'पठान हूं...गोली मारनी है मार दो', जब शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड को दिया था मुंह तोड़ जवाब, जानिए पूरा किस्सा
Shah Rukh Khan Underworld Threats: 80 और 90 के दशक में बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का गहरा नाता था. दाऊद इब्राहिम की गैंग के लोग बॉलीवुड स्टार, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को धमकी देकर उनसे पैसे लेते थे और इतना ही नहीं वह फिल्मों में अपने पैसे भी लगाते थे. जब बॉलीवुड से जुड़े लोग उनकी बात मानने से मना कर देते थे तो वे उनकी हत्या करवा देते थे. ऐसे कई सारे किस्से हमारे सामने आए हैं. इसमें गुलशन कुमार से लेकर राकेश रोशन का नाम शामिल हैं. इन्हीं धमकियों की वजह से गुलशन कुमार की हत्या हुई थी. फराह खान ने भी एक इंटरव्यू में बताया कि बॉलीवुड के कई स्टार को अंडरवर्ल्ड की धमकी मिल चुकी है. इसमें शाहरुख खान का नाम भी शामिल है, उन्हें भी अंडरवर्ल्ड की धमकी मिली थी. हाल ही में बॉलीवुड डायरेक्टर संजय गुप्ता ने बताया कि जब शाहरुख खान (Shahrukh Khan) को अंडरवर्ल्ड की धमकी मिली थी तो उन्होंन उन्होंने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से मना कर दिया था. उन्होंने अंडरवर्ल्ड गैंग से कहा था कि वह उनके कहने पर पिक्चर और शो नहीं करेंगे चाहे गोली मार दो. आइए जानते हैं कि उन्होंने इस बारे में क्या बताया.
'पठान हूं..गोली मारनी है मार दो'
'हुसैन जैदी फाइल्स' पॉडकास्ट में बॉलीवुड को अंडरवर्ल्ड की धमकियों के बारे में बात करते हुए संजय गुप्ता ने बताया कि अंडरवर्ल्ड गैंग के लोग 1990 के दशक में फिल्मों के सेट पर आकर बैठ जाते थे, यहां पर आकर वह शूटिंग देखते थे, एक्टर या प्रोड्यूसर से कुछ कहना हो, सब करते थे. लेकिन बॉलीवुड में एक शाहरुख खान ही ऐसे शख्स थे, जिन्होंने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से साफ मना कर दिया था. उन्होंने बताया, 'बॉलीवुड में एक शाहरुख खान ही ऐसे शख्स थे उस समय जब उन्हें अंडरवर्ल्ड की धमकी मिली तो उन्होंने साफ कहा कि मैं पिक्चर तो कभी नहीं करुंगा और शो भी कभी नहीं करुंगा. पठान हूं गोली मारनी है मार दो.आपसे डरता नहीं हूं. मैं आपके साथ काम नहीं करूंगा और ना ही आपके लिए शो करूंगा. उन्होंने असल में उनका सम्मान हासिल किया. उन्हें भी शायद लगा होगा कि कम से कम एक व्यक्ति तो ऐसा है.'
संजय गुप्ता को भी मिली अंडरवर्ल्ड की धमकी
इसके अलावा उन्होंने 1992-93 में अपने साथ हुए अंडरवर्ल्ड के एक किस्से को शेयर किया. जब उनसे पूछा गया कि आपने अंडरवर्ल्ड पर इतने सारी फिल्में बनाई है, क्या कभी आपका अंडरवर्ल्ड से कभी फर्स्ट टाइम सामना हुआ है. इस पर उन्होंने एक पुराना किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा, 'मैं फिल्म आतिश के साथ-साथ एक पिक्चर बना रहा था,जिसका नाम रामशस्त्र था. आतिश में मेरे एक रवि देवान नाम के फाइटर थे जो मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे, आज भी हैं. उस समय रवि उन्हें अक्सर फोन करते थे. उस दौरान मैं 14वें माले पर अपनी मम्मी के साथ खार में रहता था. एक दिन मैं सुबह नहाने गया था. उस समय मेरी मम्मी ने बताया कि किसी नाना के शख्स फोन आया है. उन्होंने बोला कि मैं बाद में बात करता हूं. उसका फिर कॉल आया, उसके बाद उसने बोला कि मैं नाना बोल रहा हूं उन्होंने कहा कि कौन नाम तो वहां से जवाब आया कि मैं छोटा राजन बोल रहा हूं.'
