रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आ चुका है। इन दिनों सभी के घरों में पर्व को लेकर काफी तैयारियां भी चल रही है। रक्षाबंधन फेस्टिवल हो और मिठाई का जिक्र न हो, ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता है। बाजार से आप काजू कतली, बर्फी, रसगुल्ले, गुलाब जामुन और लड्डू जैसी मिठाईयां आती है, लेकिन इनमें खूब मिलावट देखने को मिलती है। अब घर पर ही टेस्टी मिठाई बना सकते हैं। इस बार रक्षाबंधन पर काजू रोल बनाना काफी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। वैसे यह दिखने में काफी सुंदर लगता है और इसे बनाना भी काफी आसान है। आइए आपको बताते हैं कैसे दो तरीके से काजू रोल बना सकते हैं।
घर पर बनाएं 2 तरीके से काजू रोल
काजू रोल बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए?
काजू रोल की बेसिक लेयर के लिए काजू, चीनी और दूध की जरुरत पड़ती है। इसके अंदर अपनी पसंद की फिलिंग भर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं इसके लिए क्या चीजें चाहिए-
-लेयरिंग यानी रोल के लिए काजू- 250 ग्राम
-चीनी- 1 कप
-दूध- 1 कप
-इलायची पाउडर- थोड़ा सा
-घी- थोड़ा सा
-फिलिंग के लिए पिस्ता- 1 कप
-पिसी चीनी- 2 से 3 बड़े चम्मच
-मिल्क पाउडर- 1 से 2 बड़े चम्मच
-दूध- जरूरत के अनुसार
-मिक्स ड्राई फ्रूट्स- 1-2 कप
पहला तरीका- काजू पिस्ता रोल
- सबसे पहले काजू को मिक्सर में पीस लें। इस बात का ध्यान रखें कि काजू को ज्यादा समय तक पीसे नहीं। वरना उसका तेल निकल जाएगा। फिर पाउडर चिपचिपा हो जाएगा। इसके बाद इसको अच्छे से छान लें।
- अब आप एक पैन में दूध और चीनी डालकर मीडियम फ्लेम पर गर्म कर लें। चीनी जब अच्छे से घुल जाए तो इसके बाद काजू का पाउडर डालें और इसे लगातार चलाते रहे। आपको पता चलेगा कि यह मिश्रण धीरे-धीरे गाढ़ा हो रहा है। जब मिश्रण पैन के किनारे छोड़ने लगे और आटे जैसा एक साथ इक्ट्ठा हो जाए, तो गैस बंद कर दें।
- इसको अब थोड़ा होने दें, पूरा ठंडा न होने दें। जब यह हल्का गर्म रह जाए तो मिश्रण को बटर पेपर पर रखकर थोड़ा-सा गूंध लें। अब घी लगे बेलन की मदद से इसकी पतली शीट बेल लें।
- अब आप पिस्ता फिलिंग तैयार कर लें। पिस्ते को पीसकर इसमें पिसी चीनी और थोड़ा मिल्क पाउडर मिला लें। अब जरुरत के हिसाब से थोड़ा दूध डालकर इसको आटा की तरह बना लें। इसके बाद लंबे रोल जैसा बना लीजिए।
- काजू की शीट पर पिस्ते का रोल रखे और काजू की लेयर इसके चारों तरफ लपेट दें। जब यह रोल बन जाए, तो बटर पेपर में रोल करके 1 घंटे के लिए फ्रिज में रख सकते हैं, ताकि यह सेट हो जाए।
- इसको फ्रिज से निकालकर रोल के डिजाइन में गोल-गोल काट लें। तैयार है आपका काजू पिस्ता रोल तैयार है। फिर ऊपर से कटे हुए पिस्ता से गार्निश कर सकते हैं।
दूसरा तरीका- ड्राई फ्रूट काजू रोल
- सबसे पहले आप मिक्स ड्राई फ्रूट्स को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। इसमें थोड़ी पिसी चीनी और इलायची पाउडर मिला ले। बाइंडिंग के लिए गुलकंद भी मिल सकती है। यह ऑप्शनल है।
- इसके बाद काजू की बेसिक लेयर पहले वाले तरीके से ही तैयार कर लें। जिसके बाद काजू के मिश्रण को बेलकर शीट बना सकते हैं। अब इसके ऊपर तैयार ड्राई फ्रूट्स फिलिंग रख लें।
- अब आप फिलिंग को एक तरफ लंबाई में फैला लें और काजू की शीट को धीरे-धीरे फोल्ड करें और रोल बना लें।
