नयी दिल्ली, चार सितंबर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को करीब 30,000 करोड़ रुपये के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल गई है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की वेबसाइट पर शुक्रवार को उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नियामक ने एनएसई को आईपीओ प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के लिए मंजूरी दे दी है।
एनएसई का आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश (ओएफएस) पर आधारित होगा। इसमें मौजूदा शेयरधारक करीब छह प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। ओएफएस होने की वजह से इससे जुटाई गई राशि एनएसई को नहीं, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनएसई अगले सप्ताह आईपीओ के लिए मूल्य दायरा और अन्य प्रमुख विवरण घोषित कर सकता है। इस निर्गम के 15 सितंबर को खुलने और 24-25 सितंबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना है। करीब 30,000 करोड़ रुपये जुटाने की स्थिति में एनएसई अक्टूबर 2024 में आए हुंदै मोटर इंडिया के 27,858.75 करोड़ रुपये के आईपीओ का रिकॉर्ड पीछे छोड़ देगा।
हालांकि, सबसे बड़े आईपीओ के तमगे के लिए इसकी टक्कर रिलायंस की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के प्रस्तावित निर्गम से होगी। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का आकार करीब 37,700 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, लेकिन इसके आने का समय अभी घोषित नहीं हुआ है। एनएसई का आईपीओ 2022 में आए एलआईसी के 20,557.23 करोड़ रुपये के निर्गम के अलावा 2021 में आए पेटीएम के 18,300 करोड़ रुपये, 2025 में आए टाटा कैपिटल के 15,511.87 करोड़ रुपये और 2010 में आए कोल इंडिया के 15,200 करोड़ रुपये के आईपीओ से भी बड़ा होगा।
करीब एक दशक की नियामकीय अड़चनों के बाद आने वाला यह आईपीओ एनएसई को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, करीब 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ से एनएसई का बाजार पूंजीकरण पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। देश के प्रमुख शेयर बाजार का संचालन करने वाली कंपनी एनएसई ने इस साल 17 जून को सेबी के पास मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे।
मसौदा दस्तावेज के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) आईपीओ में 2.48 करोड़ तक शेयर बेचेगा, जबकि एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी। एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
हालांकि, एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी में से कोई भी शेयर नहीं बेचेगी। एनएसई के निदेशक मंडल ने इस साल छह फरवरी को आईपीओ लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले एक्सचेंज को सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिल गया था।
एनएसई के आईपीओ तक पहुंचने का सफर लंबा रहा है। इसने 2016 में पहली बार ओएफएस के जरिये करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। लेकिन नियामकीय खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के चलते सेबी ने इसकी मंजूरी लंबे समय तक रोक दी थी।
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शुक्रवार को तार और केबल कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। इसकी बड़ी वजह आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट का तार और केबल कारोबार में औपचारिक प्रवेश माना जा रहा है। अल्ट्राटेक ने ‘अल्ट्रावोल्ट’ नाम से इस कारोबार की शुरुआत की है, जिससे पहले से इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
बता दें कि 4 सितंबर को कारोबार के दौरान केईआई इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 8.1 प्रतिशत टूटकर 4,895.50 रुपये तक पहुंच गए। वी-मार्क इंडिया में 7.37 प्रतिशत की गिरावट आई और इसका शेयर 323 रुपये पर आ गया। आरआर केबल के शेयर 6.83 प्रतिशत गिरकर 2,439 रुपये पर कारोबार करते दिखे। वहीं, बड़ी कंपनियों में शामिल पॉलीकैब इंडिया में 5.78 प्रतिशत की गिरावट आई और शेयर 8,298 रुपये तक पहुंच गया।
फिनोलेक्स केबल्स में भी 2.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और शेयर 1,231.70 रुपये पर रहा। यूनिवर्सल केबल्स 3.07 प्रतिशत गिरकर 1,576.90 रुपये पर आ गया, जबकि लेजर पावर एंड इंफ्रा में 1.16 प्रतिशत की कमी देखी गई। हवेल्स इंडिया का शेयर भी करीब 4 प्रतिशत नीचे 1,152 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था।
इसके उलट अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर में हल्की मजबूती बनी रही। दोपहर के कारोबार में कंपनी का शेयर करीब 0.22 प्रतिशत बढ़कर 11,300 रुपये के आसपास पहुंच गया। साल 2026 में अब तक अल्ट्राटेक के शेयर में करीब 5.1 प्रतिशत की बढ़त हुई है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में 8.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। कंपनी का बाजार मूल्यांकन करीब 3.33 लाख करोड़ रुपये बताया गया है।
गौरतलब है कि अल्ट्राटेक ने तार और केबल कारोबार के लिए 1,800 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। कंपनी ने पहले दिसंबर के अंत तक इस कारोबार को शुरू करने का संकेत दिया था, लेकिन निर्धारित समय से पहले ही अल्ट्रावोल्ट बाजार में उतार दिया गया। जून तक कंपनी इस योजना पर करीब 890 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी थी।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि अल्ट्राटेक अपने मजबूत वितरण नेटवर्क का इस्तेमाल इस नए कारोबार में कितनी तेजी से कर पाती है। कंपनी ने अगले पांच वर्षों में देश की दो बड़ी तार और केबल कंपनियों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है। मॉर्गन स्टेनली ने अल्ट्राटेक पर अपनी सकारात्मक राय कायम रखते हुए 14,700 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया है। वहीं, जेफरीज ने खरीद की राय के साथ 14,065 रुपये का लक्ष्य तय किया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, जेफरीज का अनुमान है कि कारोबार के पूरी तरह विस्तार के बाद वित्त वर्ष 2030 तक तार और केबल कारोबार अल्ट्राटेक के कुल राजस्व और परिचालन लाभ में 3 से 7 प्रतिशत तक योगदान दे सकता है। फिलहाल यह संभावना उसके अनुमानों में पूरी तरह शामिल नहीं है।
अल्ट्रावोल्ट की शुरुआत फिलहाल तार और कम वोल्टेज वाली केबल से होगी। इसका उत्पादन गुजरात के झगड़िया स्थित अल्ट्राटेक संयंत्र में किया जाएगा। कंपनी देशभर के 500 से ज्यादा जिलों और 6,000 से अधिक पिन कोड तक पहुंच बनाने की तैयारी में है। उसका लक्ष्य एक लाख से ज्यादा खुदरा विक्रेताओं को नेटवर्क से जोड़ना है।
इसके अलावा अल्ट्राटेक अपने 5,000 से अधिक भवन समाधान केंद्रों और 20 से ज्यादा गोदामों के मौजूदा नेटवर्क का भी इस्तेमाल करेगी। कंपनी का दावा है कि शुरुआत के समय ही अल्ट्रावोल्ट उत्पादन क्षमता के आधार पर देश की दूसरी सबसे बड़ी तार कंपनी होगी।
तार और केबल बाजार में पॉलीकैब इंडिया, केईआई इंडस्ट्रीज, आरआर केबल और फिनोलेक्स केबल्स जैसी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी है। ऐसे में अल्ट्राटेक का बड़ा निवेश और व्यापक वितरण नेटवर्क आने वाले समय में इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है। निवेशकों के लिए अब कंपनियों की बिक्री, लाभ और बाजार हिस्सेदारी में होने वाले बदलाव महत्वपूर्ण हैं।
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