NEET PG 2026 Re-Exam Admit Card: नीट पीजी री-एग्जाम के एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डाउनलोड
NEET PG 2026, Re-Exam Admit Card: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने नीट पीजी 2026 की दोबारा होने वाली परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। यह प्रवेश पत्र उन 2,445 प्रभावित उम्मीदवारों के लिए जारी किए गए हैं, जिनकी परीक्षा जयपुर, राजस्थान के आईओएन डिजिटल जोन आईडीजेड सीतापुरा परीक्षा केंद्रों पर आई तकनीकी खराबी के कारण बाधित हुई थी। उम्मीदवार अपना संशोधित एडमिट कार्ड बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट natboard.edu.in से डाउनलोड कर सकते हैं।
तय कार्यक्रम के अनुसार, यह री-एग्जाम आगामी 5 सितंबर 2026 (शनिवार) को दोपहर 3 बजे जयपुर में आयोजित किया जाएगा।
तकनीकी खराबी और पावर फेलियर के कारण दोबारा हो रही परीक्षा
गौरतलब है कि इससे पहले 30 अगस्त 2026 को आयोजित नीट पीजी परीक्षा देश भर के 1,111 केंद्रों पर कुल 2,73,096 पंजीकृत उम्मीदवारों के लिए कराई गई थी, जिसमें से 2,65,980 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा लगभग 2,63,535 उम्मीदवारों के लिए सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी।
हालांकि, जयपुर के आईओएन डिजिटल जोन आईडीजेड सीतापुरा केंद्रों (टीसी नंबर 41682 और 41683) पर आंतरिक बिजली फेल होने की समस्या के कारण वहां मौजूद छात्र परीक्षा पूरी नहीं कर सके थे। एनबीईएमएस ने इस व्यवधान के लिए परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी एम/एस टीसीएस लिमिटेड को जिम्मेदार ठहराया था।
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की आसान प्रक्रिया
पुनर्परीक्षा में शामिल होने जा रहे छात्र नीचे दिए गए चरणों का पालन करके अपना संशोधित हॉल टिकट प्राप्त कर सकते हैं:
- सबसे पहले आधिकारिक एनबीईएमएस पोर्टल natboard.edu.in पर जाएं।
- होमपेज पर दिए गए 'नीट पीजी 2026 री-एग्जामिनेशन एडमिट कार्ड' लिंक को खोजें।
- उस लिंक पर क्लिक करें और अपनी आवश्यक लॉगिन जानकारी दर्ज करें।
- विवरण भरकर अपना संशोधित प्रवेश पत्र स्क्रीन पर प्राप्त करें।
- एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और परीक्षा की तिथि, समय व स्थान की अच्छी तरह जांच कर लें।
- भविष्य और परीक्षा केंद्र पर ले जाने के लिए इसका एक प्रिंटआउट सुरक्षित निकाल लें।
बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक, सभी उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा केंद्र पर अपने संशोधित एडमिट कार्ड में दी गई सभी जानकारियों और निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, परीक्षा से जुड़ी किसी भी अन्य अपडेट के लिए केवल एनबीईएमएस की आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें।
MF Return: म्यूचुअल फंड का रिटर्न देखते समय न करें ये गलती, समझें CAGR और XIRR का फर्क
म्यूचुअल फंड में निवेश करने के बाद सबसे पहले निवेशक यह जानना चाहता है कि उसके पैसे ने कितना रिटर्न दिया लेकिन सिर्फ रिटर्न का प्रतिशत देखना काफी नहीं है। सीएजीआर, XIRR और एबसोल्यूट रिटर्न तीनों अलग-अलग तरीके से निवेश के प्रदर्शन को मापते हैं। इसलिए सही तस्वीर पाने के लिए यह समझना जरूरी है कि किस तरह के निवेश में कौन-सा रिटर्न देखना चाहिए।
