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UP Election 2027: फिरोजाबाद की 5 सीटों पर क्या है सियासी समीकरण? जानें पूरा हिसाब

UP Election 2027: चूड़ियों और कांच उद्योग के लिए मशहूर फिरोजाबाद जिला यूपी की राजनीति में भी अपनी अलग पहचान रखता है. राजनीतिक के क्षेत्र में यह वही इलाका है जहां से समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार का गहरा नाता रहा है. हर विधानसभा चुनाव में यहां यादव वोट बैंक की चर्चा जोरों पर रहती है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आइए जानते हैं जिले की सभी सीटों का पूरा सियासी गणित.

जनगणना और जिले की सियासी तस्वीर

जनगणना 2011 के मुताबिक फिरोजाबाद जिले की कुल आबादी करीब 24 लाख 98 हजार है, जिसमें पुरुषों की संख्या लगभग 13 लाख 32 हजार और महिलाओं की संख्या करीब 11 लाख 66 हजार दर्ज की गई थी. जानकारी के मुताबिक यहां प्रति हजार पुरुषों पर 875 महिलाएं हैं. वहीं, जिले की साक्षरता दर करीब 72 प्रतिशत रही जिसमें पुरुष साक्षरता करीब 81 प्रतिशत और महिला साक्षरता करीब 62 प्रतिशत दर्ज की गई थी. धार्मिक आबादी की बात करें तो जिले में हिंदू आबादी करीब 86 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 13 प्रतिशत है.

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जिले में पांच विधानसभा सीटें, जिनमें से एक आरक्षित

फिरोजाबाद जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं टूंडला, जसराना, फिरोजाबाद (सदर), शिकोहाबाद और सिरसागंज. यह सभी पांचों सीटें फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं. इनमें टूंडला सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है जबकि बाकी चारों सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं.

2022 के नतीजे, जिसमें सपा ने जीतीं थी 3 और भाजपा को मिलीं थी 2 सीटें

चुनाव आयोग के मुताबिक 2022 के विधानसभा चुनाव में फिरोजाबाद जिले की 5 सीटों में से 3 पर सपा और दो पर भाजपा ने कब्जा जमाया था. आइए आपको हर सीट के बारे में डिटेल में बताते हैं.

टूंडला (सुरक्षित), मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2022 में भाजपा के प्रेमपाल सिंह धनगर ने यहां सपा के राकेश बाबू एडवोकेट को करीब 32 हजार वोटों से हराया था. बता दें राकेश बाबू पहले लगातार तीन बार बसपा के टिकट पर इसी सीट से विधायक रह चुके थे. धनगर 2019 में भी उपचुनाव जीतकर इस सीट से विधायक बने थे.

जसराना का पिछला चुनाव जिले का सबसे रोमांचक मुकाबला रहा था. चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक यहां सपा के सचिन यादव ने भाजपा के मानवेंद्र प्रताप सिंह लोधी को महज 836 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराया था.

फिरोजाबाद (सदर) विधानसभा की बात करें तो भाजपा के मनीष असीजा ने सपा प्रत्याशी सैफुर्रहमान उर्फ छुट्टन भाई को करीब 13 हजार वोटों से पराजित किया था. यह सीट जिले की सबसे ज्यादा मतदाताओं वाली सीट मानी जाती है.

शिकोहाबाद के पिछले चुनाव नतीजे देखों तो यहां भी बेहद करीबी मुकाबला हुआ था. सपा के मुकेश चंद्र वर्मा ने भाजपा के ओमप्रकाश वर्मा को सिर्फ 1,116 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी.

सिरसागंज विधानसभा का इतिहास देखें तो यहां सपा के सर्वेश सिंह यादव ने भाजपा के हरिओम यादव को हराया था. दिलचस्प यह रहा कि हरिओम यादव मुलायम सिंह यादव परिवार के समधी माने जाते हैं और वे 2017 में इसी सीट से सपा विधायक चुने गए थे मगर चुनाव से पहले पाला बदलकर भाजपा में चले गए थे.

