Teacher's Day 2026: मनुष्य ही नहीं, देवताओं-भगवानों से लेकर असुरों के भी थे शिक्षक, जानें इनके गुरुओं के बारे में
Teacher's Day 2026: आज यानी 5 सितंबर 2026 को देश में शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है. भारतीय शिक्षक दिवस को पूरे 64 साल पूरे हो चुके है. देश में पहली बार 5 सितंबर 1962 में शिक्षक दिवस मनाया गया था. दरअसल, डॉक्टर सर्वपल्लि राधाकृष्णन का इस दिन पर जन्मदिन होता है. वे भारतीय इतिहा के महान शिक्षक थे, जिन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व में अपनी अमिठ छाप छोड़ी थी. शिक्षक यानी गुरु, इनकी जरूरत इंसानों को होती ही है लेकिन क्या आपको पता है एक अच्छे शिक्षक की आवश्यकता भगवान और देवताओं को भी पड़ी थी? जी हां, पौराणिक कथाओं मे देवताओं के भी गुरु थे. आइए जानते हैं भगवानों के टीचर्स के बारे में.
भगवान के समान होते हैं शिक्षक
भारतीय संस्कृति में शिक्षकों का स्थान भगवान से भी ऊपर माना जाता है. सनातन धर्म में गुरु को सिर्फ शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि जीवन में सही मार्ग दिखाने वाला और ज्ञान का प्रकाश देने वाला भी माना जाता है. यही कारण है कि शिक्षक दिवस हो या गुरु पूर्णिमा, दोनों अवसरों पर उन्हें महत्व दिया जाता है. भारतीय पौराणिक कथाओं में भगवान राम, कृष्ण से लेकर पांडवों के भी शिक्षक थे, जिन्होंने उन्हें ज्ञान दिया था.
देवताओं के गुरु कौन थे?
देवताओं का गुरु बृहस्पति देव को माना जाता है. वे देवराज इंद्र, सूर्यदेव, वायुदेव, अग्निदेव, चंद्रदेव आदि जैसे देवताओं के गुरु और मार्गदर्शक हैं. सनातन धर्म में इन्हें विशेष मान्यता दी गई है. सप्ताह का एक दिन जिसे बृहस्पति या गुरुवार कहा जाता है, इन्हीं को समर्पित है. उन्होंने देवताओं को ज्ञान, बुद्धि और नीति का पाठ सिखाया था. इनका उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है. ज्योतिष में देन गुरु बृहस्पति की विशेष स्थिति मानी जाती है.
आखिर देवों को क्यों पड़ी थी गुरु की आवश्यकता?
दरअसल, गुरु सिर्फ शिक्षा नहीं देते हैं. वे अपने शिष्य को सही और गलत के बीच अंतर भी समझाते हैं. वे कठिन परिस्थितियों में उचित मार्गदर्शन देने का कार्य करते हैं. देवताओं के गुरु बृहस्पति देव भी देवताओं को धर्म और नीति के मार्ग पर चलने की सलाह देते हैं. यही वजह है कि उन्हें सिर्फ शिक्षक नहीं बल्कि देवताओं का आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी माना जाता है.
भगवान राम के गुरु कौन थे?
त्रेतायुग के भगवान राम और उनके भाइयों ने भी गुरुकुल में शिक्षा हासिल की थी. उनके गुरु महर्षि वशिष्ठ थे, जो उनके कुलगुरु भी थे. वे अयोध्या के इक्ष्वाकु कुल के राजपुरोहित और कुलगुरु थे. उनके पास शिक्षा ग्रहण करने के लिए राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को बचपन में ही भेज दिया गया था. महर्षि वशिष्ठ ब्रह्मांड के सप्तऋषियों में शामिल हैं. वे भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र हैं, जो सत्य, तपस्या और पवित्रता के प्रतीक माने जाते हैं.
राम-लक्ष्मण के मुख्य गुरु "विश्वमित्र"
गुरु विश्वमित्र ने भी त्रेतायुग में राम और लक्ष्मण को अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान दिया था. वे पहले एक राजा थे और फिर कठिन तपस्या के बाद महान ब्रह्मर्षि बने थे. उन्होंने राम जी को ताड़का वध का मार्गदर्शन दिया था. उन्होंने ही राम और लक्ष्ण को अस्त्र-शस्त्र विद्या, दिव्य अस्त्रों के प्रयोग और धनुर्विद्या का विशेष ज्ञान दिया था. उनकी शिक्षा से भगवान राम ने मिथिला में शिव धनुष तोड़ा था और सीता से विवाह किया था.
हनुमान जी के गुरु कौन थे?