- फिर बटर पेपर लपेटकर सेट करने के लिए फ्रिज में रख दें। सेट होने के बाद इसे कट कर लें और इसमें चांदी वर्क लगा लें। तैयार है आपके ड्राई फ्रूट्स रोल।
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बेहद नजदीक आ चुका है। इस दिन साधक भगवान कृष्ण को श्रृंगार करते, प्रिय भोग बनाते हैं, मंदिर को सुंदर सजाते हैं, व्रत रखते हैं और भगवान की झांकी को सजाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का स्वरुप बेहद ही मनमोहक है। बांसुरी धारण किए, मोर मुकुट सजाए और अपनी लीलाओं से भक्तों का मन हरते भगवान कृष्ण को भक्त कई नामों से पुकारते हैं। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और इसी दिन से भक्त उनका जन्मोत्सव का बेहद धूमधाम से मनाते हैं। इस साल 4 सितंबर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। इस खास दिन पर भक्त घर के मंदिर में लड्डू गोपाल या श्री कृष्ण की प्रतिमा का श्रृंगार करते हैं। आइए आपको बताते हैं किन चीजों का खास महत्व है और किन चीजों के बिना उनके श्रृंगार को अधूरा माना जाता है।
मोर मुकुट
मान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के श्रृंगार में मोर मुकुट का खास महत्व माना जाता है। वैसे इसके पीछे कई धार्मिक कथाएं भी जुड़ी हैं, जो इस बात का भी प्रतीक है कि श्रीकृष्ण सभी जीवों से एक समान भाव से प्यार करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोरपंख को सुंदरता, सकारात्मकता और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। मोर पंख को राधा-रानी और श्री कृष्ण के सच्चे प्रेम के प्रतीक के रुप में भी देख सकते हैं।
बांसुरी
गौरतलब है कि बांसुरी सिर्फ श्रीकृष्ण के श्रृंगार का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि उनके जीवन से बहुत खास तरीके से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं में उनकी बांसुरी को मुरली, वेणु या वंशिका कहा गया है और बांसुरी बजाने की वजह से उन्हें मुरलीधर कहा जाता है। उनकी बांसुरी की मधुर धुन से संबंधित अनेक कथाएं और लोक परंपराओं में मिलती हैं। भक्तों के लिए बांसुरी प्रेम, मधुरता और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
वैजयंती माला
भगवान श्रीकृष्ण के गले में हमेशा वैजयंती माला सुशोभित रहती है और उनके श्रृंगार का मुख्य हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके बिना श्रीकृष्ण का श्रृंगार और उनकी पूजा अधूरा मानी जाती है। वैसे यह माला भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को भी अति प्रिय है।
पीतांबर
यदि आप भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार कर रहे हैं, तो पीतांबर यानी पीले रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। वैसे तो कन्हा जी को किसी भी रंग के कपड़े अर्पित कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर उन्हें पीतांबर, यानी पीले रंग वस्त्र धारण किए देखा जा सकता है। इसलिए उन्हें 'पीतांबरधारी' भी कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में पीले रंग का ज्ञान, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है।
आभूषण
श्रीकृष्ण के बाल गोपाल स्वरुप का श्रृंगार करते समय भक्तजन उन्हें मोर मुकुट और बांसुरी के साथ ही कुंडल, हार, बाजूबंद, कंगन, पायल और कमरबंध जैसे आभूषण भी पहनाते हैं। आप भी इन आभूषण को जरुर पहनाएं।
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