यादव परिवार का रहा है गढ़, भाजपा लगा रही सेंध

एक रिपोर्ट के मुताबिक फिरोजाबाद को लंबे समय से समाजवादी पार्टी और यादव परिवार का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा ने बड़ा उलटफेर करते हुए पांच में से चार सीटें जीत ली थीं. पार्टी ने टूंडला, जसराना, फिरोजाबाद और शिकोहाबाद पर भगवा परचम लहराया था जबकि सिर्फ सिरसागंज सीट सपा के खाते में गई थी.

भाजपा की पकड़ पुरानी..., सपा कर चुकी है वापसी 

फिरोजाबाद (सदर) सीट पर तो भाजपा की पकड़ और भी पुरानी है. यहां से लगातार तीन विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी जीतते आए हैं, जिससे यह सीट पार्टी का मजबूत किला बन चुकी है. दूसरी तरफ जसराना सीट का इतिहास बताता है कि 1993 से 2007 तक यहां सपा के रामवीर सिंह लगातार जीतते रहे. इसके बाद 2012 में भी सपा ने वापसी की मगर 2017 में भाजपा ने यह सीट छीन ली.

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में क्या बन रहे समीकरण?

लोकसभा स्तर पर देखें तो 2024 के आम चुनाव में फिरोजाबाद सीट से सपा के अक्षय यादव ने भाजपा के विश्वदीप सिंह को करीब 89 हजार वोटों से हराया था. बता दें अक्षय यादव सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव के बेटे हैं. इससे पहले 2019 में भाजपा के चंद्रसेन जादौन ने यह सीट जीती थी जब शिवपाल सिंह यादव के अलग चुनाव लड़ने से सपा का वोट बंट गया था. 2024 में शिवपाल यादव के सपा खेमे में लौट आने से पार्टी को सीधा फायदा मिला था.

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सपा के हौसले बुलंद, बीजेपी भी भर रही दम 

इस लोकसभा जीत ने विधानसभा चुनाव 2027 से पहले जिले में सपा के हौसले को और बुलंद किया है. दूसरी ओर भाजपा भी गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाकर अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी है, ताकि यादव बहुल इलाकों में भी सेंध लगाई जा सके. 

जातीय समीकरण करेगा 'खेला', पढ़िए किस सीट पर किसका दबदबा

- टूंडला (सुरक्षित) सीट पर जाटव मतदाता सबसे ज्यादा (करीब 65 हजार), इसके बाद ठाकुर और बघेल-धनगर समाज (करीब 50-50 हजार), यादव करीब 40 हजार, निषाद व मुस्लिम 20-20 हजार, कुशवाहा, जाट समुदाय के लोग हैं. 

- जसराना सीट पर यादव वोट बैंक का दबदबा, इसके अलावा यहां लोधी और अन्य ओबीसी समुदाय निर्णायक भूमिका में रहते हैं.

- फिरोजाबाद (सदर) सीट पर तो मुस्लिम और वैश्य समाज सबसे बड़े समूह हैं. इसके बाद जाटव, राठौर, शंखवार, ब्राह्मण और यादव मतदाता भी अहम मानें जाते हैं.

- शिकोहाबाद में यादव मतदाता सबसे ज्यादा हैं. इसके बाद निषाद-राजपूत और तीसरे नंबर पर दलित जाटव समाज आता है.

- सिरसागंज सीट की बात करें तो ये यादव बहुल सीट हैं. यहां मुलायम परिवार से जुड़ाव के चलते यहां यादव वोट बैंक हमेशा केंद्र में रहता है.

FAQ

Q. फिरोजाबाद जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
A. फिरोजाबाद जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं, टूंडला, जसराना, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद और सिरसागंज.

Q. फिरोजाबाद जिले में कौन-सी सीट आरक्षित है?
A. टूंडला सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, बाकी चारों सीटें सामान्य श्रेणी की हैं.

Q. 2022 चुनाव में फिरोजाबाद जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
A. सपा को तीन सीटें (जसराना, शिकोहाबाद, सिरसागंज) और भाजपा को दो सीटें (टूंडला, फिरोजाबाद) मिलीं.

Q. फिरोजाबाद जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
A. जनगणना 2011 के अनुसार जिले में हिंदू आबादी करीब 86 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 13 प्रतिशत है.

