वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मुनाफा 83 प्रतिशत गिरने से थर्मैक्स के शेयरों में बड़ी गिरावट, इंट्रा-डे में 16 प्रतिशत से ज्यादा टूटा स्टॉक
मुंबई, 31 जुलाई (आईएएनएस)। थर्मैक्स लिमिटेड के जून तिमाही (क्यू1) के कमजोर नतीजों के बाद शुक्रवार को कंपनी के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। मुनाफे में भारी गिरावट और एक प्रोजेक्ट कॉस्ट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिसके चलते शेयरों पर दबाव बढ़ गया।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर कारोबार के दौरान थर्मैक्स का शेयर एक समय 16 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 3,566.50 रुपए के इंट्रा-डे लो स्तर तक पहुंच गया। दोपहर के कारोबार में भी शेयर करीब 3,680 रुपए के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो 13.43 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। हालांकि बाद के कारोबार में गिरावट में थोड़ी कमी आई।
कंपनी के तिमाही नतीजों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 83.4 प्रतिशत घटकर 25.2 करोड़ रुपए रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 152.4 करोड़ रुपए था।
हालांकि, मुनाफे में भारी गिरावट के बावजूद कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 6.7 प्रतिशत बढ़कर 2,303 करोड़ रुपए हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 2,158 करोड़ रुपए था।
कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में भी कमजोरी देखने को मिली। ईबीआईटीडीए (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की आय) सालाना आधार पर 69.5 प्रतिशत घटकर 68.6 करोड़ रुपए रह गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 225 करोड़ रुपए था। इसके चलते ईबीआईटीडीए मार्जिन भी घटकर 3 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले 10.4 प्रतिशत था।
थर्मैक्स ने बताया कि कमजोर तिमाही प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह उसके इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट की एक परियोजना रही, जिसमें तिमाही के दौरान सामने आए कुछ नए घटनाक्रमों के बाद प्रोजेक्ट पूरा करने की अनुमानित लागत में 91 करोड़ रुपए की अतिरिक्त बढ़ोतरी करनी पड़ी।
कंपनी ने यह भी बताया कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसके इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट की एक सहायक कंपनी को पैकेज स्कीम ऑफ इंसेंटिव्स के तहत 56 करोड़ रुपए की आय प्राप्त हुई थी, जिससे उस समय के नतीजों को अतिरिक्त सहारा मिला था।
इसके अलावा, रिपोर्टिंग अवधि के दौरान इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स कारोबार में निर्यात बिक्री घटने से भी कंपनी की लाभप्रदता पर असर पड़ा।
इस बीच, कंपनी के निदेशक मंडल ने थर्मैक्स बायोएनर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, थर्मैक्स कूलिंग सॉल्यूशंस लिमिटेड और थर्मैक्स लिमिटेड के बीच प्रस्तावित स्कीम ऑफ अरेंजमेंट और अमलगमेशन (विलय) को भी मंजूरी दे दी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बिना एथेनॉल मिश्रण के पेट्रोल की कीमत 125 रुपए प्रति लीटर तक जा सकती है: केंद्र
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि मध्य पूर्व तनाव के समय बिना एथेनॉल मिश्रण के पेट्रोल की कीमत 125 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। साथ ही, कहा कि इससे ग्राहकों को 30 रुपए प्रति लीटर तक की बचत करने में मदद मिली है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, जब संकट के दौरान भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तो अनुमान लगाया गया था कि राष्ट्रीय राजधानी में बिना एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की खुदरा कीमत लगभग 125 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी।
हालांकि, उपभोक्ताओं ने 94.77 रुपए प्रति लीटर का भुगतान किया क्योंकि हर लीटर में 20 प्रतिशत हिस्सा देश में बने एथेनॉल का था, जिसे पहले से तय स्थिर कीमतों पर खरीदा गया था।
मंत्रालय ने कहा कि इस बचत से पता चलता है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने में कितनी अहम भूमिका निभाती है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होती है और देश के ईंधन खर्च का एक बड़ा हिस्सा घरेलू अर्थव्यवस्था में ही बना रहता है।
मंत्रालय ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम फूड सिक्योरिटी, किसानों के कल्याण और एनर्जी सिक्योरिटी के बीच संतुलन बनाता है। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सभी जरूरतों को पूरा करने के बाद, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा प्रमाणित अतिरिक्त अनाज को ही एथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूरी दी जाती है।
सरकार ने यह भी कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, कल्याणकारी योजनाओं और अनिवार्य बफर स्टॉक की जरूरतों के तहत खरीदे गए अनाज का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए तब तक नहीं किया जाता, जब तक कि खाद्य सुरक्षा की जरूरतें पूरी न हो जाएं।
इस प्रोग्राम के तहत खराब अनाज, टूटे हुए चावल और इंसानों के खाने के लायक न रहने वाले अनाज का इस्तेमाल किया जाता है।
मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम ने कच्चे तेल के आयात को कम करके भारत को विदेशी मुद्रा में 1.97 लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत करने में मदद की है, साथ ही 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को भी कम किया है।
इससे किसानों और डिस्टिलर्स को 1.66 लाख करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान भी हुआ है, जिससे कृषि उत्पादों के लिए एक स्थिर घरेलू बाज़ार बना है।
मंत्रालय ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग का मकसद आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करना है, जो अभी भी देश की तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत है, और यह ग्लोबल स्तर पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के असर से बचाने के लिए एक इंश्योरेंस पॉलिसी की तरह काम करता है।
--आईएएनएस
एबीएस
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