कमर और पीठ के दर्द से हैं परेशान? वक्रासन से मिलेगा आराम, जानें करने का सही तरीका
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करने, गलत पोस्चर में रहने और शारीरिक गतिविधि कम होने की वजह से कमर और पीठ से जुड़ी परेशानियां आम हो गई हैं। ऐसे में योग के कुछ आसान आसन शरीर को एक्टिव रखने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है वक्रासन।
MP में हिंदी मीडियम से होगी BTech Civil Engineering की पढ़ाई, छात्रों को मिलेंगे 2 लाख रुपये; 30 सीटों का बैच शुरू
इंदौर। मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई को हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए आसान बनाने की दिशा में नई पहल हुई है। इंदौर स्थित SGSITS ने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक का हिंदी माध्यम बैच शुरू किया है। संस्थान की ओर से इसे इसी शैक्षणिक सत्र से लागू किया गया है।
इस विशेष बैच में कुल 30 सीटें रखी गई हैं और अब तक करीब 20 छात्रों का एडमिशन हो चुका है। इस कोर्स की खास बात यह है कि हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग के तकनीकी विषय अपनी भाषा में समझने और परीक्षा हिंदी में देने का अवसर मिलेगा।
हिंदी माध्यम के छात्रों को क्यों हुई जरूरत?
संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख सुनील अजमेरा के मुताबिक, हिंदी माध्यम से स्कूली शिक्षा हासिल करने वाले कई विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग कॉलेज में आने के बाद अंग्रेजी की तकनीकी भाषा समझने में परेशानी होती है।
इंजीनियरिंग के विषयों में बड़ी संख्या में तकनीकी शब्द अंग्रेजी में होने के कारण कई छात्रों को शुरुआती दौर में कॉन्सेप्ट समझने में दिक्कत आती है। भाषा की यह परेशानी कभी-कभी उनकी पढ़ाई पर भी असर डालती है और कुछ विद्यार्थी बीच में कोर्स छोड़ने का फैसला तक कर लेते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू करने का फैसला किया है।
हिंदी में पढ़ाई और हिंदी में परीक्षा
नए बैच में विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग के विषय हिंदी में समझाए जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें परीक्षा हिंदी में लिखने की सुविधा भी मिलेगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषा की बाधा से बाहर निकालकर विषय की समझ पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर देना है।
यानी जिन छात्रों ने 10वीं और 12वीं तक हिंदी माध्यम में पढ़ाई की है, उनके लिए इंजीनियरिंग के कठिन तकनीकी कॉन्सेप्ट अपनी परिचित भाषा में समझना आसान हो सकेगा।
चार साल से चल रही थी तैयारी
SGSITS ने हिंदी माध्यम में यह कोर्स अचानक शुरू नहीं किया है। संस्थान के फैकल्टी सदस्य करीब चार वर्षों से अंग्रेजी के तकनीकी अध्ययन सामग्री को हिंदी में तैयार करने पर काम कर रहे थे।
इसके अलावा शिक्षकों को तकनीकी विषय हिंदी में पढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। इस तैयारी के बाद संस्थान ने हिंदी माध्यम से सिविल इंजीनियरिंग का विशेष बैच शुरू किया है।
छात्रों को मिल सकती है 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि
इस कोर्स का एक और आकर्षण मध्य प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाली 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि है। दी गई जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत पात्र छात्रों को फाइनल ईयर में 2 लाख रुपये की राशि मिल सकती है।
हालांकि, इस राशि के लिए पात्रता और अन्य शर्तें लागू होंगी। इसलिए विद्यार्थियों को संबंधित सरकारी योजना और संस्थान की ओर से जारी नियमों की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
अंग्रेजी से पूरी तरह दूर नहीं होंगे छात्र
हिंदी माध्यम में पढ़ाई शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि विद्यार्थियों को अंग्रेजी से अलग कर दिया जाएगा। संस्थान का फोकस छात्रों की अंग्रेजी भाषा और तकनीकी शब्दावली को भी मजबूत करने पर रहेगा।
अधिकारियों के मुताबिक, उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अंग्रेजी की जानकारी आज भी महत्वपूर्ण है। इसलिए छात्रों को पहले हिंदी में तकनीकी कॉन्सेप्ट समझाए जाएंगे और साथ-साथ जरूरी अंग्रेजी तकनीकी शब्दों से भी परिचित कराया जाएगा।
इससे विद्यार्थियों को एक तरफ अपनी भाषा में इंजीनियरिंग समझने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर वे आगे की पढ़ाई और नौकरी के लिए जरूरी अंग्रेजी तकनीकी शब्दावली भी सीख सकेंगे।
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