अगले हफ्ते शेयर बाजार में आएंगे 11 कंपनियों के IPO:₹7,055 करोड़ जुटाने की तैयारी; रेंटोमोजो, करमतारा प्रमुख, देखें पूरी लिस्ट
7 सितंबर से 15 सितंबर के बीच 11 मेन-बोर्ड कंपनियां अपने आईपीओ लेकर आ रही हैं। इन इश्यू के जरिए बाजार से कुल 7,055 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी है। इनमें फर्नीचर रेंटल स्टार्टअप रेंटोमोजो, करमतारा इंजीनियरिंग और कनोहर इलेक्ट्रिकल्स जैसे नाम शामिल हैं। 1. जुटाए जाने वाले फंड में 61% हिस्सा OFS का, 39% फ्रेश इश्यू बाजार से जुटाए जाने वाले कुल 7,055 करोड़ रुपए में से दो तरह के शेयर जारी किए जाएंगे: 7 सितंबर को प्रणव कंस्ट्रक्शंस से होगी हफ्ते की शुरुआत हफ्ते का पहला आईपीओ रियल एस्टेट कंपनी प्रणव कंस्ट्रक्शंस का होगा: 8 सितंबर को 3 कंपनियों के IPO आएंगे मंगलवार को तीन अलग-अलग सेक्टर्स की कंपनियां अपने इश्यू लेकर आ रही हैं: 9 सितंबर को 6 कंपनियों के आईपीओ खुलेंगे और 11 को बंद होंगे 10 सितंबर को वीगालैंड डेवलपर्स का इश्यू खुलेगा हफ्ते का आखिरी आईपीओ 10 सितंबर को खुलेगा और 15 सितंबर को बंद होगा: इस साल लिस्ट होने वाली कंपनियों की संख्या 75 पहुंचेगी अगले हफ्ते आने वाले इन 11 इश्यू के साथ साल में अब तक आईपीओ लाने वाली मेन-बोर्ड कंपनियों की संख्या 75 तक पहुंच जाएगी। 1 सितंबर को 'रेज ऑफ बिलीफ' और 'दीपा ज्वेलर्स' के आईपीओ पहले ही आ चुके हैं। अगस्त में 23 कंपनियां अपने आईपीओ लेकर आई थीं। नॉलेज बॉक्स - फ्रेश इश्यू और OFS में क्या फर्क होता है? इन्वेस्टर गाइड - IPO में दांव लगाने से पहले 3 बातें जरूर जांचें
कर्मचारियों का सवाल- क्या ISRO रॉकेट नहीं बनाएगा?:9 संगठनों ने प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा; कांग्रेसी बोली- साराभाई की विरासत खत्म की जा रही
ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने स्पेस एजेंसी के चेयरपर्सन वी. नारायणन को पत्र लिखकर प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह लेटर 4 सितंबर को लिखा गया। जानकारी आज सामने आई है। कर्मचारियों ने लेटर में ISRO की मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल काम निजी कंपनियों को सौंपने की प्रस्तावित योजना पर आधिकारिक जवाब मांगा है। उधर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर लिखा कि स्पेस एजेंसी के अंदर से आवाजें उठने लगी हैं। जब साराभाई और धवन की विरासत को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है तो बाकी लोगों को भी चुप नहीं रहना चाहिए। ISRO के अंदर से सवाल उठने की क्या है वजह… ISRO की भूमिका को लेकर यह सवाल 21 अगस्त को IN-SPACe चेयरपर्सन पवन गोयनका की टिप्पणी के बाद उठा है। एक कार्यक्रम में गोयनका ने कथित तौर पर कहा था कि आखिरकार ISRO कोई लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा और न ही किसी लॉन्च व्हीकल का निर्माण करेगा। यह सब निजी क्षेत्र या PSU करेगा। IN-SPACe निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, मंजूरी देने और उनकी निगरानी का काम करता है। कर्मचारी संगठन बोला- ISRO को सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट तक सीमित न किया जाए कर्मचारी संगठनों ने कहा कि तय व्यावसायिक कामों में निजी कंपनियों की भागीदारी हो सकती है, लेकिन ISRO मजबूत और सरकारी स्वामित्व वाला संगठन बना रहना चाहिए। लेकिन बिना चर्चा के ऐसी नीति स्वीकार नहीं की जा सकती, जिसमें ISRO को केवल सीमित रिसर्च एंड डेवलपमेंट (RD) संस्था तक सीमित कर दिया जाए। और देश के लॉन्च व्हीकल बनाने तथा लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर चलाने का काम सार्वजनिक क्षेत्र से बाहर चला जाए। कांग्रेस बोली- मोदी सरकार जानबूझकर ISRO की भूमिका सीमित कर रही कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर लिखा- स्पेस इकोनॉमी में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के नाम पर मोदी सरकार जानबूझकर ISRO की भूमिका सीमित कर रही है। इससे भी बदतर यह है कि ISRO ने दशकों की मेहनत से जो क्षमताएं विकसित की हैं, उन्हें ऐसी निजी कंपनियों को हस्तांतरित किया जा रहा है, जिनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता संदिग्ध है। ----------------------
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others