उन्होंने आगे बताया कि वह शुरु में वह समझे कि रवि देवान उनके साथ मजाक कर रहा है क्योंकि उन्हें लगा कि छोटा राजा उन्हें कॉल क्यों करेगा. उन्होंने बताया, 'मैंने उससे बोल दिया कि मैं बड़ा राजन बोल रहा हूं. जिसके बाद छोटा राजन ने उन्हें गालियां देने शुरू कर दी है. बाद यह सारी बात पूरी इंडस्ट्री में फैल गई और उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में किसी का कॉल आया कि तुमने नाना को उल्टा सीधा बोल दिया तुम्हें पता नहीं है वो नाना है. अब तो तेरी लग गई. इस पर घटना से संजय बहुत घबरा गए थे क्योंकि वह अपनी फैमिली के साथ रहे थे.'
संजय दत्त से मांगी मदद
इसके बाद उन्होंने संजय दत्त को कॉल किया, सजंय भी उस समय बेल पर बाहर आए हुए थे. उन्होंने संजय पूरी घटना बताई और कहा, 'मुझे मेरे घर से बाहर निकालो, अभी के अभी क्योंकि वो बोल रहे थे कि छोकरे बाहर टैक्सी में आ गए हैं. इसके बाद संजय दत्त ने अपनी पिता सुनील दत्त की ऑफिशियल एमपी की कार मेरे घर के बाहर पूरे कॉन्वॉय के साथ भेजी, जिसके बाद हम वहां से कार से भागे. हालांकि, हमें यह नहीं पता था कि वह वहां थे या नहीं.' इसके आगे उन्होंने कहा, मैंने संजय के घर पहुंचकर कहा संजू अब मैं क्या करुं? इस पर संजय ने कहा क्या कर सकते हो और मैं भी क्या ही कर सकता हूं, मैं खुद परेशानी में फंसा हुआ हूं. इसके बाद उन्होंने पूरा किस्सा सुनाया कि ये सब आदित्य पंचोली ने एक फिल्म में अपना रोल अच्छा करवाने के लिए ये सब किया था. जिसके बाद ये पूरा मामला जैसे-तैसे खत्म हुआ.
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मलबे के नीचे 11 दिन तक सांसें साधे रहीं दो जिंदगियां, नेपाल के महाप्रलय में दिखा एक और कुदरत का चमत्कार
Nepal Flood Rescue: प्रकृति के कहर और बेबस इंसानों की जंग में कभी-कभी ऐसे पल भी आते हैं जो हर किसी की आंखें नम कर देते हैं. नेपाल में आई भयानक बाढ़ के ग्यारहवें दिन कुछ ऐसा ही अनोखा मंजर देखने को मिला, जब चारों तरफ बिछी तबाही के बीच दो जिंदगियां मौत को चकमा देकर बाहर आ गईं. शनिवार को जब उम्मीदें पूरी तरह दम तोड़ रही थीं, तब बचाव टीमों के कड़े संघर्ष ने साबित कर दिया कि हौसले के आगे सबसे बड़ी मुश्किल भी घुटने टेक देती है. इस त्रासदी में अब तक बड़ी संख्या में लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इन दो जिंदगियों के मिलने से राहत कर्मियों का जोश फिर से दोगुना हो गया है.
सुरंग में घुटती सांसों के बीच ऐसे मिला नया जीवन
बचाव कार्य के दौरान पहला बड़ा चमत्कार अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना के पास हुआ. यहां के ऑडिट चार नंबर सुरंग में पानी और भारी गाद घुसने के बाद माना जा रहा था कि अंदर किसी का बचना मुमकिन नहीं होगा. इसके बावजूद नेपाल सेना और दक्षिण कोरिया से आई आपदा प्रबंधन की टीम ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा. राहत कर्मियों ने जान जोखिम में डालकर उस अंधेरी और दलदल से भरी सुरंग में कदम रखा. कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने वहां फंसे एक चीनी नागरिक को जिंदा ढूंढ निकाला. उसे सुरक्षित बाहर निकालना किसी बेहद जटिल मिशन से कम नहीं था, क्योंकि वहां कभी भी और मलबा गिर सकता था.
