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घर में झाड़ू को खड़ा करके रखना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें मां लक्ष्मी से जुड़ी धार्मिक मान्यता

Jhadu khada rakhna ashubh kyon: भारतीय घरों में झाड़ू को केवल साफ-सफाई का साधन नहीं माना जाता, बल्कि धार्मिक मान्यताओं में भी इसका विशेष स्थान बताया गया है। कई परिवारों में झाड़ू को धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से झाड़ू रखने और उसके इस्तेमाल से जुड़ी कई परंपराएं आज भी प्रचलित हैं।

धार्मिक मान्यता है कि झाड़ू घर से गंदगी और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक है। इसलिए इसे सम्मान के साथ रखने की परंपरा बताई जाती है।

झाड़ू को खड़ा करके रखना क्यों माना जाता है अशुभ?
लोकमान्यताओं के अनुसार, झाड़ू को हमेशा जमीन पर सही तरीके से रखना चाहिए और उसे खड़ा करके रखने से बचना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है।

कई लोग इसे मां लक्ष्मी के अपमान से भी जोड़कर देखते हैं। हालांकि, यह मान्यता धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है और अलग-अलग क्षेत्रों में इससे जुड़े नियमों में अंतर हो सकता है।

झाड़ू को मां लक्ष्मी से क्यों जोड़कर देखा जाता है?
धार्मिक परंपराओं में साफ-सफाई को शुभता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। चूंकि झाड़ू घर की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए लोकविश्वासों में इसे मां लक्ष्मी से संबंधित माना गया है।

विशेष रूप से दीपावली के दौरान कई लोग नई झाड़ू खरीदते हैं। इस अवसर पर घर की साफ-सफाई के साथ-साथ धन और समृद्धि की कामना की जाती है।

झाड़ू पर पैर रखने से क्यों बचते हैं लोग?
कई हिंदू परिवारों में झाड़ू पर पैर रखना अनुचित माना जाता है। यदि गलती से पैर लग जाए तो कुछ लोग झाड़ू को प्रणाम करने की परंपरा भी निभाते हैं।

इसके पीछे यह धारणा है कि घर की सफाई और व्यवस्था बनाए रखने वाली वस्तुओं का सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि, ये परंपराएं मुख्य रूप से लोकविश्वास और पारिवारिक संस्कारों का हिस्सा हैं।

शाम के समय झाड़ू लगाने को लेकर क्या है मान्यता?
कुछ क्षेत्रों में सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि शाम के समय झाड़ू लगाने से घर की सकारात्मकता और समृद्धि बाहर जा सकती है।

हालांकि, यह नियम सभी जगह समान रूप से नहीं माना जाता और आधुनिक जीवनशैली में लोग अपनी सुविधा के अनुसार घर की सफाई करते हैं।

झाड़ू को कहां रखना चाहिए?
लोक-परंपराओं के अनुसार, झाड़ू को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां वह दूसरों की नजरों के सामने न हो। इसे साफ और सूखी जगह पर रखने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू को सम्मानपूर्वक रखने से घर में शुभता बनी रहती है। साथ ही व्यावहारिक रूप से भी इसे साफ और सुरक्षित जगह पर रखने से घर की व्यवस्था बेहतर बनी रहती है।

आज भी निभाई जाती हैं ये परंपराएं
समय के साथ लोगों की जीवनशैली में बदलाव जरूर आया है, लेकिन झाड़ू से जुड़ी धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं आज भी कई भारतीय परिवारों का हिस्सा हैं। दीपावली हो या रोजमर्रा का जीवन, साफ-सफाई और समृद्धि से जुड़ी इन परंपराओं को लोग अपनी आस्था और पारिवारिक संस्कारों के अनुसार निभाते हैं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोकविश्वासों और पारंपरिक प्रथाओं पर आधारित है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।

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US Ambassador Sergio Gor: 'पीएम मोदी से मिलना चाहते हैं ट्रंप...', भारत-अमेरिका रिश्तों और ट्रेड डील पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान

India US relations: भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर एक नया अध्याय जुड़ता नजर आ रहा है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने एक इंटरव्यू के दौरान द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार समझौतों और वैश्विक राजनीति को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि आगामी दिसंबर में फ्लोरिडा में आयोजित होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिन चुनिंदा वैश्विक नेताओं से मुलाकात करना चाहते हैं, उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा।

उन्होंने दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल और द्विपक्षीय संबंधों में आ रही तेजी का विशेष रूप से उल्लेख किया है। राजदूत ने उम्मीद जताई कि इस बहुपक्षीय सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की यह यात्रा केवल एक साधारण ग्रुप मीटिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके मायने और भी गहरे होंगे।

गोर ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप आने वाले साल में फिर से भारत का दौरा कर सकते हैं, क्योंकि वे अपने 2020 के ऐतिहासिक दौरे, वहां के लोगों और अपने "प्रिय मित्र" प्रधानमंत्री मोदी को बेहद आत्मीयता से याद करते हैं।

'बहुत जल्द फाइनल होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील'
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा करते हुए सर्जियो गोर ने बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद इस डील पर नए सिरे से काम किया जा रहा है, लेकिन दोनों देश एक समझौते पर पहुँचने के बहुत करीब हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस महत्वपूर्ण समझौते को आगामी कुछ महीनों के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

गोर के अनुसार, वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा लगभग 240 अरब डॉलर है, जिसे पीएम मोदी और ट्रंप ने आने वाले कुछ वर्षों में बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। इसके अलावा, उन्होंने भारत में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता लाने के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की और बताया कि माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, डेटा सेंटर, एआई सेंटर और फार्मास्यूटिकल क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार परवान चढ़ रहा है।

