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China के सैन्य मॉडल की राह पर Pakistan! 50 साल बाद किए बड़े बदलाव, India के लिए क्या हैं मायने?

अब पाकिस्तान भी चीन के सैन्य मॉडल की राह पर चल पड़ा है। करीब पांच दशकों बाद पाकिस्तान ने अपने सैन्य कमांड ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वित कमान को नई दिशा देने की कोशिश की है। इस पुनर्गठन का सबसे बड़ा फायदा फील्ड मार्शल असीम मुनीर को मिलता दिखाई दे रहा है, जिनके हाथों में पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था की ताकत पहले से कहीं अधिक केंद्रित हो सकती है। यह बदलाव केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य शक्ति, रणनीतिक हथियारों और युद्धकालीन फैसलों को अधिक केंद्रीकृत करने की व्यापक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

हम आपको बता दें कि नए कानूनों और संवैधानिक बदलावों के बाद पाकिस्तान में चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। असीम मुनीर पहले से सेना प्रमुख हैं और अब तीनों सेनाओं यानि थल सेना, नौसेना और वायुसेना, के बीच समन्वित कमान के केंद्र में भी हैं। पुरानी व्यवस्था में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का पद तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की भूमिका निभाता था, लेकिन नई व्यवस्था में कमान का केंद्र और अधिक स्पष्ट रूप से एक व्यक्ति के आसपास सिमट गया है।

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यही इस बदलाव का सबसे बड़ा संदेश है कि पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था में सेना अब केवल सबसे ताकतवर संस्था नहीं रहना चाहती, बल्कि अपनी ताकत को कानून और संस्थागत ढांचे के जरिए स्थायी रूप देना चाहती है।

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने रणनीतिक सैन्य ढांचे को भी नए सिरे से संगठित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड जैसी व्यवस्था के जरिए परमाणु हथियारों, मिसाइल क्षमताओं और अन्य रणनीतिक संसाधनों की कमान को अधिक केंद्रीकृत करने की कोशिश की जा रही है। इससे पाकिस्तान के सामरिक निर्णयों में सेना की भूमिका और मजबूत होती दिखाई देती है।

हम आपको बता दें कि पाकिस्तान का यह नया मॉडल चीन की सैन्य संरचना से भी प्रभावित माना जा रहा है। सेना, नौसेना, वायुसेना, मिसाइल और रणनीतिक क्षमताओं को एकीकृत कमान के तहत लाने की सोच का उद्देश्य युद्ध या संकट की स्थिति में तेज फैसले और संयुक्त सैन्य कार्रवाई बताया जा रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण में चीन के साथ सहयोग बढ़ाता रहा है और नया कमांड मॉडल भी उसी व्यापक रणनीतिक दिशा का हिस्सा माना जा रहा है।

लेकिन भारत के लिए सवाल यह है कि क्या असीम मुनीर के हाथों में अधिक शक्ति आने से खतरा बढ़ जाएगा?

देखा जाए तो इसका जवाब केवल हां या नहीं में नहीं दिया जा सकता। पाकिस्तान की सैन्य संरचना में केंद्रीकरण निश्चित रूप से भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाक्रम है। एकीकृत कमान से पाकिस्तान सीमित युद्ध, मिसाइल संचालन और बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों में बेहतर समन्वय की कोशिश कर सकता है। खासतौर पर भारत की पश्चिमी सीमा के संदर्भ में पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारी को अधिक संगठित करने का प्रयास करेगा।

लेकिन पाकिस्तान को यह भ्रम पालने की जरूरत नहीं है कि कमांड स्ट्रक्चर बदलने से जमीन पर उसकी सामरिक वास्तविकता भी बदल जाएगी।

भारत के सामने पाकिस्तान की चुनौती केवल हथियारों या पदों की नहीं है। भारत के पास कहीं अधिक व्यापक सैन्य, आर्थिक और तकनीकी क्षमता है। आधुनिक युद्ध केवल सैनिकों और मिसाइलों की संख्या से तय नहीं होते। अर्थव्यवस्था, रक्षा उत्पादन, तकनीक, खुफिया क्षमता, साइबर शक्ति, अंतरिक्ष क्षमता और राजनीतिक स्थिरता, ये सभी युद्ध शक्ति के महत्वपूर्ण आधार हैं।

यहीं पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आती है। एक तरफ पाकिस्तान सैन्य कमान को मजबूत और केंद्रीकृत कर रहा है, दूसरी तरफ उसकी अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में है। देश राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से जूझता रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा समस्याएं अलग हैं। ऐसे में केवल सेना प्रमुख के हाथों में अधिक अधिकार देने से पाकिस्तान की मूल समस्याएं समाप्त नहीं हो जाएंगी।

यहां एक सवाल यह भी है कि क्या सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण पाकिस्तान की संस्थाओं को और कमजोर करेगा?