पवनपुत्र हनुमान जी के गुरु वैसे तो सूर्यदेव थे. उन्होंने हनुमान जी को ब्रह्मांडीय ज्ञान दिया था. सूर्यदेव ने हनुमान जी को शास्त्रों और विद्याओं का सबसे गहरा ज्ञान चाहिए था, तब माता अंजना के कहने पर वे सूर्यदेव के पास गए. सूर्यदेव का रथ ही हनुमान जी के लिए एक चलता-फिरता गुरुकुल बन गया था, जहां उन्होंने बहुत कम समय में सभी चारों वेद और नौ व्याकरण शास्त्र सीख लिए थे. हालांकि, उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा पंपा सरोवर के पास ऋषि मतंग के आश्रम में प्राप्त की थी.
भगवान कृष्ण के गुरु कौन थे?
भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी के गुरु महर्षि सांदीपनि थे. कंस वध करने के बाद दोनों भाई उज्जैन में सांदीपनि के आश्रम गए थे. भगवान कृष्ण इतने बुद्धिमान थे कि सिर्फ 64 दिनों में उन्होंने चारों वेद, उपनिषद, राजनीति, युद्ध कला, धनुर्विद्या और 64 कलाएं सीख ली थी.
पांडवों के गुरु कौन थे?
द्वापर युग में पांडवों तथा कौरवों के शिक्षक, गुरु द्रोणाचार्य थे. गुरु द्रोण कुरुवंश के कुलगुरु थे. हालांकि, प्रारंभिक शिक्षा पांडवों और कौरवों ने हस्तिनापुर में पहले कुलगुरु कृपाचार्य से प्राप्त की थी.
असुरों के गुरु कौन हैं?
देवताओं की तरह असुरों के गुरु भी थे. उनके शिक्षक शुक्राचार्य हैं, जिनके पास मृतसंजीवनी विद्या थी. महर्षि शुक्राचार्य राजा बलि, हिरण्यकश्यप आदि के मुख्य सलाहकार थे. शुक्राचार्य भगवान शिव के सबसे बड़े भक्त थे. उन्होंने उनकी घोर तपस्या कर मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त की थी. महर्षि शुक्राचार्य महर्षि भृगु के पुत्र थे, जो ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं.
केंद्र सरकार की 'कॉर्पोरेट मित्र' पहल शुरू, एमएसएमई को मिलेगी किफायती प्रोफेशनल सहायता
नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए अनुपालन (कंप्लायंस) की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कॉर्पोरेट मित्र पहल शुरू की है। इस पहल का मकसद अनुपालन को डरावना नहीं, बल्कि आसान और ज्ञान को सुलभ बनाना है।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की संयुक्त सचिव अनीता शाह अकेला ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य अनुपालन को एक बोझ से बदलकर विश्वास, पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यवस्थित विकास का माध्यम बनाना है।
सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में कॉर्पोरेट मित्र पहल की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य प्रशिक्षित और प्रमाणित पैरा-प्रोफेशनल्स का एक पूल तैयार करना है जो एमएसएमई को बिजनेस और रेगुलेटरी अनुपालन में मदद कर सकें।
यह प्रोग्राम आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीओएआई की प्रोफेशनल विशेषज्ञता को आईआईटी मद्रास, आईआईटी मद्रास प्रवर्तक औरस्वयं प्लस के तकनीकी और अकादमिक सहयोग के साथ जोड़ता है।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई), इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीओएआई) ने कॉर्पोरेट मित्र कोर्स शुरू कर दिया है, जिसके पहले बैच में 2,879 शिक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अनुसार, कॉर्पोरेट मित्र लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) का लॉन्च इस प्रोग्राम के स्ट्रक्चर्ड लर्निंग और क्षमता-विकास चरण की शुरुआत है।
इस कोर्स का लक्ष्य प्रमाणित पैरा-प्रोफेशनल्स का एक कुशल समूह तैयार करना है जो एमएसएमई को किफायती प्रोफेशनल सहायता प्रदान कर सके, जिससे व्यापार करने में आसानी, रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यह भारत के एमएसएमई इकोसिस्टम के विकास और औपचारिकरण में योगदान देने वाले पैरा-प्रोफेशनल्स के कुशल पूल को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कॉर्पोरेट मित्र कोर्स की कुल अवधि 12 महीने है, जिसे दो चरणों में बांटा गया है। पहले छह महीनों में लगभग 150 घंटे की स्ट्रक्चर्ड अकादमिक लर्निंग शामिल है, जो रिकॉर्डेड वीडियो लेक्चर के माध्यम से दी जाएगी।
इसके बाद आईसीएआई, आईसीएसआई और आईसीओएआई के सदस्यों की प्रोफेशनल फर्मों में छह महीने की ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग होगी, जो शिक्षार्थियों को प्रैक्टिकल अनुभव प्रदान करेगी।
--आईएएनएस
वीकेयू/वीसी
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