Mouth Ulcers Remedies: मुंह के छालों का पेट से है गहरा कनेक्शन? इन आसान घरेलू उपायों से मिलेगी जल्द राहत
Mouth Ulcers Remedies: मुंह में बार-बार होने वाले छाले भले ही छोटी समस्या लगें, लेकिन इनकी वजह से खाना-पीना और यहां तक कि बोलना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार मसालेदार खाना, मुंह में चोट या पोषण की कमी इसके पीछे कारण हो सकती है। वहीं, पाचन से जुड़ी गड़बड़ियां भी कुछ लोगों में मुंह के छालों के साथ जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए अगर छाले बार-बार परेशान कर रहे हैं, तो केवल उन्हें दबाने के बजाय इसकी संभावित वजह पर भी ध्यान देना जरूरी है।
खास बात यह है कि हर मुंह का छाला पेट खराब होने की वजह से नहीं होता। तनाव, नींद की कमी, आयरन या विटामिन B12 जैसी पोषक तत्वों की कमी, हार्मोनल बदलाव और कुछ दवाओं के कारण भी छाले हो सकते हैं। सामान्य और छोटे छाले अक्सर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। इस दौरान कुछ आसान उपाय दर्द और जलन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
क्या पेट की गड़बड़ी से हो सकते हैं मुंह में छाले?
पाचन तंत्र और मुंह की सेहत के बीच संबंध माना जाता है। एसिडिटी, कब्ज या अपच जैसी समस्याएं सीधे तौर पर हर व्यक्ति में छाले पैदा करती हैं, ऐसा कहना सही नहीं होगा। हालांकि, कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्थितियों में मुंह के छाले एक लक्षण के रूप में दिखाई दे सकते हैं। बार-बार छाले होने पर पोषण की कमी या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की जांच की जरूरत पड़ सकती है।
नमक के पानी से करें कुल्ला
मुंह के छालों में नमक मिले गुनगुने पानी से कुल्ला करना एक आसान घरेलू उपाय है। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा में नमक मिलाएं और कुछ सेकंड तक मुंह में घुमाकर थूक दें। इसे दिन में कुछ बार किया जा सकता है। इससे मुंह की सफाई बनाए रखने और जलन में कुछ राहत पाने में मदद मिल सकती है।
मसालेदार और बहुत गर्म भोजन से दूरी
छाले होने पर बहुत तीखा, खट्टा, नमकीन या बेहद गर्म खाना जलन बढ़ा सकता है। ऐसे समय में नरम और सामान्य तापमान वाला भोजन लेना बेहतर रहता है। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। अगर किसी खास खाद्य पदार्थ को खाने के बाद बार-बार छाले होते हैं, तो कुछ समय उसके सेवन से बचकर देखें।
खान-पान पर दें खास ध्यान
अगर छाले बार-बार होते हैं, तो भोजन में आयरन, फोलेट और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों के पर्याप्त स्रोत शामिल करना जरूरी है। हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, अंडे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। सप्लीमेंट खुद से शुरू करने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी?
अगर मुंह के छाले दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बने रहें, बहुत बड़े या बेहद दर्दनाक हों, बार-बार लौटते हों या उनके साथ बुखार, निगलने में परेशानी, वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। लगातार छालों के पीछे किसी पोषण संबंधी कमी या अन्य बीमारी की वजह हो सकती है, जिसकी जांच जरूरी है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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भारत में गिग और ऑनलाइन मंचों (प्लेटफॉर्म) के लिए काम करने वाले श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान को लागू करने की तैयारी के बीच नियमों से जुड़ा एक तकनीकी विकल्प मंच अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यह विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि एग्रीगेटर कंपनियों से अंशदान उनके वार्षिक कारोबार के आधार पर लिया जाए या कामगारों को किए जाने वाले भुगतान के प्रतिशत के आधार पर।
विश्लेषकों और उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कंपनियों के वार्षिक कारोबार के बजाय प्रति लेनदेन या कामगारों के भुगतान से जुड़ा अंशदान मंच से जुड़ी अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक असमान वित्तीय बोझ डाल सकता है। इसका सबसे बुरा असर उन कारोबार क्षेत्रों पर पड़ेगा जो बहुत अधिक लेनदेन संख्या लेकिन कम मूल्य पर आधारित हैं।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत एग्रीगेटर कंपनियों के लिए गिग (अस्थायी) और ऑनलाइन मंच के लिए काम करने वाले कामगारों के वास्ते स्थापित सामाजिक सुरक्षा कोष में अंशदान देना अनिवार्य है। नियमों के अनुसार, किसी एक एग्रीगेटर के साथ वित्त वर्ष में 90 दिन या कई एग्रीगेटर कंपनियों के साथ कुल 120 दिन काम करने के बाद गिग कामगार इस योजना के तहत लाभ पाने का पात्र हो जाता है।
एग्रीगेटर कंपनियों को अपने वार्षिक अंशदान का आकलन कर उसे हर साल जमा करना होता है। श्रम और रोजगार मंत्रालय प्रति लेनदेन या भुगतान पर आधारित अंशदान व्यवस्था को मानक बनाने पर विचार कर रहा है। इस पद्धति का चयन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लेनदेन की संख्या, सेवाओं के मूल्य, व्यावसायिक मॉडल और कुल कारोबार के आधार पर विभिन्न मंच कंपनियों पर इसका असर बहुत अलग-अलग पड़ेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों व्यवस्थाओं की तुलना से स्पष्ट होता है कि भुगतान आधारित व्यवस्था राइड-हेलिंग (कैब, ऑटो व बाइक सेवा) जैसे अत्यधिक आवागमन वाले व्यवसायों पर काफी भारी बोझ डाल सकती है।
संहिता की धारा 114(4) के तहत एग्रीगेटर को अपने वार्षिक कारोबार का एक से दो प्रतिशत अंशदान देना होगा, लेकिन यह राशि गिग और मंच कामगारों को किए जाने वाले कुल भुगतान के पांच प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। दूसरी तरफ, मंत्रालय विकल्प के रूप में सीधे कामगारों के भुगतान पर आधारित फॉर्मूले (भुगतान का पांच प्रतिशत तक) पर भी विचार कर रहा है।
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