कौन हैं निकिता पोरवाल? मिस वर्ल्ड 2026 के ग्रैंड फिनाले में कर रही भारत का प्रतिनिधित्व
वियतनाम में आज होने वाले मिस वर्ल्ड 2026 के ग्रैंड फिनाले में भारत की ओर से मध्य प्रदेश के उज्जैन की निकिता पोरवाल हिस्सा ले रही हैं। दरअसल फेमिना मिस इंडिया 2024 का खिताब जीतने के बाद निकिता अब विश्व मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। फिनाले के लिए उनके माता-पिता और भाई वियतनाम पहुंच चुके हैं जबकि उज्जैन में परिवार के अन्य सदस्य टीवी पर लाइव प्रसारण देखने की तैयारी कर रहे हैं।
निकिता के दादा धन्नालाल पोरवाल ने बताया कि वियतनाम पहुंचने के बाद से वह लगातार वीडियो कॉल के जरिए परिवार के संपर्क में हैं। वह प्रतियोगिता की तैयारियों और वहां की गतिविधियों की जानकारी परिवार के साथ साझा करती रही हैं। परिवार को उनकी सफलता की पूरी उम्मीद है।
उज्जैन से वियतनाम तक निकिता का सफर
दरअसल निकिता पोरवाल उज्जैन के अरविंद नगर की रहने वाली हैं। उनके पिता अशोक पोरवाल ऑयल कारोबार से जुड़े हैं और माता का नाम राजकुमारी पोरवाल है। उन्होंने पहले फेमिना मिस इंडिया मध्य प्रदेश 2024 का खिताब जीता था और उसके बाद मुंबई में आयोजित मिस इंडिया 2024 प्रतियोगिता में विजेता बनीं।
खास बात यह रही कि निकिता ने पहली बार किसी ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लिया था और पहली ही कोशिश में राष्ट्रीय स्तर का खिताब अपने नाम कर लिया। मॉडलिंग के अलावा उनकी रुचि अभिनय और लेखन में भी है। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए नाटकों की स्क्रिप्ट लिखी हैं जिनमें 250 पेज की कृष्ण लीला भी शामिल है। बता दें कि फिनाले से पहले निकिता उज्जैन आई थीं। इस दौरान उन्होंने बाबा महाकाल, काल भैरव और मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया था। परिवार के अनुसार उन्होंने उस समय कहा था कि वह मिस वर्ल्ड बनकर लौटना चाहती हैं।
उज्जैन में दादा-दादी कर रहे प्रार्थना
वहीं निकिता के इस खास पल का गवाह बनने के लिए उनके माता-पिता और भाई वियतनाम पहुंच चुके हैं। वे फिनाले के दौरान वहां मौजूद रहकर उनका उत्साह बढ़ाएंगे। दूसरी ओर उज्जैन में उनके दादा धन्नालाल पोरवाल और दादी सहित परिवार के अन्य सदस्य उनकी जीत के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। उनके दादा ने बताया कि शनिवार को वह अपने मित्रों के साथ टीवी पर फिनाले देखने की तैयारी कर चुके हैं। उनके मुताबिक, निकिता पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हैं और परिवार को भी भरोसा है कि वह विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन करेंगी।
शिक्षक दिवस पर घर-घर पहुंचे युवा, वरिष्ठ और सेवानिवृत्त शिक्षकों का किया सम्मान; डबरा सनाढ़्य ब्राह्मण सभा की पहल
डबरा। शिक्षक दिवस पर डबरा सनाढ़्य ब्राह्मण सभा की युवा इकाई ने समाज के वरिष्ठ और सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मान देने के लिए अलग पहल की। सभा के पदाधिकारियों और युवा इकाई के सदस्यों ने शिक्षकों को किसी एक मंच पर बुलाने के बजाय उनके घर पहुंचकर सम्मान किया और उनका आशीर्वाद लिया।
युवा इकाई अध्यक्ष मदन सैंथिया के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना था। इसके साथ ही नई पीढ़ी को शिक्षकों के जीवन और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश भी दिया गया।
इन वरिष्ठ शिक्षकों का घर पहुंचकर किया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान पंडित राजाराम पटसरिया, पंडित रामगोपाल तिवारी ‘भावुक’, पंडित लखन लाल शर्मा, पंडित जानकी प्रसाद शर्मा, कल्याण प्रसाद रावत, पंडित देवी राम मिश्र, वी.के. गुप्ता, पंडित के.सी. भार्गव, पंडित राम स्वरूप षट्धर और राम शरण छिरोलिया के निवास पर पहुंचकर उनका सम्मान किया गया।
मदन सैंथिया ने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण की आधारशिला हैं और अपने ज्ञान एवं संस्कारों से कई पीढ़ियों को दिशा देते हैं। ऐसे गुरुजनों का सम्मान करना समाज के लिए गौरव और सौभाग्य की बात है।
सभा के पदाधिकारी भी रहे मौजूद
सम्मान कार्यक्रम में सनाढ़्य ब्राह्मण सभा डबरा के नागेंद्र दुबे, डॉ. हरीश चंद्र शर्मा, राजेंद्र शर्मा, जयदयाल शर्मा, विजय शर्मा, महेश बाबू शर्मा, डॉ. रामावतार शर्मा, लखन लाल शर्मा, डॉ. हिमांशु सैंथिया, राम बिहारी शर्मा, देवेश शर्मा, सचिन पांडेय और युवा इकाई अध्यक्ष मदन सैंथिया सहित अन्य सदस्य शामिल हुए।
सम्मान से अभिभूत वरिष्ठ शिक्षकों ने सभा और युवा इकाई की पहल की सराहना की और युवाओं को आशीर्वाद दिया। आयोजकों का कहना है कि घर-घर जाकर सम्मान करने के पीछे उद्देश्य यही था कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक समाज और नई पीढ़ियों को दिशा दी, शिक्षक दिवस पर उनके योगदान के प्रति सम्मान सीधे उनके द्वार तक पहुंचाया जाए।
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