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Viral Video: बड़े शहर की चमक के पीछे छिपी महंगाई, नोएडा पहुंचे बंदे ने बताया क्यों मुश्किल है बचत करना

नोएडा की महंगी जिंदगी पर बांदा से आए अखंड के सवाल ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. 25 हजार की सैलरी और भारी किराए को लेकर उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसे में बचत कैसे होगी?

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Tata Motors JLR Restructuring: घटती बिक्री और US Tariffs के बीच JLR में 4000 Jobs पर लटकी तलवार

टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर करीब 4,000 नौकरियों में कटौती की तैयारी कर रही है। कंपनी ने कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों को स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना के बारे में जानकारी दे दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब कंपनी घटती बिक्री, बढ़ती लागत, अमेरिकी आयात शुल्क और पिछले साल हुए बड़े साइबर हमले के असर से जूझ रही है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी इस योजना की औपचारिक घोषणा सोमवार को कर सकती है। इसके तहत वेतन पाने वाले कर्मचारियों और प्रबंधन स्तर के लोगों को स्वेच्छा से कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया जाएगा। हालांकि करीब 4,000 कर्मचारियों की संभावित कमी की खबरें सामने आई हैं, लेकिन जगुआर लैंड रोवर ने अभी इस संख्या की पुष्टि नहीं की है।

कंपनी का लक्ष्य अगले दो वर्षों में करीब 1.7 अरब पाउंड की बचत करना है। इसके साथ ही वह अपने कामकाज को इस तरह व्यवस्थित करना चाहती है कि उसे लाभ-हानि की बराबरी के लिए सालाना करीब तीन लाख वाहन बेचने पड़ें। कंपनी के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में उसने अपने विभिन्न ब्रांडों को मजबूत करने और नए उत्पादों की दिशा में काम किया है, लेकिन वैश्विक बाजार की बदलती परिस्थितियों के कारण अब संगठन को और सरल बनाने तथा कामकाज की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।

बता दें कि जगुआर लैंड रोवर के इंग्लैंड में तीन मैन्यफैक्चरिंग यूनिट हैं और वहां करीब 34,000 लोग सीधे काम करते हैं। इसके अलावा कंपनी की आपूर्ति श्रृंखला से ब्रिटेन में करीब 1.20 लाख अन्य रोजगार जुड़े हुए हैं। इसलिए बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की संख्या घटने का असर केवल कंपनी तक सीमित रहने के बजाय ब्रिटेन के वाहन उद्योग और उससे जुड़े कारोबारों पर भी पड़ सकता है।

गौरतलब है कि लगभग एक साल पहले जगुआर लैंड रोवर को एक बड़े साइबर हमले का सामना करना पड़ा था। इस हमले के बाद कंपनी का उत्पादन कई सप्ताह तक ठप रहा था। इस व्यवधान के कारण उत्पादन में करीब 27 प्रतिशत की गिरावट आई और बाद में इस हमले से कंपनी को लगभग 1.9 अरब पाउंड का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया। मौजूदा कर्मचारियों की कटौती की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब कंपनी अभी उस झटके से पूरी तरह उबरने की कोशिश कर रही है।

कंपनी के सामने एक और बड़ी चुनौती अमेरिका का बाजार है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से ब्रिटेन से आने वाली कारों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने का असर भी जगुआर लैंड रोवर पर पड़ा है। उत्तरी अमेरिका कंपनी की वैश्विक बिक्री में करीब 29 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, इसलिए इस बाजार में किसी भी तरह का दबाव कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा सस्ती चीनी वाहन कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी ने भी पारंपरिक वाहन निर्माताओं की मुश्किलें बढ़ाई हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ता उद्योग, कमजोर मांग, महंगी ऊर्जा और उत्पादन लागत जैसी चुनौतियां पहले से ही वाहन कंपनियों पर दबाव बना रही हैं।

जगुआर लैंड रोवर के मुख्य कार्यकारी पीबी बालाजी पर भी ऐसे माहौल में कंपनी को बचत की राह पर ले जाने का दबाव बढ़ा है। जून 2026 में समाप्त तिमाही में कंपनी का राजस्व करीब 10 प्रतिशत घटा है। ऐसे में प्रस्तावित कर्मचारियों की संख्या में कमी को कंपनी की व्यापक लागत घटाने की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

श्रमिक संगठन यूनाइट की महासचिव शेरोन ग्राहम ने संभावित नौकरी कटौती पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ कर्मचारियों पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए गहन बातचीत हुई है। उनका कहना है कि बार-बार उद्योग की मुश्किलों का बोझ कर्मचारियों पर डालना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने लंबे समय से कम निवेश, महंगी औद्योगिक बिजली और शून्य उत्सर्जन वाहनों से जुड़े नियमों को भी उद्योग की परेशानियों का कारण बताया है।

ब्रिटेन सरकार ने भी कर्मचारियों, उनके परिवारों और प्रभावित समुदायों की चिंता को स्वीकार किया है। सरकार ने वाहन उद्योग के लिए बिजली लागत घटाने, शून्य उत्सर्जन वाहन निर्माण के लिए चार अरब पाउंड की पूंजी और अनुसंधान सहायता तथा इलेक्ट्रिक कारों की खरीद को बढ़ावा देने के लिए दो अरब पाउंड की योजना जैसी पहलों का उल्लेख किया है।

ऐसे में जगुआर लैंड रोवर का अगला कदम ब्रिटेन के वाहन उद्योग के लिए काफी अहम माना जा रहा है। कंपनी के सामने लागत घटाने के साथ उत्पादन, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है और आने वाले समय में उसके फैसले पूरे ब्रिटिश विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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