गवर्नर पद के लिए मैदान में 15 साल का किशोर:मकसद जीतना नहीं... जेन जी की आवाज बुलंद करना
जहां 15 साल की उम्र में ज्यादातर किशोर पढ़ाई, दोस्त व सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं, वहीं अमेरिका के वरमोंट का छात्र डीन रॉय अनोखा रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। डीन अभी न वोट दे सकते हैं, न अकेले कार चला सकते हैं, पर नवंबर में होने वाले चुनाव में उनका नाम वरमोंट के गवर्नर पद के आधिकारिक प्रत्याशी के रूप में बैलेट पेपर पर होगा। इतनी कम उम्र में चुनावी मैदान में उतरकर उन्होंने सभी का ध्यान खींच लिया है। डीन रॉय ने डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियों की पारंपरिक राजनीति से अलग हटकर अपनी एक नई पार्टी बनाई है... ‘फ्रीडम एंड यूनिटी पार्टी’। वे मानते हैं कि बुजुर्ग राजनेताओं ने युवा पीढ़ी की बुनियादी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। डीन का कहना है, ‘हमारा मकसद चुनाव जीतना ही नहीं, बल्कि ऐसा असर छोड़ना है कि सत्ता में बैठे शीर्ष नेताओं को युवाओं की आवाज सुनने के लिए मजबूर होना पड़े।’ न्यू हैंपशायर यूनिवर्सिटी के सर्वे में डीन को 3% समर्थन मिलता दिखा है, जो 15 वर्षीय निर्दलीय हाई स्कूल छात्र के लिए चौंकाने वाला आंकड़ा है। डीन पढ़ाई के साथ पैरेंट्स के पिज्जा रेस्त्रां में भी मदद करते हैं। सोशल मीडिया पर वे बेबाक और संतुलित विचारों के कारण तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। किसी एक विचारधारा से बंधने के बजाय वे मुद्दों के आधार पर राय रखते हैं। अरबपतियों की संपत्ति पर सीमा लगाने की बात करने वाले डीन बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सरकारी रोक के भी विरोधी हैं। डीन मानते हैं कि लोकप्रिय गवर्नर फिल स्कॉट को हराना मुश्किल है, पर उनकी उम्मीदवारी युवाओं की राजनीतिक भागीदारी व नई सोच का संकेत है। चुनाव के बाद कॉलेज जाएं या सक्रिय राजनीति में उतरें, इसका फैसला करने के लिए उनके पास अभी पर्याप्त समय है। चुनौती की तरह लिया शिक्षक का मजाक वरमोंट राज्य के संविधान में गवर्नर बनने के लिए न्यूनतम आयु की कोई बाध्यता नहीं है। 8वीं कक्षा में राज्य विधानसभा में इंटर्नशिप के दौरान जब एक शिक्षक ने मजाक में उनसे चुनाव लड़ने को कहा, तो डीन ने इसे चुनौती की तरह लिया। उन्होंने नियमों की पड़ताल की और मां चेसी के साथ पोस्ट ऑफिस के बाहर खड़े होकर लोगों से बात की। चुनाव लड़ने के लिए जरूरी 500 वोटर्स के साइन जुटाए।
मशरूम बेचने के बजाय बनाया पाउडर, ₹100 किलो के मशरूम से ₹700 किलो तक कमाई
Mushroom Farming Business Idea: पश्चिम चंपारण के बगहा की सुमन देवी और उनके पति सत्येंद्र सिंह ने मशरूम की खेती को प्रोसेसिंग से जोड़कर कमाई का नया रास्ता तैयार किया है. करीब चार साल से ओएस्टर मशरूम की फार्मिंग कर रहे इस दंपती ने चौथे साल मशरूम का पाउडर बनाकर बेचने का काम शुरू किया. उनके मुताबिक, जहां साबुत मशरूम करीब 100 रुपये किलो तक बिकता है, वहीं प्रोसेसिंग के बाद तैयार पाउडर की कीमत 700 रुपये किलो तक पहुंच जाती है. वे हर महीने करीब 5 क्विंटल मशरूम की हार्वेस्टिंग करते हैं और इससे पाउडर के साथ साबुत मशरूम बेचकर सालाना लाखों रुपये का कारोबार कर रहे हैं.
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