चार मंजिला ढहे मकान से बुजुर्ग महिला की सुरक्षित वापसी
दूसरी जांबाजी की कहानी नुवाकोट के विदुर इलाके से सामने आई, जहां बेत्रावती में आई बाढ़ ने चार मंजिला पक्के मकान को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया था. इस विशाल मलबे के नीचे चौंसठ साल की चंडिका श्रेष्ठ फंसी हुई थीं. ग्यारह दिनों तक बिना भोजन और पानी के उस घुटन भरे मलबे में दबे रहना किसी खौफनाक सपने जैसा था. सब इंस्पेक्टर सुमन कुमार के नेतृत्व में नौ सदस्यीय जांबाज टीम ने पत्थरों और कंक्रीट को बेहद सावधानी से काटना शुरू किया ताकि महिला को चोट न पहुंचे. जब कई घंटों के प्रयास के बाद महिला को बाहर निकाला गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं और बचाव दल की मेहनत रंग लाई.
नेपाल में 11 दिनों बाद भी मलवे के अंदर महिला को ज़िंदा देखकर सनसनी फ़ैल गई… आज आर्मी की टीम के द्वारा एक सफल रैस्क्यू कर दिया गया…
— Indu (@induXwin) September 5, 2026
उनके घर के लोगों की खोजबीन जारी है… फ़िलहाल महिला को एक अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया गया है… आख़िर इतने दिनों की हिम्मत और कीचड़ जैसे मलवे… pic.twitter.com/MFhU7YRyzh
पनबिजली संयंत्रों पर सबसे ज्यादा मार और लापता लोगों का दर्द
नेपाल की नदियों पर बने बांध और ऊर्जा संयंत्र इस प्रलय की सीधी चपेट में आए हैं. बाढ़ के पानी ने ग्यारह प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बिजली संयंत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों और मजदूरों समेत नौ सौ से अधिक लोग अब भी लापता हैं. नदी के किनारे बसे कई कार्यालय और मशीनरी कक्ष पूरी तरह से गाद में दबे पड़े हैं. लगातार खराब होते मौसम और पहाड़ों से गिरते पत्थरों के बावजूद राहत कर्मी इन लापता लोगों की तलाश में दिन रात जुटे हुए हैं.
त्रासदी का बढ़ता दायरा और दिल दहला देने वाले हालात
नेपाल में अचानक आई इस जल प्रलय ने जानमाल का ऐसा नुकसान किया है जिसकी भरपाई शायद कभी न हो सके. देश के अलग अलग इलाकों से और शव मिलने के बाद मरने वालों का आंकड़ा एक हजार तीन सौ से भी ऊपर पहुंच चुका है. हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें सैकड़ों विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. सेना और पुलिस ने अब तक तेरह हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. अस्पतालों और राहत शिविरों में हालात बेहद भावुक हैं, जहां कई शवों की शिनाख्त करना भी मुश्किल हो रहा है क्योंकि पानी के बहाव और भारी पत्थरों के दबाव ने इंसानी शरीरों को बुरी तरह क्षत विक्षत कर दिया है.
पहाड़ों पर कुदरती हलचल ने मचाई भारी तबाही
यह समूची तबाही नेपाल और तिब्बत सीमा के पास हुए एक बड़े हिमस्खलन के बाद शुरू हुई थी. विशाल ग्लेशियर के टूटने से भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बेकाबू हो गया और इसने रास्ते में आने वाली हर चीज को लील लिया. कंक्रीट के बड़े पुल, पक्की सड़कें और सैकड़ों वाहन तिनके की तरह बह गए. सीमा के उस पार तिब्बत में भी भारी नुकसान हुआ है और वहां भी कई लोग लापता हैं. नेपाल में सबसे बुरा असर चितवन में देखा गया, जहां से सबसे ज्यादा शव निकाले गए हैं. इसके अलावा रसुवा, धादिंग और गोरखा जैसे पहाड़ी जिलों में नदियां अब भी शांत होने का नाम नहीं ले रही हैं. राहत दल हर उस कोने तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जहां जिंदगी की हल्की सी भी उम्मीद बाकी है.
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