देखा जाए तो पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि वहां सेना और निर्वाचित सरकार के बीच शक्ति संतुलन हमेशा विवाद का विषय रहा है। अब यदि सैन्य कमान, रणनीतिक हथियारों और तीनों सेनाओं के समन्वय की शक्ति एक ही शीर्ष सैन्य नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित होती है, तो नागरिक नियंत्रण को लेकर सवाल और गहरे होंगे।

उधर, भारत को इस घटनाक्रम पर नजर जरूर रखनी होगी, हालांकि चिंता की कोई वजह नहीं है। क्योंकि नई कमान व्यवस्था से पाकिस्तान की सैन्य योजनाओं में तेजी और समन्वय आ सकता है, लेकिन भारत की रणनीतिक तैयारी भी अब पुरानी नहीं रही।

नई दिल्ली के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान की किसी भी सैन्य पुनर्संरचना का जवाब बयानबाजी से नहीं, बल्कि बेहतर तैयारी, मजबूत खुफिया तंत्र, आधुनिक तकनीक और निर्णायक सैन्य क्षमता से दिया जाए।

असीम मुनीर के हाथों में ज्यादा ताकत आना पाकिस्तान के लिए शक्ति प्रदर्शन हो सकता है, लेकिन भारत के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि पड़ोसी देश अपनी सैन्य संरचना को नए सिरे से ढाल रहा है। 

साथ ही पाकिस्तान को भी यह समझ लेना चाहिए कि पदों की ताकत और वास्तविक राष्ट्रीय शक्ति में बड़ा अंतर होता है। सेना प्रमुख को अधिक अधिकार देने से न अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, न राजनीतिक संकट खत्म होता है और न ही सैन्य दुस्साहस की कीमत कम हो जाती है।

बहरहाल, नई कमान, नया ढांचा और नए पद पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था को बदल सकते हैं, लेकिन दक्षिण एशिया की सामरिक सच्चाई नहीं बदल सकते। भारत तैयार है, सतर्क है और अपनी सुरक्षा के खिलाफ किसी भी चुनौती का जवाब देने की क्षमता रखता है।

नीरज कुमार दुबे 

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झारखंड: गढ़वा में डेंगू ने दी दस्तक, एक व्यापारी की मौत, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

गढ़वा, 5 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड के गढ़वा जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। जिले में अब तक डेंगू से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि एक मरीज ठीक होकर घर लौट चुका है। डेंगू के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और इससे निपटने के लिए सदर अस्पताल में 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड भी तैयार किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पिछले दस दिनों में गढ़वा जिले में डेंगू के कई मरीजों में लक्षण पाए गए हैं, जिनमें से दो मामले सामने आए हैं। इनमें जिले के एक बड़े व्यवसायी की डेंगू जैसी बीमारी की चपेट में आने से मौत हो गई। हालांकि उस मरीज का इलाज सरकारी अस्पताल में नहीं कराया गया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है कि उस व्यवसायी की मौत डेंगू से ही हुई थी।

वहीं दूसरी ओर, एक और मरीज में डेंगू के लक्षण मिलने पर उसका इलाज कर उसे ठीक करके घर भेज दिया गया है। जिले में डेंगू के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके।

इस मामले पर गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ कैनेडी ने कहा, यह बहुत दुख की बात है कि एक व्यक्ति की मौत डेंगू से हुई है। उन्होंने हमारे किसी भी सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं कराया, वे सीधे डालटनगंज (अब आधिकारिक रूप से मेदिनीनगर) चले गए थे। हमारे जिले में जो जांच हुई है, उसमें केवल एक-दो जांच ही डेंगू के लिए पॉजिटिव आई हैं।

सिविल सर्जन ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यह समय और मौसम दोनों ही डेंगू का है, इसलिए लोगों को इससे बचने के लिए अपने घरों के आसपास पानी नहीं जमने देना चाहिए और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने बताया कि जिले में एक-दो छिटपुट केस आए थे, जिन्हें ठीक कर दिया गया है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है और हर परिस्थिति के लिए तैयार है।

सिविल सर्जन ने कहा, अगर आपको डेंगू होता है तो सदर अस्पताल जाइए, हम लोग इसको पूरी तरह से नियंत्रित कर सकते हैं, बस समय रहते इलाज कराना होगा।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, बदन दर्द जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और घर के आसपास मच्छरों को पनपने से रोकें।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Jaipur News: अब जयपुर की अवनी लेखरा डब्ल्यूएसपीएस वर्ल्ड चैंपियनशिप में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

जयपुर की गोल्डन गर्ल और दो बार की पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता अवनी लेखरा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा लहराने को तैयार हैं. दक्षिण कोरिया के चांगवोन में 7 से 16 सितंबर तक होने वाली डब्ल्यूएसपीएस वर्ल्ड चैंपियनशिप में अवनी आर-2 10 मीटर एयर राइफल और आर-8 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. पदक जीतकर वह 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक के लिए अपनी दावेदारी और मजबूत करना चाहेंगी. Sat, 5 Sep 2026 13:42:06 +0530

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