मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बेहद सुरक्षित और भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकएक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) पर बहुत जल्द हमला करने की खुली धमकी दी है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए 80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
शुक्रवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए, 80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ने दोहराया कि संयुक्त राज्य अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न करे, और उन्होंने अपने प्रशासन के कार्यों को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर वहां कोई गतिविधि देखी गई तो पिकएक्स माउंटेन को निश्चित रूप से निशाना बनाया जाएगा।
ट्रंप ने कहा, "हमें अब पांच महीने हो गए हैं। और आप जानते हैं कि हमने पांच महीनों में क्या किया? उनके पास परमाणु हथियार नहीं होगा; हमने यही किया है।" "ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा क्योंकि अगर ऐसा होता, तो शायद आप यहां ज्यादा देर तक खड़े नहीं रह पाते।"
उन्होंने आगे कहा, "हम बहुत जल्द पिकएक्स पर हमला कर सकते हैं क्योंकि अगर पिकएक्स में कुछ भी हो रहा होता है, तो हमें पता होता है; हम जानते हैं कि पिकएक्स में कौन आ-जा रहा है; हम जानते हैं कि पूरे ईरान में कौन कहां जा रहा है। और अगर कुछ भी गलत होता है, तो हम उन पर हमला करते हैं; हम उन पर जोरदार हमला करते हैं।"
अमेरिका पिकएक्स माउंटेन को क्यों निशाना बनाना चाहता है?
पिकएक्स माउंटेन नतांज़ परमाणु सुविधा के बगल में स्थित है, जो ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 225 किलोमीटर दक्षिण में है। नतांज़ परमाणु सुविधा, जिसे आधिकारिक तौर पर शहीद अहमदी रोशन परमाणु सुविधा कहा जाता है, को ईरान के परमाणु कार्यक्रम का केंद्र माना जाता है।
जून 2025 में 12 दिनों के युद्ध के दौरान, इज़राइल ने नतांज़ को निशाना बनाया, जिससे साइट को भारी नुकसान पहुंचा। बाद में, अमेरिका ने भी B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स से इसे निशाना बनाया और कुछ भारी बंकर-बस्टर बम गिराए। इसके अलावा, इज़राइल ने तोड़फोड़ के हमले जारी रखे।
नतांज़ को बार-बार निशाना बनाए जाने के कारण ईरानियों को अपना परमाणु कार्यक्रम पिकएक्स माउंटेन में स्थानांतरित करना पड़ा, जहां एक नई सुविधा बनाई जा रही है। यह 2.7 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बना है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, इसे एंटी-एयरक्राफ्ट बैटरी, फेंसिंग और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से सुरक्षित किया गया है।
AP ने बताया कि यह सुविधा ज़मीन के नीचे 80 से 100 मीटर की गहराई पर बनाई जा रही है और जानकारों का मानना है कि इसका इस्तेमाल यूरेनियम को एनरिच करने और सेंट्रीफ्यूज बनाने के लिए किया जाएगा।
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भारत और अमेरिका के बीच बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते यानी बीटीए को लेकर भारत ने अपना रुख एक बार फिर साफ कर दिया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील की अंतिम डिटेल्स तभी सार्वजनिक की जाएंगी जब भारतीय उत्पादों को उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर प्रेफरेंशियल टेरिफ रेट मिलेगा। यानी भारत का फोकस सिर्फ ट्रेड डील को जल्द पूरा करने पर नहीं बल्कि ऐसी शर्तों पर समझौता करने पर है जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान को नुकसान ना पहुंचे। पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने अमेरिका के सामने अपनी प्राथमिकताएं रख दी हैं और जब तक अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर टेरिफ देने पर सहमत नहीं होता तब तक समझौते की अंतिम बारीकियों का ऐलान नहीं किया जाएगा।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने जिन ट्रेड समझौतों पर बातचीत की है उसमें देश के हितों और संवेदनशील क्षेत्रों का पूरा ध्यान रखा गया है। किसान, मछुआरों, एमएसएमईस और कामगारों के साथ-साथ फार्मा, टेक्सटाइल, कृषि और प्रोसेस्ड एग्री फूड जैसे क्षेत्रों को संरक्षण दिया गया है और उन्होंने दावा किया कि इन समझौतों में भारत को ऐसे प्रावधान मिले हैं जिन पर देश गर्व कर सकता है। पीयूष गोयल ने भारत के बढ़ते फ्री ट्रेड एग्रीमेंट नेटवर्क का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन, मॉरीशियस, ओमान, यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो चुके हैं। ईएफटीए देशों के साथ समझौता भी लागू है। जबकि न्यूजीलैंड के साथ समझौता जल्द लागू होने की उम्मीद है। इसके बाद यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर फोकस है। पीयूष गोयल के मुताबिक भारत इस साल अपने कुल निर्यात को करीब 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। जो पिछले साल के मुकाबले करीब 16% की वृद्धि होगी।
पीयूष गोयल ने इस दौरान बताया कि अप्रैल से जुलाई की अवधि में पिछले साल भारत का निर्यात करीब $280 अरब डॉलर था। जबकि इस साल यह बढ़कर लगभग $317 अरब डॉलर हो गया। यानी शुरुआती 4 महीनों में ही करीब 37 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का मकसद साफ है। भारतीय कंपनियों और उत्पादों को ज्यादा से ज्यादा वैश्विक बाजारों में बेहतर टेररिफ के साथ प्रवेश मिले। लेकिन इसके साथ घरेलू किसानों, एमएसएमईस और दूसरे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की भी सुरक्षा बनी रही। कई देशों के साथ भारत का एफटीए हो चुका है। कई देशों के साथ बातचीत जारी है। अमेरिका के साथ बातचीत इसी संतुलन का सबसे बड़ा टेस्ट है। पीयूष गोयल के बयान से भारत ने संकेत दे दिया कि जल्दबाजी में डील से ज्यादा जरूरी भारत के लिए बेहतर डील है और बेहतर टेरिफ रेट मिलने के बाद ही बीटीए की अंतिम तस्वीर सामने आएगी।
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