पिछले कुछ महीनों से जो बांग्लादेश चीन की गोद में बैठकर भारत को आंख दिखा रहा है। अब यही बांग्लादेश चीन के चक्रव में ऐसा फंसा है कि वो दिन दूर नहीं कि पूरा देश बर्बाद हो जाएगा। बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान की एक गलती की सजा पूरा बांग्लादेश भुगत रहा है। इसीलिए अब बांग्लादेश की जनता तारिक रहमान के खिलाफ उतर आई है। तारीख के फैसले का विरोध कर रही है। दरअसल बांग्लादेश इस समय बिजली की कमी और पावर कट की समस्या से जूझ रहा है। हाल ही में बांग्लादेश ने इस समस्या से उभने के लिए भारत से मदद मांगी थी। लेकिन इसके लिए भारत ने एक छोटी डिमांड कर दी। यह डिमांड बांग्लादेश को पसंद नहीं आई और वो भारत के ऑफर को ठुकरा कर चीन की शरण में चला गया और चीन कितना खिलाड़ी है उसके बारे में पूरी दुनिया जानती है कि कैसे पाकिस्तान और श्रीलंका को चीन ने अपने जाल में फंसाकर बर्बाद कर डाला। अब ठीक उसी तरह बांग्लादेश भी चीन के चंगुल में फंस गया है।
दरअसल बांग्लादेश भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली के बावजूद चीन से महंगी बिजली खरीद रहा है। ढाका के पास अमीन बाजार में लग रहे वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट से 42 मेगावाट बिजली 25 टका यानी करीब ₹19 प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी और इसके लिए 25 साल का करार हुआ है। इन दिनों राजधानी ढाका और मुख्य शहरों में घंटों तक बिजली की कटौती हो रही है। इसके साथ ही वहां के विदेशी मुद्रा को लेकर भी स्थिति डामाडोल है। बांग्लादेश भारत से सस्ती कीमतों में बिजली की खरीद करता आया है। लेकिन भारत की ओर से मामूली टैक्स बढ़ाए जाने पर आपत्ति जता रहा है। भारत ने सीमा पार बिजली लेनदेन और ग्रिड से जुड़े खर्च के लिए 1 पैसे प्रति यूनिट शुल्क प्रस्तावित किया था। मगर बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड ने इसका विरोध किया। इसके बाद भारत ने शुल्क को घटाकर आधा पैसा प्रति यूनिट करने की बात कही। लेकिन फिर भी बांग्लादेश को यह ऑफर रास नहीं आई। इसके उलट वो चाइना प्रेम के चक्कर में ड्रैगन को बिजली के लिए भारत के मुकाबले 127% अधिक भुगतान कर रहा है।
भारत से बांग्लादेश को करीब 11 टका यानी 8.5 प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। यानी कि चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत भारत से दो गुने से भी ज्यादा है। 2 सितंबर को बीजिंग में हुए समझौते का बांग्लादेश में विरोध भी शुरू हो गया है। लोग सड़कों पर हैं। दरअसल चीन बांग्लादेश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। वह तीस्ता नदी पर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट समेत बिजली से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अमीन बाजार का वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट भी इसी बढ़ती भागीदारी का हिस्सा है। चीन की योजना बांग्लादेश के रास्ते म्यांमार तक भी ऊर्जा पहुंच बढ़ाने की है। लेकिन चीन से हर कोई वाकिफ है कि कैसे वह लालच देकर छोटे-छोटे देशों को अपने चंगुल में फंसाकर उनको कस देता है। उनकी फिर जमीन पर कब्जा कर लेता है। वैसे अब उसने बांग्लादेश के साथ भी करना शुरू कर दिया है।
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मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बेहद सुरक्षित और भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकएक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) पर बहुत जल्द हमला करने की खुली धमकी दी है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए 80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
शुक्रवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए, 80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ने दोहराया कि संयुक्त राज्य अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न करे, और उन्होंने अपने प्रशासन के कार्यों को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर वहां कोई गतिविधि देखी गई तो पिकएक्स माउंटेन को निश्चित रूप से निशाना बनाया जाएगा।
ट्रंप ने कहा, "हमें अब पांच महीने हो गए हैं। और आप जानते हैं कि हमने पांच महीनों में क्या किया? उनके पास परमाणु हथियार नहीं होगा; हमने यही किया है।" "ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा क्योंकि अगर ऐसा होता, तो शायद आप यहां ज्यादा देर तक खड़े नहीं रह पाते।"
उन्होंने आगे कहा, "हम बहुत जल्द पिकएक्स पर हमला कर सकते हैं क्योंकि अगर पिकएक्स में कुछ भी हो रहा होता है, तो हमें पता होता है; हम जानते हैं कि पिकएक्स में कौन आ-जा रहा है; हम जानते हैं कि पूरे ईरान में कौन कहां जा रहा है। और अगर कुछ भी गलत होता है, तो हम उन पर हमला करते हैं; हम उन पर जोरदार हमला करते हैं।"
अमेरिका पिकएक्स माउंटेन को क्यों निशाना बनाना चाहता है?
पिकएक्स माउंटेन नतांज़ परमाणु सुविधा के बगल में स्थित है, जो ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 225 किलोमीटर दक्षिण में है। नतांज़ परमाणु सुविधा, जिसे आधिकारिक तौर पर शहीद अहमदी रोशन परमाणु सुविधा कहा जाता है, को ईरान के परमाणु कार्यक्रम का केंद्र माना जाता है।
जून 2025 में 12 दिनों के युद्ध के दौरान, इज़राइल ने नतांज़ को निशाना बनाया, जिससे साइट को भारी नुकसान पहुंचा। बाद में, अमेरिका ने भी B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स से इसे निशाना बनाया और कुछ भारी बंकर-बस्टर बम गिराए। इसके अलावा, इज़राइल ने तोड़फोड़ के हमले जारी रखे।
नतांज़ को बार-बार निशाना बनाए जाने के कारण ईरानियों को अपना परमाणु कार्यक्रम पिकएक्स माउंटेन में स्थानांतरित करना पड़ा, जहां एक नई सुविधा बनाई जा रही है। यह 2.7 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बना है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, इसे एंटी-एयरक्राफ्ट बैटरी, फेंसिंग और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से सुरक्षित किया गया है।
AP ने बताया कि यह सुविधा ज़मीन के नीचे 80 से 100 मीटर की गहराई पर बनाई जा रही है और जानकारों का मानना है कि इसका इस्तेमाल यूरेनियम को एनरिच करने और सेंट्रीफ्यूज बनाने के लिए किया जाएगा।
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