सैलाब का सितम: उफनती नदी के ऊपर एक पतली रस्सी पर टिकी जिंदगियां, ग्राउंड जीरो से खौफनाक तस्वीरें
Nepal Flood: नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद स्थिति अत्यंत विकट बनी हुई है. उफनती त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों के तेज बहाव ने कई प्रमुख पुलों और सड़कों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है. रसूवा और त्रिशूली के बीच का पूरा रोड नेटवर्क ध्वस्त हो चुका है, जिससे नेपाल-चीन सीमा और कैलाश मानसरोवर यात्रा रूट पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है. पुलों के ढहने से नदी के दूसरी तरफ सैकड़ों लोग फंस गए थे. इस स्थिति से निपटने के लिए नेपाली सेना और नेपाल पुलिस ने विदुर तथा इंद्राणी घाट के पास लगभग 250 मीटर लंबा अस्थाई केबल क्रॉसिंग (जिप लाइन/रोपवे) तैयार किया है. यह रोपवे पूरी तरह से मैनुअल है, जिसमें बने एक धातु के पिंजरे में एक बार में दो से तीन लोगों को बैठाकर जवान अपने हाथों से खींचते हुए नदी पार करा रहे हैं.
'महामंत्र का जाप करता रहा...' 9 दिन सुरंग में फंसे शख्स ने सुनाई आपबीती
Nepal Flood: नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बीच उम्मीद और इंसान की अदम्य इच्छाशक्ति की एक हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है. आपदा के बाद अपर त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की एक अंधेरी सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों को नौ दिन बाद शुक्रवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
9 दिनों तक सुरंग में फंसे रहे लोग
सुरंग से सुरक्षित निकाले गए 30 वर्षीय मैकेनिकल फोरमैन संजय शाह ने बताया कि बाढ़ की चेतावनी मिलते ही उन्होंने सहकर्मियों को सुरक्षित स्थान की ओर भेजने की कोशिश की. शाह खुद सुरक्षित भागने के बजाय अपनी टीम के साथ डटे रहे, लेकिन तभी सुरंग में तेजी से पानी भर गया और बाहर निकलने के तमाम रास्ते बंद हो गए. संजय शाह और उनके आसपास मौजूद छह लोग लगातार एक-दूसरे की हिम्मत बंधाते रहे. नौ दिनों तक बिना भोजन और पानी के अंधेरे में फंसे रहना बेहद खौफनाक था. शाह के अनुसार, इस कठिन घड़ी में वे केवल महामंत्र का जाप करते रहे और ईश्वर से प्रार्थना करते रहे.
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चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत के मुताबिक, संजय शाह को सुरंग के भीतर लगभग 170 मीटर की गहराई से बाहर निकाला गया. बचावकर्मियों ने मलबे के बीच से रास्ता बनाकर शाह को सुरक्षित निकाला और आपातकालीन कर्मियों ने उन्हें अपनी पीठ पर उठाकर हेलीकॉप्टर तक पहुंचाया। इसके बाद दूसरे कर्मचारी को भी स्ट्रेचर की मदद से बाहर लाया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि 4.5 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के गहरे हिस्सों में ऑक्सीजन का प्रवाह बना हुआ था और आसपास जमा पानी की मौजूदगी ने भी इन दोनों कर्मचारियों को इतने लंबे समय तक जीवित रहने में मदद की.
26 अगस्त के दिन हुआ था हादसा
यह हादसा 26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर और चट्टानी मलबा खिसकने के कारण आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हुआ था. इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है, जिसमें 1,280 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 5,500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. नेपाल के ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने इस सफलता को एक उम्मीद की किरण बताते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है. कठिन और भारी मलबे के कारण आ रही रुकावटों से निपटने के लिए नेपाली बचाव दलों को भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के तकनीकी विशेषज्ञों का सहयोग मिल रहा है.
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