'महात्मा गांधी' बने मनोज बाजपेयी, 10 किलो वजन घटाकर किया जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन, फिल्म के फर्स्ट लुक ने मचाई हलचल
Manoj Bajpayee Mahatma Gandhi Look: बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) अक्सर फिल्मों में अपने किरदार और एक्टिंग से फैंस का दिल जीतते नजर आते हैं. एक्टर एक बार फिर अपने ट्रांसफॉर्मेशन से फैंस को हैरान करने के लिए तैयार हैं. दरअसल, वह अब बड़े पर्दे पर महात्मा गांधी का किरदार निभाते नजर आएंगे. सुधीर मिश्रा की अपकमिंग हिस्टोरिकल ड्रामा फिल्म से उनका फर्स्ट लुक रिवील हुआ है. जिसमें उन्हें पहचान पाना भी मुश्किल हो रहा है. वह फिल्म के फर्स्ट लुक में सफेद धोती, चश्मा और हाथ में लाठी लिए नजर आए. उनका ये लुक बिल्कुल महात्मा गांधी की तरह लग रहा है.
मनोज बाजपेयी ने ट्रांसफॉर्मेशन से किया फैंस को हैरान
मनोज बाजपेयी को पर्दे पर अब तक कई तरह के किरदारों को निभाते हुए देखा गया है, लेकिन इस बार वह महात्मा गांधी के रोल में नजर आने वाले हैं, जो उनके लिए अलग चुनौती लेकर आया है. फिल्म की पहली झलक में उनका लुक इतना बदला हुआ दिखाई दे रहा है कि पहली नजर में उन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा है. इससे समझा जा सकता है कि उनका ये ट्रांसफॉर्मेशन कितना जबरदस्त है. सफेद धोती, चश्मा, हाथ में लाठी और बदला हुआ हुलिए की वजह से वह बिल्कुल महात्मा गांधी की तरह दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अपने इस ट्रासफॉर्मेशन से फैंस को हैरान कर दिया है.
सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चा
मनोज बाजपेयी ने इस किरदार के लिए सिर्फ बाहरी गेटअप पर फोकस नहीं किया बल्कि गांधी जी के चलने, बैठने और हाव-भाव को भी अपने किरदार में ढ़ाला है. फर्स्ट लुक सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके ट्रांसफॉर्मेशन की चर्चा शुरू हो गई है. फैंस के बीच सबसे ज्यादा एक्साइटमेंट इस बात को लेकर है कि वो अपनी एक्टिंग के जरिए गांधी जी की पर्सनैलिटी को किस तरह पर्दे पर पेश करेंगे और उन्हें बड़े पर्दे देखना का एक्सपीरियंस कैसा होगा.
महात्मा गांधी के लुक के लिए घटाया 10 किलो वजन
फिल्मों में किसी भी ऐतिहासिक पर्सनैलिटी का किरदार निभाना सिर्फ गेटअप पहन लेने से तैयार नहीं होता है. उसके लिए एक्टर को किरदार की पर्सनैलिटी से लेकर शरीर के हाव-भाव, बोलने के तरीके औरस्क्रीन प्रेजेंस को भी समझना पड़ता है. मनोज ने इस किरदार के लिए बहुत मेहनत की है, जो फिल्म के फर्स्ट लुक को देखकर ही समझा जा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने गांधी जी के रोल के लिए करीब 10 किलो वजन कम किया है. मनोज अपने किरदारों की गहराई से तैयारी करने के लिए जाने जाते हैं और इस बार भी उनके लुक में मेहनत साफ नजर आ रही है. यही वजह है कि फर्स्ट लुक सामने आते ही इसकी चर्चा शुरू हो गई.
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भारत की आजादी पर बन रही है फिल्म
सुधीर मिश्रा की यह फिल्म भारत की आजादी के दौर से जुड़ी है. इसमें उस ऐतिहासिक दौर को दिखाया जाएगा, जब देश एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा था. फिल्म में महात्मा गांधी के फैसलों और उस टाइम के उनके प्रभाव को दिखाया जाएगा. इसके अलावा इसकी चर्चा इसलिए भी है क्योंकि अनुभव सिन्हा और सुधीर मिश्रा की जोड़ी इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई है. एक तरफ जहां सुधीर मिश्रा निर्देशन का काम संभाल रहे हैं तो अनुभव सिन्हा इसके प्रोड्यूसर हैं. अनुभव सिन्हा इससे पहले 'मुल्क', 'आर्टिकल 15' और 'थप्पड़' जैसी शानदार फिल्मों बना चुके हैं. वहीं, सुधीर मिश्रा 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी' और 'धारावी' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं. इसी के साथ आपको बता दें कि फिल्म से जुड़ी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन कई रिपोर्ट्स में फिल्म का नाम 'गांधी एंड माय मदर' बताया जा रहा है, लेकिन अभी ये ऑफिशियली कंफर्म नहीं है. ऐसे में ज्यादा जानकारी के लिए इंतजार करना पड़ सकता है.
