केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने उद्योग और रिसर्च संस्थानों के बीच सहयोग पर दिया जोर, बोले- पहले दिन से साथ आए कमर्शियल विंग
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग के तरीके में बुनियादी बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संभावित व्यावसायिक साझेदारों को अनुसंधान परियोजनाओं में शुरुआत से ही शामिल किया जाना चाहिए।
कोलकाता में सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी (सीएसआईआर-आईआईसीबी) में आयोजित छठे आरआईएसई कॉन्क्लेव के दौरान इंडस्ट्री के सीईओ, सीएसओ और सीओओ से बातचीत करते हुए मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, कमर्शियल विंग (व्यावसायिक शाखा) को पहले दिन से ही लैब के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि प्रोजेक्ट-प्लानिंग के चरण में ही इंडस्ट्री को शामिल करने से यह सुनिश्चित होगा कि जब कोई टेक्नोलॉजी विकसित हो रही हो, तभी बाजार की जरूरतों, यूजर की जरूरतों और कमर्शियल पहलुओं को उसमें शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे ऐसी स्थितियों से बचने में मदद मिलेगी जब कोई टेक्नोलॉजी बाजार में तो आ जाए, लेकिन बाद में इंडस्ट्री या कंज्यूमर की असल जरूरतों को पूरा करने के लिए उसमें बड़े बदलाव करने पड़ें।
इंडस्ट्री के इस सुझाव पर कि कमर्शियल पार्टनर्स को लेबोरेटरी के चरण में ही शामिल किया जाना चाहिए, मंत्री ने कहा कि इंडस्ट्री की शुरुआती भागीदारी से बाजार की स्थितियों, प्रोडक्ट डिजाइन, पर्यावरण की स्थिरता, सप्लाई-चेन की जरूरतों और कमर्शियल व्यवहार्यता के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोग से लेबोरेटरी रिसर्च और बाजार के लिए तैयार प्रोडक्ट्स के बीच की खाई को पाटने में मदद मिलेगी।
इस बातचीत से इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों को मंत्री के सामने खास तकनीकी चुनौतियों और जरूरतों को रखने का मौका भी मिला। चर्चा के अहम विषयों में महत्वपूर्ण मिनरल्स और स्वदेशी टेक्नोलॉजी शामिल रहीं। प्रतिभागियों ने रेयर-अर्थ एक्सट्रैक्शन, परमानेंट मैग्नेट, रीसाइक्लिंग, लिथियम बेनिफिशिएशन और वैनेडियम व टाइटेनियम जैसे रणनीतिक मिनरल्स की रिकवरी में मौजूद अवसरों पर जोर दिया।
इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने इन क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर विकसित करने के लिए सीएसआईआर लेबोरेटरीज से तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन की मांग की। चर्चा में पूर्वी भारत में रेयर-अर्थ संसाधनों और अन्य महत्वपूर्ण मिनरल्स की खोज की संभावनाओं पर भी बात हुई।
डॉ. सिंह ने सीएसआईआर लेबोरेटरीज और अन्य सरकारी वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित की जा रही क्षमताओं का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने इंडस्ट्री को खास जरूरतों की पहचान करने और व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए लेबोरेटरीज के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।
बातचीत के दौरान स्पेस टेक्नोलॉजी और खास ऑप्टिकल कंपोनेंट्स के बारे में भी बात हुई। मंत्री ने इंडस्ट्री द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जानकारी मांगी और संकेत दिया कि स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े मामलों को डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के साथ उठाया जा सकता है।
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डोंबिवली से कारगिल तक 2252 किलोमीटर लंबी देशभक्ति यात्रा का समापन, 42 तिरंगे फहराकर देश के वीर जवानों को किया नमन
भारतीय जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश लेकर डोंबिवली से कारगिल तक निकली रोहित आचरेकर और उनके साथियों की देशभक्ति राइड का शनिवार को डोंबिवली में समापन हुआ. ‘एक बंधन, रक्षाबंधन’ उपक्रम के तहत शुरू हुई यह यात्रा डोंबिवली की पहचान माने जाने वाले दहीहंडी उत्सव में सहभागिता के साथ पूरी हुई. रोहित आचरेकर के ‘वे टू कॉज राइडर्स क्लब’ की ओर से पिछले 20 वर्षों से ‘एक बंधन, रक्षाबंधन’ अभियान चलाया जा रहा है. भारतीय जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने वाली इस पहल को पिछले कुछ वर्षों से भाजपा महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के ‘डोंबिवलीकर एक सांस्कृतिक परिवार’ के माध्यम से सहयोग मिल रहा है.
1000 वर्ग फुट का विशाल तिरंगा फहराया
इस वर्ष की राइड ‘शिवराष्ट्र– राष्ट्र प्रथम, वीर सर्वोपरि’ की भावना को समर्पित रही. अभियान के तहत डोंबिवली से कारगिल तक 2252 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की गई. 15 अगस्त को कारगिल में करीब 1000 वर्ग फुट का विशाल तिरंगा फहराया गया. इसके अलावा विजयपथ पर 12 वर्ग फुट आकार के 42 तिरंगे फहराकर देश के वीर जवानों को नमन किया गया.
कारगिल के बाद बाइक राइड लेह, तुरतुक, पेंगोंग लेक, हानले, उमलिंग ला और लामायुरू जैसे दुर्गम इलाकों तक पहुंची. देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इन स्थानों पर 80 वर्ग फुट के तिरंगे का हैंड होइस्टिंग कर राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया. पूरी यात्रा के दौरान देशभक्ति, तिरंगे के सम्मान और भारतीय सैनिकों के प्रति कृतज्ञता का संदेश दिया गया.
कारगिल में जवानों के साथ मनाया रक्षाबंधन
इस यात्रा का सबसे भावुक पल 28 अगस्त को कारगिल में देखने को मिला. रोहित आचरेकर और उनके साथियों ने भारतीय सैनिकों के साथ रक्षाबंधन मनाया और जवानों की कलाई पर राखी बांधी. इस दौरान सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की गई. जवानों और नागरिकों के बीच स्नेह एवं विश्वास के रिश्ते को मजबूत करने वाला यह पल यात्रा की खास यादों में शामिल रहा.
दुर्गम इलाकों में राष्ट्रध्वज का सम्मान
कारगिल से शुरू हुआ यह देशभक्ति का सफर विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों से होते हुए शनिवार को दोबारा डोंबिवली पहुंचा. सीमा पर तिरंगा फहराने, दुर्गम इलाकों में राष्ट्रध्वज का सम्मान करने और भारतीय जवानों के साथ रक्षाबंधन मनाने के बाद यात्रा का समापन डोंबिवली के दहीहंडी उत्सव में सहभागिता के साथ हुआ.
कारगिल से डोंबिवली तक तिरंगे के सम्मान और राष्ट्रप्रेम का संदेश लेकर पहुंची यह यात्रा शहरवासियों के लिए गर्व का विषय बनी. रोहित आचरेकर और उनके साथियों की यह पहल युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाने और भारतीय जवानों के प्रति सम्मान बढ़ाने का प्रेरणादायी प्रयास साबित हुई.

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