गलत रिटर्न इंडिकेटर का इस्तेमाल करने पर निवेशक को अपने पोर्टफोलियो की वास्तविक ग्रोथ के बारे में भ्रम हो सकता। खासकर एसआईपी करने वाले निवेशकों के लिए यह समझना ज्यादा जरूरी है, क्योंकि इसमें पैसा एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग तारीखों पर निवेश होता है।
लंपसंम निवेश में CAGR ज्यादा उपयोगी
अगर आपने किसी म्यूचुअल फंड में एकमुश्त यानी लंपसंप पैसा लगाया है और उसे कई साल तक निवेशित रखा है, तो सीएजीआर आपके लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है। CAGR यानी Compounded Annual Growth Rate यह बताता है कि निवेश ने औसतन हर साल कितनी दर से ग्रोथ की।
उदाहरण के लिए, अगर एकमुश्त निवेश पांच साल तक रखा गया, तो सीएजीआर निवेश की सालाना औसत वृद्धि को समझने में मदद करता है। इसमें साल-दर-साल होने वाले उतार-चढ़ाव को एक औसत वार्षिक दर में दिखाया जाता है। हालांकि, सीएजीआर ऐसे निवेश के लिए सही पैमाना नहीं है जिसमें अलग-अलग समय पर लगातार पैसा लगाया गया हो।
SIP के लिए XIRR क्यों जरूरी?
एसआईपी में हर किस्त अलग तारीख को निवेश होती है। अलग-अलग तारीखों पर निवेश होने के कारण हर किस्त को बाजार में पैसा बढ़ाने के लिए अलग समय मिलता है। ऐसे में सिर्फ सीएजीआर या एबसोल्यूट रिटर्न देखने से पोर्टफोलियो की सही तस्वीर नहीं मिल सकती।
यहीं XIRR यानी एक्सटेंडेट इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न काम आता है। XIRR अलग-अलग तारीखों पर किए गए निवेश और निकासी को ध्यान में रखकर सालाना रिटर्न की गणना करता है। इसलिए इसमें निवेश की रकम के साथ-साथ पैसा कब लगाया गया और कब निकाला गया, दोनों चीजें शामिल होती हैं। इसी वजह से नियमित SIP और बीच-बीच में किए गए टॉप-अप वाले निवेश के लिए XIRR आमतौर पर ज्यादा उपयोगी माना जाता है।
Absolute Return क्या बताता है?
एबसोल्यूट रिटर्न सबसे आसान तरीके से निवेश पर हुए कुल लाभ या नुकसान को बताता है। इसमें यह देखा जाता है कि शुरुआती निवेश की तुलना में मौजूदा वैल्यू कितनी बढ़ी या घटी है।
यह तरीका खासकर कम अवधि के निवेश, जैसे एक साल से कम समय के लिए, उपयोगी हो सकता है। समान अवधि के दो निवेशों की तुलना करने में भी एबसोल्यूट रिटर्न मददगार है। लेकिन इसमें यह नहीं देखा जाता कि पैसा कितने समय तक निवेशित रहा। मसलन, तीन साल में मिला 45% रिटर्न और एक साल में मिला 45% रिटर्न एक जैसी ग्रोथ नहीं दर्शाते। इसलिए अलग-अलग अवधि वाले निवेशों की तुलना एबसोल्यूट रिटर्न के आधार पर करना सही नहीं होगा।
किस स्थिति में कौन-सा रिटर्न देखें?
म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन को समझने के लिए सिर्फ सबसे बड़ा रिटर्न प्रतिशत देखना सही तरीका नहीं है। एकमुश्त और लंबे समय के निवेश में CAGR, अलग-अलग तारीखों पर किए गए निवेश या एसआईपी में XIRR, जबकि छोटी और समान अवधि के निवेश में एबसोल्यूट रिटर्न ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
यानी सही रिटर्न वही है जो आपके निवेश के तरीके और अवधि को ध्यान में रखकर गणना किया गया हो। नियमित SIP से लंबी अवधि में पैसा बनाने वाले निवेशकों के लिए XIRR पोर्टफोलियो की वास्तविक परफॉर्मेंस समझने का ज्यादा बेहतर पैमाना हो सकता है।
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