Q. फिरोजाबाद में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
A. यह इलाका पारंपरिक रूप से सपा और यादव परिवार का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन 2017 में भाजपा ने चार सीटें जीतकर बड़ा उलटफेर किया था. 2022 में सपा ने फिर तीन सीटों पर वापसी की थी.

Q. 2027 के चुनाव से पहले फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
A. 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के अक्षय यादव की बड़ी जीत के बाद पार्टी का मनोबल ऊंचा है, वहीं भाजपा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित मतदाताओं को साधकर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है.

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क्या है पिकैक्स माउंटेन, ईरान में अब इसके पीछे क्यों पड़े ट्रंप?

ईरान अमेरिका युद्ध एक बार फिर अपने खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ईरान के उस रहस्यमई पहाड़ को निशाना बनाने की धमकी दी है। जिसके बाद से यह युद्ध और भयंकर हो सकता है। नाम है पिकैक्स माउंटेन। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी सेना इस जगह पर बहुत जल्द हमला कर सकती है। अब सवाल यह है कि आखिर पिकैक्स माउंटेन में ऐसा क्या है कि ट्रंप की नजर अब इस पहाड़ के नीचे बनी सुरंगों पर है? अगर अमेरिका ने पिकक्स माउंटेन पर हमला किया तो क्या ईरान अमेरिका युद्ध एक बार फिर और ज्यादा खतरनाक दौर में पहुंच जाएगा।

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4 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पिकैक्स माउंटेन को बहुत जल्द निशाना बना सकता है। ट्रंप का कहना था कि अगर वहां कुछ गतिविधि चल रही है तो अमेरिका उस जगह पर हमला कर सकता है। अब बात उस जगह की जिसने इस वक्त पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। पिकैक्स माउंटेन। ईरान के नताज परमाणु परिसर के बेहद करीब मौजूद एक पहाड़ी इलाका है। यह तेहरान से करीब 220 कि.मी. दक्षिण में और नताज न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स से लगभग 2 कि.मी. दूर है। पहाड़ के अंदर गहरी सुरंगों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है। यही वजह है कि इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़कर देखा जाता है।रिपोर्ट्स के मुताबिक इस जगह पर कई सालों से निर्माण और सुरंगों को मजबूत करने का काम चल रहा है। सेटेलाइट तस्वीरों में सुरंगों के प्रवेश द्वार, निर्माण गतिविधियां और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव भी दिखाई देते रहे हैं। यानी यह कोई सामान्य पहाड़ी नहीं है।

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अमेरिका और इजराइल की चिंता यहीं से शुरू होती है। इजराइली खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हो सकता है कि ईरान ने हजारों यूरेनियम एनरचमेंट सेंट्रीफ्यूज को इस पहाड़ के नीचे बनी सुरंगों में पहुंचाया हो। अगर यह आकलन सही है तो इसका मतलब बेहद गंभीर है क्योंकि ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने नताज और फोडो पर जब हमले हुए उसके बाद अगर सेंट्रीफ्यूज या परमाणु उपकरणों को किसी बेहद सुरक्षित भूमिगत जगह पर ले जाया गया तो ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को दोबारा खड़ा करने की क्षमता बचाए रखना चाहता है। हालांकि यहां एक बेहद जरूरी बात है।  सेंट्रीफ्यूज मौजूद होने की रिपोर्ट का मतलब यह जरूरी नहीं कि पिकैक्स माउंटेन में पूरी तरह सक्रिय यूरेनियम एनरचमेंट प्लांट चल रहा हो।

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि उपकरणों को हमले से बचाने के लिए वहां शिफ्ट किया गया हो सकता है। अगर अमेरिका के पास दुनिया के सबसे शक्तिशाली बम और हथियार हैं तो फिर पिकैक्स माउंटेन को लेकर इतनी चिंता क्यों है? तो इस टेंशन की वजह है इसकी भूमिगत गहराई। दरअसल पिकैक्स माउंटेन के नीचे सुरंगों को बेहद मजबूत और गहराई में बनाया गया है। यानी ऊपर से बम गिराना और किसी खुले सैन्य ठिकाने को तबाह करना एक बात है।  

