झारखंड के मंत्री Sudivya Kumar का निधन, Hemant Soren के रहे प्रमुख संकटमोचक
(नमिता तिवारी) रांची, छह सितंबर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भरोसेमंद सहयोगी और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अहम सियासी संकटमोचकों में शामिल रहे सुदिव्य कुमार ने सबसे चुनौतीपूर्ण क्षणों में पार्टी को उबारने में अहम भूमिका निभाई थी। इसमें सोरेन की गिरफ्तारी से लेकर चुनाव अभियान, सीट बंटवारे के लिए बातचीत और हालिया छात्र आंदोलन तक के दौर शामिल हैं। गिरिडीह से दो बार के विधायक और राज्य मंत्री रहे 56 वर्षीय कुमार के आकस्मिक निधन से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने ऐसे नेता को खो दिया है, जिसका महत्व उनके पास रहे मंत्री पद से कहीं अधिक था।
कुमार तकनीकी एवं उच्च शिक्षा, शहरी विकास, पर्यटन तथा खेल एवं युवा मामलों के विभागों के प्रभारी थे। लेकिन उनका राजनीतिक महत्व इस बात में था कि जब भी पार्टी मुश्किल परिस्थितियों का सामना करती थी, वह आगे बढ़कर मोर्चा संभाल लेते थे। सोरेन के लिए कुमार बड़े भाई जैसे थे, जो मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े रहे।
वह मुख्यमंत्री के राजनीतिक रूप से भरोसेमंद लोगों में शामिल हो गए थे। जनवरी 2024 में कथित भूमि घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सोरेन की गिरफ्तारी के बाद उथल-पुथल भरे दौर में कुमार की भूमिका सबसे अधिक दिखाई दी। झामुमो नेतृत्व के सामने जब सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक खड़ी थी, तब कुमार उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने पार्टी की संगठनात्मक और राजनीतिक मशीनरी को सुचारू रूप से चलाए रखने में मदद की और सोरेन के साथ मजबूती से खड़े रहे।
इसके तुरंत बाद उन्हें एक और राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें गांडेय विधानसभा उपचुनाव में झामुमो के चुनाव अभियान की कमान सौंपी गई। यह चुनाव कल्पना सोरेन का पहला चुनाव था।
कुमार ने पार्टी की मुख्य चुनाव अभियान समिति की अगुवाई की और उनके चुनाव अभियान की रणनीति तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। जून 2024 में कल्पना सोरेन की जीत से झामुमो को महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़त मिली और मुख्यमंत्री की पत्नी को सोरेन खेमे के एक नए चुनावी चेहरे के रूप में स्थापित किया। वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद के साथ सीट बंटवारे को लेकर हुई बातचीत में कुमार झामुमो के प्रमुख वार्ताकारों में शामिल थे।
उनकी भूमिका चुनावों तक सीमित नहीं थी। वह झामुमो के राजनीतिक संगठन और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थे और उन्हें चुनावी रणनीति, राजनीतिक बातचीत तथा अन्य संवेदनशील जिम्मेदारियां सौंपी जाती थीं। कठिन परिस्थितियों से निपटने की उनकी क्षमता हालिया छात्र आंदोलन के दौरान भी देखने को मिली।
यह आंदोलन परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर नौकरी पाने के इच्छुक अभ्यर्थियों ने किया था। सोरेन द्वारा गठित मंत्रिमंडलीय समिति की अध्यक्षता कुमार ने की और गतिरोध खत्म करने के प्रयास में उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कई दौर की बातचीत की। धनबाद में 26 जुलाई 1970 को जन्मे कुमार ने कम उम्र में ही राजनीति में प्रवेश किया था।
उन्होंने वर्ष 2009 और 2014 का विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2019 में उन्होंने गिरिडीह सीट से जीत हासिल की। वर्ष 2024 में उन्होंने इस सीट पर अपनी जीत बरकरार रखी।
कुमार के परिवार में उनकी पत्नी श्वेता शर्मा, दो बेटियां और एक बेटा है।
US CPI आंकड़ों और कच्चे तेल के रुख से तय होगी Gold-Silver की चाल
नयी दिल्ली, छह सितंबर अमेरिका के आगामी मुद्रास्फीति आंकड़े, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव इस सप्ताह सोने-चांदी की कीमतों के प्रमुख निर्धारक होंगे। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बढ़ी अटकलों के बीच निवेशकों की इन घटनाक्रमों पर नजर रहेगी।
निवेशक जर्मनी और चीन के उपभोक्ता मूल्य आंकड़ों, यूरो क्षेत्र, जापान और ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों तथा चीन के व्यापार आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा, ‘‘ब्याज दरों के परिदृश्य को लेकर काफी अटकलों के बीच अमेरिका के मुद्रास्फीति आंकड़े सर्राफा बाजार के लिए प्रमुख कारक होंगे।’’ अमेरिका के अगस्त 2026 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़े 11 सितंबर को जारी होने हैं। उन्होंने कहा कि सोने में 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर प्रतिरोध और चांदी में 2.31 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर समर्थन है।
पिछले सप्ताह वायदा बाजार में सोने की कीमत 3,514 रुपये यानी 2.2 प्रतिशत घटकर 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई, जबकि चांदी 4,786 रुपये यानी करीब दो प्रतिशत गिरकर 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रही। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष एवं शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से दर बढ़ाने की संभावना के संकेत के बाद मुनाफावसूली के कारण सप्ताह के पहले हिस्से में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने में उतार-चढ़ाव रहा। वैश्विक बाजार में कॉमेक्स सोना वायदा सप्ताहांत में करीब 1.2 प्रतिशत गिरकर 4,476.6 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस रहा।
न्यूयॉर्क में चांदी 1.52 प्रतिशत घटकर 66.75 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस रही। मेर ने कहा कि अमेरिका के उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़ों के बाद इस महीने फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की संभावना मजबूत होने से शुक्रवार को सोने की कीमतों पर दबाव रहा। ब्रोकरेज मंच लेमन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि भू-राजनीतिक चिंताएं अब पारंपरिक सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ाने के बजाय ब्याज दरों के लिए जोखिम के रूप में उभर रही हैं।
हालांकि, फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर की नरम रुख वाली टिप्पणियों और ईरान से जुड़ा तनाव सीमित रहने के संकेतों से दर बढ़ोतरी की उम्मीद कम हुई, जिससे अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट आई। गर्ग ने कहा कि चांदी में दोनों दिशाओं में अधिक उतार-चढ़ाव रहा, क्योंकि इसकी औद्योगिक मांग भी ब्याज दरों के रुख से प्रभावित होती है। इस बीच, दुनिया के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाना जारी रखे हुए हैं।
विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़ों के अनुसार, चीन के केंद्रीय बैंक ने 20 टन सोना खरीदा है। यह लगातार 21वां महीना है जब उसने सोने की खरीद की है। इससे 2026 में अब तक उसकी खरीद 60 टन और कुल स्वर्ण भंडार 2,366 टन हो गया है।
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