Nepal Flash Flood Destruction: नेपाल में बाढ़ से भीषण तबाही; 11 हाइड्रो पावर प्लांट, 40 KM सड़कें, 19 पुल और 10 से ज्यादा बैंक तबाह
नेपाल के तिब्बत सीमा से सटे हिमालयी और तराई क्षेत्रों में अचानक आई प्रलयंकारी बाढ़ ने व्यापक स्तर पर जान-माल और सरकारी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। रसुवा जिले के स्याब्रुबेसी और तिमुरे समेत नुवाकोट के त्रिशूली नदी तटीय इलाकों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। बाढ़ का तेज बहाव अपने साथ सड़कें, पक्के पुल, रिहायशी बस्तियां और ऊर्जा परियोजनाओं को बहा ले गया, जिससे पर्वतीय इलाकों का राजधानी काठमांडू और अन्य प्रमुख शहरों से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
11 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान, बिजली आपूर्ति ठप
नेपाल के ऊर्जा एवं जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे स्थित लगभग 11 हाइड्रो पावर प्लांट्स और 25 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना के सब-स्टेशन को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
कई निर्माणाधीन और संचालित जलविद्युत परियोजनाओं के बांध, टनल और टरबाइन हाउस मलबे और गाद में दब गए हैं। ऊर्जा संयंत्रों के ठप होने से कई जिलों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे औद्योगिक और घरेलू उपभोक्ताओं को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
40 किलोमीटर सड़कें और 19 पुल बहे, कई इलाके बने टापू
सड़क विभाग के उप महानिदेशक और प्रवक्ता शुभराज न्यौपाने के अनुसार, प्रारंभिक आकलन में कम से कम 19 मोटर वाहन पुल बह गए हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 40 किलोमीटर लंबे राजमार्ग और संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके हैं।
सड़कें और पुल टूटने से प्रभावित गांवों तक राहत सामग्री और मेडिकल टीमों को पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। सड़क विभाग ने मलबे को हटाने और वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के लिए भारी मशीनरी और बुलडोजर तैनात किए हैं।
10 से अधिक बैंक और 25 टेलीकॉम साइट्स तबाह, बैंकिंग व संचार सेवाएं बंद
बाढ़ का पानी बाजारों और वाणिज्यिक केंद्रों में घुसने से 10 से अधिक बैंकों की शाखाओं, एटीएम और वित्तीय संस्थानों के दफ्तरों में पानी व कीचड़ भर गया, जिससे रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बर्बाद हो गए हैं।
वहीं 25 से अधिक टेलीकॉम टावर और ऑप्टिकल फाइबर केबल क्षतिग्रस्त होने से संचार व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नेटवर्क न होने के कारण लोग अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और आपदा प्रबंधन टीमों को भी समन्वय बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सेना और हेलिकॉप्टरों से रेस्क्यू, खतरे वाले इलाकों से निकाले जा रहे लोग
आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आपातकालीन समीक्षा बैठक की और सेना, सशस्त्र पुलिस बल तथा प्रशासनिक अमले को राहत कार्य में झोंक दिया है।
त्रिशूली बाजार और रसुवा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दो सैन्य हेलिकॉप्टर तैनात कर फंसे हुए लोगों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। नदी किनारे बसे निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सख्त चेतावनी जारी की गई है।
कुदरत का कहर: नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 55 की मौत; 400 से ज्यादा लोग लापता, बिहार में हाई अलर्ट
चीन के तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भारी तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी समेत कई इलाकों में घर, बाजार और अन्य संपत्तियां क्षतिग्रस्त हो गईं। बाढ़ के तेज बहाव में वाहन और सामान बह गए, जबकि एक पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी तबाह हो गया।
अब तक कम से कम 55 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में कई भारतीय भी हैं। नेपाली मीडिया के अनुसार, नुवाकोट और धाडिंग जिलों से अब तक 8 शव बरामद किए गए हैं।
रसुवा में नेपाल पुलिस के 26 जवान और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 7 जवान भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल सेना ने प्रभावित इलाकों में हेलिकॉप्टर और आपदा राहत कर्मियों को तैनात किया है। सेना के मुताबिक, नुकसान का आकलन और जानकारी जुटाने का काम जारी है।
बाढ़ के असर को देखते हुए बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हाई अलर्ट पर हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब 3 मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है। पढ़िए पूरी खबर...
रसुवा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित, 1000 लोगों के बहने की आशंका
प्राप्त शुरुआती जानकारियों के अनुसार, इस जलप्रलय में करीब 1,000 लोगों के बह जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस आंकड़े की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है और जैसे-जैसे राहत व बचाव कार्य आगे बढ़ रहे हैं, नुकसान की असल स्थिति का आकलन किया जा रहा है। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि रसुवा जिले के पहाड़ी इलाके जैसे स्याप्रु बेसी (Syapru Besi) और टिमुरे (Timure) सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। तिब्बत से सटे इस क्षेत्र में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।
भोटेकोसी नदी रसुवामा तिब्बत तर्फबाट ठुलो बाढी प्रवेश गरेकोले अर्को सूचना नआउँदासम्म त्रीशुली नदीको तटिय क्षेत्रका जिल्लाहरु नुवाकोट, धादिङ, चितवन, गोरखा लगायतका स्थानहरूमा उच्च सतर्कता सहित सुरक्षित स्थानमा रहन अनुरोध छ। pic.twitter.com/Zun6icZZCM
— Nepal Police (@NepalPoliceHQ) August 26, 2026
कैसे आई बाढ़?
नेपाल पुलिस के मुताबिक, तिब्बत की तरफ से बहने वाली भोटे कोशी नदी (Bhote Koshi River) में अचानक पानी का जलस्तर बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ने के कारण यह फ्लैश फ्लड आया। इसे देखते हुए प्रशासन ने भोटे कोशी नदी के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सख्त चेतावनी दी है। इसके अलावा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा समेत त्रिशूल नदी बेसिन के आसपास के सभी जिलों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है, और लोगों से अगले आदेश तक सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुलाई आपातकालीन बैठक
इस भीषण आपदा को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने स्थिति की समीक्षा करने और राहत कार्यों को तेज करने के लिए नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट काउंसिल की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। प्रधानमंत्री के सलाहकार असीम शाह ने जानकारी दी है कि पीएम खुद प्रभावित क्षेत्रों के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर्स के सीधे संपर्क में हैं और हालात पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।
बचाव अभियान में आ रही हैं मुश्किलें
प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। आपदा प्रबंधन की टीमें बर्बादी के दायरे को आंकने और तेज बहाव में लापता हुए लोगों की तलाश में जुटी हैं। हालांकि, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि दुर्गम पहाड़ी इलाके और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण बचाव अभियानों में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। जैसे-जैसे रेस्क्यू टीमें अंदरूनी इलाकों तक पहुंच रही हैं, हताहतों और नुकसान को लेकर और अधिक आधिकारिक जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
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