'भारत एक अत्यंत विश्वसनीय रक्षा साझीदार'
39 वर्षीय अमेरिकी राजनयिक ने भारत को वाशिंगटन का एक भरोसेमंद रक्षा साझीदार करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच का यह रक्षा रिश्ता महज सैन्य उपकरणों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास पर आधारित है क्योंकि अमेरिका हर देश को अपने उन्नत सैन्य उपकरण नहीं बेचता है। उन्होंने जेवलिन मिसाइल प्रोजेक्ट, अपाचे हेलीकॉप्टर की डिलीवरी और अन्य रक्षा उपकरणों को लेकर चल रही वार्ताओं का उदाहरण दिया। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत किसी भी अन्य देश की तुलना में संयुक्त सैन्य अभ्यास सबसे अधिक अमेरिका के साथ ही करता है।

उच्च स्तरीय दौरों और क्वाड समिट को लेकर बड़ी बातें
गोर ने कहा कि भारत को अब वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के लगातार दौरों के "आदि हो जाना चाहिए", क्योंकि अमेरिका नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करना चाहता है। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्टूबर के महीने में फिर से भारत का दौरा करेंगे। इसके अतिरिक्त, कई अन्य कैबिनेट अधिकारियों और अमेरिका के बड़े राज्यों के तीन गवर्नरों के भी इस साल के अंत से पहले भारत आने की पूरी संभावना है।

राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी माने जाने वाले गोर ने यह भी बताया कि अमेरिका क्वाड (Quad) देशों के नेताओं के शिखर सम्मेलन को लेकर अत्यधिक उत्सुक है। सिडनी में आयोजित होने वाली आगामी क्वाड मंत्रिस्तरीय बैठक में रुबियो के भाग लेने की उम्मीद है, और चारों देश इसी साल के अंत तक एक लीडर्स समिट आयोजित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।

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  Sports

England Tour से पहले मुश्किल में श्रीलंका, Kusal Mendis की जगह Charit Asalanka को मिली कप्तानी की बड़ी जिम्मेदारी

श्रीलंका क्रिकेट टीम को इंग्लैंड दौरे से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के कप्तान कुसल मेंडिस मांसपेशियों की चोट से समय पर उबर नहीं सके हैं और अब वह इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज में नहीं खेल पाएंगे। उनकी गैरमौजूदगी में चरित असलंका टीम की कप्तानी संभालेंगे।

बता दें कि कुसल मेंडिस को जुलाई में लंका प्रीमियर लीग के दौरान कोलंबो कैप्स की ओर से खेलते हुए चोट लगी थी। प्रतियोगिता में केवल दो मुकाबले खेलने के बाद उनकी जांघ की पिछली मांसपेशी में खिंचाव की समस्या सामने आई थी। इस चोट के कारण वह भारत के खिलाफ घरेलू मैदान पर खेली गई दो टेस्ट मैचों की सीरीज से भी बाहर हो गए थे। अब तक पूरी तरह फिट नहीं होने के चलते इंग्लैंड के खिलाफ सबसे छोटे प्रारूप की श्रृंखला से भी उन्हें बाहर बैठना पड़ेगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार, चरित असलंका को पहले इस दौरे के लिए उपकप्तान बनाया गया था, लेकिन अब उन्हें सीधे टीम की कमान सौंपी गई है। यह सीरीज उनके लिए छोटे प्रारूप में वापसी का भी मौका होगी। असलंका को जून में वेस्टइंडीज दौरे के लिए श्रीलंका की टी20 टीम में जगह नहीं मिली थी। ऐसे में कप्तानी की जिम्मेदारी के साथ उनकी वापसी भी टीम के लिए अहम मानी जा रही है।

कुसल मेंडिस की जगह बल्लेबाज पवन रथनायके को टीम में शामिल किया गया है। वहीं बाएं हाथ के तेज गेंदबाज बिनुरा फर्नांडो की जगह दिलशान मदुशंका को भी टीम में बुलाया गया है। बिनुरा पीठ की चोट से परेशान हैं और इसी वजह से वह टी20 श्रृंखला में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

श्रीलंका और इंग्लैंड के बीच टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 15 सितंबर को साउथम्पटन के रोज बाउल मैदान में खेला जाएगा। दोनों टीमों के लिए यह श्रृंखला आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। श्रीलंका को खास तौर पर अपने प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता और फिटनेस पर नजर रखनी होगी।

श्रीलंका की संशोधित टीम में कप्तान चरित असलंका के अलावा पथुम निसांका, कमिल मिशारा, लाहिरु उदारा, कामिंदु मेंडिस, जनिथ लियानगे, दासुन शनाका, दुनिथ वेल्लालागे, वानिंदु हसरंगा, महीश तीक्षणा, थारिंदु रथनायके, दुश्मंथा चमीरा, ईशान मलिंगा, नुवान तुषारा, पवन रथनायके और दिलशान मदुशंका शामिल हैं।

गौरतलब है कि कुसल मेंडिस श्रीलंका के अहम बल्लेबाजों में गिने जाते हैं और टीम की कप्तानी भी संभाल रहे थे। ऐसे में उनका बाहर होना श्रीलंका के लिए बड़ा नुकसान है। दूसरी ओर चरित असलंका के सामने युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के मिश्रण वाली टीम को संभालने की चुनौती होगी। इंग्लैंड की मजबूत टीम के खिलाफ उनकी कप्तानी की असली परीक्षा 15 सितंबर से शुरू होने वाली है।
Fri, 04 Sep 2026 20:30:00 +0530

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