनिमल केयर टीम और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी टीमों ने मिलकर तैयारी की। जॉयमोती की यात्रा से पहले उसकी सेहत को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया तैयार की गई, ताकि उसे कम से कम परेशानी हो और वह सुरक्षित तरीके से अस्पताल तक पहुंच सके।
असम में वन्यजीवों के लिए मेडिकल सेंटर बनाने की योजना
जॉयमोती का मामला यह भी बताता है कि बाढ़ और मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले इलाकों के आसपास ही बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत है। इसी दिशा में वंतारा ने असम में तीन वन्यजीव पशु चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें हाथियों के लिए एक अलग और विशेष केंद्र भी शामिल होगा।
इन केंद्रों में अलग-अलग वन्यजीव प्रजातियों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने की योजना है। इनका संचालन असम वन विभाग द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि असम में घायल या बीमार हाथियों और दूसरे वन्यजीवों को उनके इलाके के करीब ही समय पर बेहतर इलाज मिल सके और हर मामले में उन्हें लंबी दूरी तक ले जाने की जरूरत न पड़े।
स्थायी रूप से वंतारा नहीं लाई गई है जॉयमोती
जॉयमोती को वंतारा लाना उसका स्थायी स्थानांतरण नहीं है। उसे सिर्फ तत्काल और विशेषज्ञ चिकित्सा उपचार देने के लिए यहां लाया गया है। फिलहाल जॉयमोती को जरूरी इलाज देना और उसकी सेहत में सुधार करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उम्मीद है कि विशेषज्ञ देखभाल मिलने के बाद वह धीरे-धीरे स्वस्थ होकर एक सुरक्षित और बेहतर जीवन की ओर लौट सकेगी।
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