पालघर के रिलीफ हॉस्पिटल में हंगामा, बिल को लेकर शिवसेना पदाधिकारियों ने डॉक्टरों और स्टाफ से की मारपीट, 17 पर केस
मुंबई, 6 सितंबर (आईएएनएस)। अस्पताल में बदसलूकी का एक और मामला सामने आया है, जिसमें महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक हेल्थकेयर सेंटर पर शिवसेना के पदाधिकारियों ने कथित तौर पर डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के साथ मारपीट की।
पालघर पुलिस ने एकनाथ शिंदे गुट के सदस्यों समेत कम से कम 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि उनमें से एक ने रिसेप्शनिस्ट को थप्पड़ मारा और बीच-बचाव करने की कोशिश करने पर एक महिला कर्मचारी को धमकाया।
यह घटना रविवार सुबह रिलीफ हॉस्पिटल के कॉरिडोर में हुई। गोविंदा (दही-हंडी उत्सव के दौरान लटकी हुई मटकी फोड़ने के लिए इंसानी पिरामिड बनाने वाले प्रतिभागी) को डिस्चार्ज करने को लेकर वहां हंगामा हुआ था।
अधिकारियों के मुताबिक, दही-हंडी कार्यक्रम के दौरान घायल हुए गोविंदाओं के इलाज के खर्च को लेकर विवाद हुआ था।
बताया जा रहा है कि डिस्चार्ज के समय 19,866 रुपए का बिल थमाए जाने पर गोविंदा दल के सदस्य नाराज हो गए।
इसके बाद तीखी बहस हुई और शिवसेना के सदस्यों ने कथित तौर पर वहां मौजूद अस्पताल के कर्मचारियों के साथ बदसलूकी की, उन्हें धमकाया और मारपीट की।
अस्पताल के एक कर्मचारी की शिकायत के अनुसार, शिवसेना के जिला प्रमुख कुंदन सांखे, शहर प्रमुख राहुल घरत और अन्य लोग अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में घुस गए और डॉक्टरों से बहस करने लगे। सीसीटीवी फुटेज में एक रिसेप्शनिस्ट को थप्पड़ मारे जाते हुए देखा गया, जिसने बीच-बचाव करने की कोशिश की थी।
पार्टी के कुछ सदस्य अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भी घुस गए।
अस्पताल के कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि भीड़ ने आईसीयू में एक नर्स को धमकाया, घायल गोविंदा की चार ड्रिप हटा दी और उसे अपने साथ ले गए।
पालघर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और मेडिकल सर्विसेज प्रोटेक्शन एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
इस मामले में कम से कम 17 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें शिवसेना नेता सांखे, घरत और स्थानीय विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित शामिल हैं।
आगे की जांच चल रही है, और पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ अन्य सबूतों की भी जांच कर रही है।
जुलाई में सामने आए एक ऐसे ही मामले में, कल्याण के एक सिविक अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का आरोप शिवसेना के एक कॉर्पोरेटर पर लगा था।
आरोपी रमेश म्हात्रे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
बाद में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में उन्हें मिली जमानत रद्द कर दी और उन्हें पुलिस के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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गुजरात के देवमोगरा में मोगी माताजी मंदिर के विकास को मिली नई रफ्तार, फेज-2 के लिए 13.02 करोड़ रुपये मंजूर
गुजरात के नर्मदा जिले के देवमोगरा स्थित प्रसिद्ध श्री याहा मोगी माताजी मंदिर के विकास कार्यों को और गति देने के लिए राज्य सरकार ने फेज-2 के विकास कार्यों को मंजूरी दी है. इसके तहत मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 13.02 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. यह मंदिर क्षेत्र की आदिवासी समुदाय के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है.
फेज-2 के विकास कार्य को मिली मंजूरी
मंदिर का विकास गुजरात पर्यटन निगम की ओर से चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के निर्देशों के तहत पहले चरण में करीब 11.33 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं. इनमें धर्मशाला, सेंट्रल विस्टा, शौचालय ब्लॉक, पत्थर का प्रवेश द्वार, पार्किंग, रास्ते और 295 दुकानों का निर्माण शामिल है. इन सुविधाओं से देवमोगरा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है. अब दूसरे चरण के तहत दो नए शौचालय ब्लॉक बनाए जाएंगे. इसके अलावा ट्रस्ट की जमीन पर एक नई धर्मशाला का निर्माण किया जाएगा. मंदिर के गर्भगृह के जीर्णोद्धार का काम भी फेज-2 में शामिल किया गया है. इन कार्यों का उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए आवास, स्वच्छता और मंदिर से जुड़ी सुविधाओं को और बेहतर बनाना है.
गुजरात के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों को मिलेगी पहचान
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 13.02 करोड़ रुपये की इस फेज-2 परियोजना को मंजूरी दी है. सरकार का मानना है कि मंदिर में सुविधाओं के विस्तार से यहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है. देवमोगरा गांव नर्मदा जिले की सागबारा तहसील में स्थित है. जिला प्रशासन के अनुसार, यह सागबारा मुख्यालय से करीब 21 किलोमीटर और जिला मुख्यालय राजपीपला से लगभग 82 किलोमीटर दूर है. फेज-2 के विकास कार्य पूरे होने के बाद मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलने के साथ ही देवमोगरा को गुजरात के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में और मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है.
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