Bihar Flood Alert News: नेपाल के बाद बिहार में बाढ़ का सैलाब, 13 जिले प्रभावित
Bihar Flood Alert News: नेपाल के बाद अब बिहार में लगातार बढ़ते नदियों के जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर कर दिया है. गंगा, गंडक, सोन और कोसी समेत कई नदियां उफान पर हैं. राज्य के 13 जिलों में बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है. अलग-अलग स्रोतों के मुताबिक, 52 प्रखंडों की 270 पंचायतों की करीब 28 लाख आबादी प्रभावित हुई हैं जबकि आपदा प्रबंधन विभाग ने करीब 8 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी साझा की है.
पटना में बिगड़े हालात
वहीं, पटना, भोजपुर, सारण, बेगूसराय और वैशाली में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं. कई इलाकों में घरों और खेतों में पानी घुस गया है. 200 से ज्यादा सड़कों पर आवागमन बाधित है, जबकि कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. हजारों एकड़ धान और अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं. पटना में गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. राहत के लिए नावों का संचालन किया जा रहा है और सामुदायिक रसोई शुरू की गई हैं. प्रभावित लोगों को राशन, पॉलिथीन शीट और अन्य राहत सामग्री बांटी जा रही है.
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1569 के बाद अब बदला दुनिया का नक्शा, 164 देशों ने नए विश्व मानचित्र का किया समर्थन
New World Map: मानव इतिहास में नक्शों ने हमेशा से हमारी सोच, भूगोल और दुनिया को देखने के नजरिए को गढ़ा है. सदियों से जिस चपटे कागज पर हम दुनिया को देखते आए हैं, वह असल में हमारी धरती की एक भ्रामक तस्वीर पेश कर रहा था. समय के साथ इस गलती को सुधारने की मांग उठती रही और आखिरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है.
साल 1569 में बनाया गया था दुनिया का नक्शा
सोलहवीं सदी में जब जेरार्डस मर्केटर ने साल 1569 में दुनिया का नक्शा बनाया था, तब उसका मुख्य उद्देश्य यूरोपीय खोजकर्ताओं को समुद्र में रास्ता खोजने में मदद करना था. यह नक्शा नौकायन के लिए तो उपयोगी साबित हुआ, लेकिन एक गोलाकार पृथ्वी को सपाट कागज पर दिखाने की प्रक्रिया में इसके अनुपात पूरी तरह बिगड़ गए.
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जानें नक्शे में क्या थी तकनीकी खामी
मर्केटर प्रोजेक्शन की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि यह भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्रों, जैसे कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप, रूस और ग्रीनलैंड को उनके वास्तविक आकार से कई गुना बड़ा दिखाता था, जबकि भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके छोटे नजर आते थे. इसी तकनीकी खामी के कारण ग्रीनलैंड और विशाल अफ्रीकी महाद्वीप नक्शे पर लगभग एक बराबर आकार के दिखाई देते थे, जबकि हकीकत में अफ्रीका ग्रीनलैंड से चौदह गुना बड़ा है.
164 देशों ने किया मानचित्र का समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासभा में हाल ही में हुए मतदान में इस पुरानी ऐतिहासिक भूल को सुधारने की आधिकारिक शुरुआत कर दी गई है. टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी द्वारा अफ्रीकी यूनियन के समर्थन से पेश किए गए 'इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन' प्रस्ताव को भारी बहुमत मिला. इस मतदान में भारत, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम समेत 164 देशों ने नए मानचित्र का समर्थन किया, जबकि अमेरिका अकेला ऐसा देश था जिसने इसके विरोध में वोट दिया. अमेरिकी प्रतिनिधियों ने इसे गंभीर वैश्विक मुद्दों से भटकाव करार दिया, वहीं समर्थक देशों का मानना था कि यह बदलाव दुनिया की एक न्यायसंगत और वास्तविक तस्वीर पेश करने की दिशा में एक जरूरी कदम है.
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किसी भी नक्शे का बदलना केवल भौगोलिक सीमाओं का फेरबदल नहीं होता, बल्कि यह हमारी सामूहिक चेतना और वैचारिक समझ को भी प्रभावित करता है. दशकों तक छोटे दिखाए गए अफ्रीकी, लैटिन अमेरिकी और दक्षिण एशियाई देश अब वैश्विक मानचित्र पर अपने सही अनुपात में जगह पा रहे हैं. फ्रांस जैसे देशों द्वारा इस नए प्रोजेक्शन को अपनाने की घोषणा करना इस बात का प्रमाण है कि नक्शों की यह राजनीति अब औपनिवेशिक दृष्टिकोण से बाहर निकलकर भौगोलिक यथार्थ की ओर बढ़ रही है. अंततः यह नया मानचित्र आने वाली पीढ़ियों को हमारी धरती का एक अधिक सटीक, संतुलित और सच्चा परिचय कराएगा.
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