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क्या है पिकैक्स माउंटेन, ईरान में अब इसके पीछे क्यों पड़े ट्रंप?

ईरान अमेरिका युद्ध एक बार फिर अपने खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ईरान के उस रहस्यमई पहाड़ को निशाना बनाने की धमकी दी है। जिसके बाद से यह युद्ध और भयंकर हो सकता है। नाम है पिकैक्स माउंटेन। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी सेना इस जगह पर बहुत जल्द हमला कर सकती है। अब सवाल यह है कि आखिर पिकैक्स माउंटेन में ऐसा क्या है कि ट्रंप की नजर अब इस पहाड़ के नीचे बनी सुरंगों पर है? अगर अमेरिका ने पिकक्स माउंटेन पर हमला किया तो क्या ईरान अमेरिका युद्ध एक बार फिर और ज्यादा खतरनाक दौर में पहुंच जाएगा।

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4 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पिकैक्स माउंटेन को बहुत जल्द निशाना बना सकता है। ट्रंप का कहना था कि अगर वहां कुछ गतिविधि चल रही है तो अमेरिका उस जगह पर हमला कर सकता है। अब बात उस जगह की जिसने इस वक्त पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। पिकैक्स माउंटेन। ईरान के नताज परमाणु परिसर के बेहद करीब मौजूद एक पहाड़ी इलाका है। यह तेहरान से करीब 220 कि.मी. दक्षिण में और नताज न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स से लगभग 2 कि.मी. दूर है। पहाड़ के अंदर गहरी सुरंगों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है। यही वजह है कि इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़कर देखा जाता है।रिपोर्ट्स के मुताबिक इस जगह पर कई सालों से निर्माण और सुरंगों को मजबूत करने का काम चल रहा है। सेटेलाइट तस्वीरों में सुरंगों के प्रवेश द्वार, निर्माण गतिविधियां और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव भी दिखाई देते रहे हैं। यानी यह कोई सामान्य पहाड़ी नहीं है।

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अमेरिका और इजराइल की चिंता यहीं से शुरू होती है। इजराइली खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हो सकता है कि ईरान ने हजारों यूरेनियम एनरचमेंट सेंट्रीफ्यूज को इस पहाड़ के नीचे बनी सुरंगों में पहुंचाया हो। अगर यह आकलन सही है तो इसका मतलब बेहद गंभीर है क्योंकि ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने नताज और फोडो पर जब हमले हुए उसके बाद अगर सेंट्रीफ्यूज या परमाणु उपकरणों को किसी बेहद सुरक्षित भूमिगत जगह पर ले जाया गया तो ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को दोबारा खड़ा करने की क्षमता बचाए रखना चाहता है। हालांकि यहां एक बेहद जरूरी बात है।  सेंट्रीफ्यूज मौजूद होने की रिपोर्ट का मतलब यह जरूरी नहीं कि पिकैक्स माउंटेन में पूरी तरह सक्रिय यूरेनियम एनरचमेंट प्लांट चल रहा हो।

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि उपकरणों को हमले से बचाने के लिए वहां शिफ्ट किया गया हो सकता है। अगर अमेरिका के पास दुनिया के सबसे शक्तिशाली बम और हथियार हैं तो फिर पिकैक्स माउंटेन को लेकर इतनी चिंता क्यों है? तो इस टेंशन की वजह है इसकी भूमिगत गहराई। दरअसल पिकैक्स माउंटेन के नीचे सुरंगों को बेहद मजबूत और गहराई में बनाया गया है। यानी ऊपर से बम गिराना और किसी खुले सैन्य ठिकाने को तबाह करना एक बात है।  

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दोस्त रूस पर आई बात, ऐसा गरजे जयशंकर, पूरा कीव हिला डाला

रूसी तेल की खरीद को लेकर पश्चिमी देश लगातार भारत पर दबाव बना रहे हैं। लेकिन भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अब सीधे यूक्रेन की धरती से इन देशों को दो टूक जवाब दे दिया है। उन्होंने साफ तौर पर यहां पर कहा है कि अगर भारत रूसी तेल खरीदना कम भी कर दे तो भी यूक्रेन की जंग नहीं रुकेगी। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने आधिकारिक दौरे पर यूक्रेन की राजधानी  कीव पहुंचे थे।  यहां उन्होंने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर पश्चिमी देशों को अब दो टूक जवाब दिया है और दो टूक जवाब देते हुए जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना कम भी कर दे तो इससे यूक्रेन की जंग नहीं रुकेगी। उन्होंने पश्चिमी देशों की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा है कि रूस की कमाई का जरिया बंद करने से वो जंग छोड़ने पर मजबूर हो जाएगा।

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यूक्रेन के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद एस जयशंकर ने कहा यह जंग आज पांचवें साल में है। यह इस वजह से खत्म नहीं होगी कि कोई तेल, खनिज, धातु या खाद खरीद रहा है या नहीं खरीद रहा। यह जंग बातचीत, कूटनीति और समझौते से ही खत्म होगी। एस जयशंकर ने इस दौरान भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की चुनौतियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा की जरूरत पूरा करना कोई आसान काम नहीं है। उनके मुताबिक इस मामले में भारत और यूक्रेन दोनों के नजरिए का सम्मान किया जाना चाहिए। एस जयशंकर ने आगे कहा, यह भी जरूरी है कि आप सभी यह समझें कि ऐसे समय में जब दुनिया में ऊर्जा की स्थिति बेहद कठिन है तब 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा का इंतजाम करना कितना मुश्किल है। यूक्रेन का इस मुद्दे पर अपना नजरिया है जिसका हम सम्मान करते हैं। हमारा भी अपना नजरिया है और मुझे उम्मीद है कि दूसरे देश भी उसका सम्मान करेंगे। दरअसल जयशंकर से सवाल पूछा गया था कि अगर अमेरिका उन देशों पर प्रतिबंध या फिर टैक्स लगाने वाला कानून पास करता है जो रूस से ऊर्जा खरीदना जारी रखते हैं तो क्या भारत रूस से तेल खरीदना कम करेगा? बस इसी सवाल के जवाब में जयशंकर ने यह सारी बातें कही। यहां पर गौर करने वाली बात है कि अमेरिका और ब्रिटेन समेत पश्चिमी देश यूक्रेन की इस दलील का समर्थन करते हैं कि रूस के ऊर्जा कारोबार को रोकने से उसकी कमाई घटेगी और इससे यूक्रेन में चल रही जंग के लिए रूस को मिलने वाला पैसा भी कम हो जाएगा। 

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आपको बता दें पिछले महीने अमेरिकी सेनेट ने एक बिल पास किया था जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों जिसमें भारत और चीन भी शामिल हैं उन पर 100% तक का टेरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है जो रूस से तेल और गैस का आयात जारी रखते हैं। इस कानून के पीछे तर्क यह है कि ऐसा व्यापार रूस की अर्थव्यवस्था को सहारा देता है और यूक्रेन में उसके सैन्य अभियानों को फंड करने में मदद करता है। अब बात करते हैं भारत और रूस के व्यापार के आंकड़ों की। अमेरिका के महीनों के दबाव के बावजूद रूस भारत के कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है। हालांकि अगस्त में इसके आयात में गिरावट देखी गई। 

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