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  Sports

Cricket in USA: अमेरिका में ट्रेडिशनल क्रिकेट नहीं... पॉपुलेरिटी बढ़ाने का क्या है 'पोंटिंग प्लान'

Cricket in USA: अमेरिका (USA) में 2024 का टी20 विश्वकप संयुक्त रूप से आयोजन किया गया था। इस बड़े टूर्नामेंट में अमेरिका ने काफी अच्छा परफार्म किया था। ग्रुप स्टेज में टीम ने पाकिस्तान जैसी टीम को हराकर सुपर-8 में जगह बनाई थी। इसके बावजूद USA में क्रिकेट अभी भी उभरते हुए खेलों में से एक ही है। हालांकि देश में 'मेजर लीग क्रिकेट' टूर्नामेंट का आयोजन हो रहा है। लेकिन आमतौर पर क्रिकेट को देश में अभी भी बड़ी पहचान नहीं मिल पाई है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग का मानना ​​है कि USA में क्रिकेट को T20 के तौर पर रीब्रांड करने से वहां सफलता मिल सकती है।

पोंटिंग ने द एथलेटिक से बातचीत में कहा- अगर मैं इसे सिर्फ गेम को बेचने और प्रमोट करने के लिए यहां लाता, तो मैं इसे क्रिकेट नहीं कहता। इसे बस T20 क्रिकेट के तौर पर रीब्रांड किया जाता। क्रिकेट वाली बात को छोड़ ही दीजिए। दुनिया के जिन हिस्सों में लोग क्रिकेट खेलते हुए बड़े नहीं हुए हैं। वहां के युवा जब क्रिकेट का नाम सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि यह 5 दिन तक चलने वाला लंबा गेम है, जबकि ऐसा नहीं है। मैं इसकी तुलना बेसबॉल से करूंगा और बच्चों को यह समझने का मौका दूंगा कि T20 क्रिकेट के एक गेम में आप 15 छक्के लगाते हैं, जबकि बेसबॉल के एक गेम में आप एक से भी कम होम रन लगाते हैं। 

जब उनसे पूछा गया कि USA में ODI और टेस्ट क्रिकेट को कैसे प्रमोट किया जा सकता है, तो पोंटिंग ने यहां बड़े प्रारुप को लेकर निराशा जताई। उन्होंने कहा- यह वैसा मार्केट नहीं। मुझे इसकी बिल्कुल भी चिंता नहीं है। मुझे टेस्ट क्रिकेट बहुत पसंद है। मैंने T20 से कहीं ज्यादा टेस्ट क्रिकेट खेला है, लेकिन अब मैं T20 गेम पर काफी काम कर रहा हूं। 

MLC से अमेरिका में क्रिकेट शुरू 
मेजर लीग क्रिकेट 2023 में शुरू हुई थी। अभी इसमें 6 टीमें कैलिफ़ोर्निया और टेक्सास में होने वाले 6 हफ़्ते लंबे टूर्नामेंट में खेलती हैं। भले ही सभी टीमों के पास अपने होम वेन्यू (घरेलू मैदान) न हों, फिर भी यह लीग बड़े नामों को निवेशकों के तौर पर आकर्षित करती है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला और एडोब के CEO शांतनु नारायण के अलावा भारत का अंबानी परिवार भी MLC टीम के मालिक के तौर पर शामिल है। आने वाले सालों में इस लीग में टीमों की संख्या बढ़कर 8 हो जाएगी और इसमें स्टीव स्मिथ जैसे खिलाड़ी भी हिस्सा ले रहे हैं।

वॉशिंगटन फ्रीडम के हेड कोच पोंटिंग ने बताया कि USA में क्रिकेट का विकास उनकी उम्मीद से धीमा रहा है। पोंटिंग ने कहा- शुरुआत में MLC से जुड़ने की एक वजह यह थी कि मैं USA में रहकर इसके विकास का हिस्सा बनना चाहता था, लेकिन यह मेरी उम्मीद से थोड़ा धीमा रहा है। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने जमीनी स्तर पर जाकर इसे प्रमोट करने में काफी सक्रियता दिखाई है।

Sat, 05 Sep 2026 16:09:15 +0530

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