2030 तक हर साल 50 लॉन्च की तैयारी, 450 से अधिक स्टार्टअप्स के दम पर वैश्विक स्पेस पावर बनने की ओर बढ़ रहा भारत: पवन गोयनका
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। भारत आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएन-स्पेस) के चेयरमैन पवन के गोयनका ने रविवार को कहा कि भारत ने वर्ष 2030 तक हर साल 50 अंतरिक्ष प्रक्षेपण (लॉन्च) करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और इसरो की तकनीकी क्षमता के संयोजन से भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत कर रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने विचारों में पवन गोयनका ने कहा कि पांच वर्ष पहले भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इस फैसले के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य थे। पहला, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को नई और उन्नत तकनीकों पर काम करने का अवसर देना और दूसरा, निजी उद्योगों को अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विस्तार करने का मौका प्रदान करना। उन्होंने कहा कि आज दोनों लक्ष्य धरातल पर साकार होते दिखाई दे रहे हैं।
पवन गोयनका ने अपने पोस्ट में कहा कि पांच वर्ष पहले भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स की संख्या बेहद सीमित थी, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 450 से अधिक हो चुकी है। निजी कंपनियां अब केवल प्रोटोटाइप तैयार करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरिक्ष प्रक्षेपण और उपग्रह निर्माण जैसे जटिल क्षेत्रों में भी सफलता हासिल कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि एक भारतीय निजी कंपनी पहले ही सफलतापूर्वक रॉकेट को कक्षा में भेज चुकी है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग अब प्रयोगात्मक चरण से आगे बढ़कर व्यावसायिक स्तर पर काम करने की क्षमता विकसित कर चुका है।
गोयनका ने कहा कि अब सबसे बड़ी चुनौती इस क्षेत्र का बड़े पैमाने पर विस्तार करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारत ने हर वर्ष 50 लॉन्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार और निजी उद्योगों को मिलकर काम करना होगा। केवल तकनीकी विकास पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर निर्माण क्षमता विकसित करना, अधिक रॉकेट तैयार करना, अधिक उपग्रह बनाना और नई तकनीकों का विकास भी आवश्यक होगा।
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी शुरू होने के बाद भारत का स्पेस इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में जहां अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ा केवल एक स्टार्टअप था, वहीं अगस्त 2026 तक ऐसी कंपनियों की संख्या लगभग 440 से अधिक हो चुकी है।
वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 9 अरब डॉलर आंका जाता है। अनुमान है कि अगले एक दशक में यह बढ़कर 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं, निजी निवेश भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में जहां इस क्षेत्र में 100.5 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ था, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
पवन गोयनका ने कहा कि अब निजी उद्योगों को अलग-अलग परियोजनाओं से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर विनिर्माण क्षमता विकसित करनी होगी। अधिक रॉकेट, अधिक उपग्रह, अधिक प्रक्षेपण क्षमता और नई अंतरिक्ष तकनीकों का विकास भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि इसरो की भूमिका भविष्य में भी नई तकनीकी सीमाओं को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहेगी, जबकि निजी कंपनियां उन तकनीकों को व्यावसायिक उत्पादों और सेवाओं में बदलने का काम करेंगी।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में कई कंपनियां तेजी से उभर रही हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सल और दिगांतारा जैसी कंपनियां लॉन्च व्हीकल, उपग्रह निर्माण, पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष तकनीक-आधारित सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
पवन गोयनका की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब इसरो ने हाल ही में जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के जरिए ईओएस-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया है। यह भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे भू-समकालिक कक्षा से संचालन के लिए डिजाइन किया गया है।
यह उपग्रह आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्यावरण निगरानी और रणनीतिक पर्यवेक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके अलावा करीब 2,367 किलोग्राम वजनी ईओएस-05 जीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित अब तक का सबसे भारी उपग्रह भी बन गया है, जो भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।
पवन गोयनका ने कहा कि भारत के सामने अब एक बड़ा अवसर मौजूद है। उन्होंने कहा, भारत में निर्माण करो, भारत से लॉन्च करो और भारत से पूरी दुनिया को सेवाएं प्रदान करो।
उनका मानना है कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और तकनीकी नेतृत्व को भी नई दिशा देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत वास्तविक और प्रतीकात्मक दोनों अर्थों में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को एक नई कक्षा में पहुंचाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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