जब हार्ट ने दे दिया जवाब और प्रत्यारोपण ही बची आखिरी उम्मीद, तब गुजरात के मंत्री बने सहारा
सूरत, 6 सितंबर (आईएएनएस)। सूरत के 37 वर्षीय निवासी किशन पेठाणी को अहमदाबाद के यूएन मेहता हार्ट हॉस्पिटल में नि:शुल्क हृदय प्रत्यारोपण (हार्ट ट्रांसप्लांट) के बाद नया जीवन मिला है। यह संभव गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया और अस्पताल की ट्रांसप्लांट टीम के प्रयासों से हो सका।
मूलरूप से अमरेली के रहने वाले और वर्तमान में सूरत में रह रहे किशन पिछले करीब दो वर्षों से गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थे। मुंबई, अहमदाबाद और सूरत में इलाज कराने तथा सूरत के एक निजी अस्पताल में दो स्टेंट डलवाने के बावजूद उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई।
आखिरकार डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी जान बचाने के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा है। हालांकि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण यह उपचार उनके लिए बेहद कठिन था।
इसके बाद किशन ने अपनी बीमारी और आर्थिक परेशानी की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया को दी। मंत्री ने उनका मामला यूएन मेहता अस्पताल को भेजने की सिफारिश की।
किशन ने बताया, समय के साथ मेरा हृदय गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था और हार्ट ट्रांसप्लांट के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। जब मैंने अपनी बीमारी और आर्थिक स्थिति के बारे में मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया को बताया तो उन्होंने मुझे यूएन मेहता अस्पताल की सिफारिश की। उनके प्रयासों से 27 जून को सफलतापूर्वक मेरा हृदय प्रत्यारोपण हुआ और आज मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं।
यह प्रत्यारोपण डॉ. विशाल शर्मा की देखरेख में डॉ. चिराग दोशी और डॉ. प्रतीक माणेक की टीम ने किया। किशन का कहना है कि इस उपचार ने उन्हें एक तरह से नया जीवन दिया है।
उन्होंने अपने उपचार के दौरान का एक भावुक अनुभव भी साझा किया। प्रत्यारोपण के कुछ दिनों बाद, 3 जुलाई को उनका जन्मदिन था। इस अवसर पर यूएन मेहता अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने उनके साथ केक काटकर जन्मदिन मनाया।
किशन ने कहा, यह मेरे लिए बेहद यादगार पल था, जिसे मैं जीवनभर नहीं भूल पाऊंगा।
स्वस्थ होने के बाद किशन ने मंत्री पानशेरिया से मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रफुल्ल पानशेरिया ने अंगदान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एक ब्रेन-डेड व्यक्ति द्वारा दान किए गए अंग सात से आठ लोगों की जान बचा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि त्वचा, आंखों की कॉर्निया, हड्डियां और हृदय के वाल्व जैसे दान किए गए ऊतक (टिश्यू) भी लगभग 50 से 75 जरूरतमंद लोगों के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।
पानशेरिया ने कहा कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल, किडनी अस्पताल और सूरत सिविल अस्पताल जैसी सरकारी संस्थाओं ने अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने जागरूकता फैलाने में डॉक्टरों और स्वयंसेवी संगठनों (एनजीओ) की भूमिका की भी सराहना की।
उन्होंने उन परिवारों की भी प्रशंसा की, जो अपने प्रियजन के निधन के दुख के बावजूद उनके अंगदान के लिए सहमति देते हैं। मंत्री ने कहा कि यह एक मानवीय निर्णय है, जो कई अन्य लोगों को नया जीवन दे सकता है।
पानशेरिया ने कहा, अंगदान के लिए किए गए ऐसे सामूहिक प्रयासों ने कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दिया है। आज किशन पहले की तरह चल-फिर और दौड़ सकते हैं।
उन्होंने लोगों से विशेष रूप से ब्रेन-डेड मामलों में अंगदान के लिए आगे आने की अपील की, ताकि प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे अधिक से अधिक मरीजों की मदद की जा सके।
गुजरात में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत अंगदान और प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। राज्य के सरकारी अस्पताल और ट्रांसप्लांट केंद्र उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो महंगे इलाज का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं।
हाल के वर्षों में गुजरात के स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर हुई चर्चाओं में अंगदान की पहुंच बढ़ाने और प्रत्यारोपण प्रक्रिया के बेहतर समन्वय के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में हादसे को लेकर ABVP का प्रदर्शन, MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग
दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला पीजी इमारत के ढहने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों ने जमकर हंगामा काटा. इस दौरान सिविक सेंटर स्थित एमसीडी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने एमसीडी कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने दिल्ली के सत्य निकेतन में ढही इमारत के विरोध में सिविक सेंटर में मौजूद MCD ऑफिस के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प देखने को मिली. MCD कार्यालय में तोड़फोड़ भी हुई. इसके साथ जादवपुर यूनिवर्सिटी में 'वंदे मातरम' मार्च और बेंगलुरु व मेरठ में कई मामलों को लेकर एबीवीपी के प्रदर्शन की चर्चा हो रही है.
#WATCH | Delhi: ABVP (Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) members protest outside the MCD Office at Civic Centre over the Satya Niketan building collapse incident.
— ANI (@ANI) September 6, 2026
The protesters are demanding the resignation of the MCD Commissioner.
According to the latest update from… pic.twitter.com/cGiViSKKVv
सख्त कार्रवाई की मांग उठाई
एबीवीपी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की गंभीर लापरवाही का परिणाम है. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने एमसीडी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इस दौरान जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई. प्रदर्शनकारियों के अनुसार, अगर इमारतों की समय पर जांच होती है और नियमों का सही तरह से पालन किया जाता है तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था. एबीवीपी ने मांग की कि इस मामले की जिम्मेदारी तय की जाए और लापरवाही बरतने वाले अफसरों को तुरंत हटाया जाए.
एमसीडी ऑफिस परिसर में तोड़फोड़
प्रदर्शन के दौरान सिविक सेंटर पर मौजूद एमसीडी ऑफिस के बाहर काफी हंगामा देखाई दिया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने एमसीडी ऑफिस परिसर में तोड़फोड़ भी की. इसके बाद इलाके में सुरक्षा काफी बढ़ाई गई. एबीवीपी कार्यकर्ताओं की डिमांड है कि एमसीडी कमिश्नर के इस्तीफे को लेकर है. एबीवीपी के अनुसार, शहर में अवैध निर्माण, जर्जर इमारतों और बिल्डिंग की सुरक्षा से जुड़े केस में एमसीडी की जवाबदेही तय होनी जरूरी है.
मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हुई
इस बीच सत्य निकेतन इमारत हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में अब अब तक चार लोगों की जान गई है। घटना के बाद राहत और बचाव का अभी जारी है। हताहत लोगों की सहायता को लेकर टीम मौके पर मौजूद है। सत्य निकेतन के मामले के बाद फिर दिल्ली में पुरानी और कमजोर इमारतों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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