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Kaushambi Firecracker Factory Blast: फरार आरोपी शकील पर इनाम बढ़ाकर 50 हजार रुपये हुआ

कौशांबी, चार सितंबर उत्तर प्रदेश के कौशांबी में पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट के मामले में अब भी फरार चल रहे एकमात्र आरोपी शकील की गिरफ्तारी पर घोषित इनाम शुक्रवार को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कौशांबी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सत्यनारायण प्रजापत ने कहा, ‘‘प्रयागराज रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अजय मिश्रा ने इनाम की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी है।’’ पुलिस के अनुसार 31 अगस्त को मंझनपुर क्षेत्र के मनौरी कस्बे में एक पटाखा फैक्टरी में विस्फोट हुआ था, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी।

इस हादसे में गंभीर रूप से घायल तीन लोगों का प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में उपचार चल रहा है। इस मामले में फैक्टरी के मालिक एवं संचालक नौशाद समेत छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और विस्फोटक अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि नौशाद, उसकी पत्नी कहकशां बानो, बेटे आदिल तथा शकील की पत्नी शबाना और बेटी सायना को गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि शकील अब भी फरार है।

शबाना और सायना को विस्फोट वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था। नौशाद को एक सितंबर को चरवा थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी थी।

एसपी ने बताया कि आदिल को तीन सितंबर को हुई मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया। उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी। कहकशां बानो को भी उसी दिन उसके गांव महमूदपुर से गिरफ्तार किया गया।

विस्फोट के बाद प्रशासन ने बुलडोजर से महमूदपुर में नौशाद के तीन मंजिला मकान और उसकी पटाखा फैक्टरी के एक गोदाम को ध्वस्त कर दिया था। पुलिस के अनुसार, मूरतगंज बाजार स्थित उसका एक अन्य गोदाम भी गिरा दिया गया। पुलिस ने इससे पहले आदिल, कहकशां बानो और शकील की गिरफ्तारी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।

पुलिस ने बताया कि आदिल और कहकशां बानो की गिरफ्तारी के बाद प्राथमिकी में नामजद छह आरोपियों में से अब केवल शकील ही फरार है।

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China के सस्ते सामान से तंग आया यूरोप! बेल्जियम के PM का बड़ा बयान- 'PM मोदी ने पहले ही दी थी चेतावनी, हमने बात नहीं मानी'

चीन द्वारा वैश्विक बाजारों में सस्ते सामानों की 'डंपिंग' और अनुचित व्यापार नीतियों के खिलाफ अब यूरोप का रुख सख्त होने लगा है। भारत दौरे पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर (Bart De Wever) ने स्वीकार किया कि यूरोप को चीन पर अत्यधिक आर्थिक निर्भरता का "कड़वा सच" समझ आ गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यूरोपीय देशों को इस खतरे का अहसास होने से बहुत पहले ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोप को आगाह किया था, लेकिन तब उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया।
 

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दिल्ली में कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, डी वेवर - जो भारत की दो दिवसीय यात्रा पर हैं - ने कहा कि यूरोप ने बहुत लंबे समय तक सस्ते विदेशी सामानों को अपने बाजारों में आने दिया, जिससे घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचा और महाद्वीप बाहरी सप्लायर्स पर और अधिक निर्भर हो गया। उन्होंने सीधे तौर पर चीन का नाम लिए बिना कहा, "यूरोप के लिए, पिछले कुछ साल एक कड़वी सच्चाई का एहसास कराने वाले रहे हैं। बहुत लंबे समय तक, यूरोप देखता रहा कि कैसे जरूरत से ज्यादा उत्पादन (ओवरकैपेसिटी) लागत से भी कम कीमत पर हमारे बाजारों में डंप किया जा रहा था। कैसे उसके औद्योगिक आधार को कमजोर किया गया और कैसे जानबूझकर निर्भरता बढ़ाई गई ताकि उसका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा सके।"

डी वेवर ने कहा कि भारत ने यूरोप से पहले ही खतरे को पहचान लिया था और यूरोपीय देशों को ऐसी आर्थिक निर्भरता के नतीजों के बारे में चेतावनी दी थी।
 

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उन्होंने कहा, "भारत ने इसे हमसे पहले ही देख लिया था। और उन्होंने हमें चेतावनी दी थी। लेकिन हमने उनकी बात नहीं सुनी।" यह बात चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और यूरोपीय बाजारों में सामान डंप करने के संदर्भ में कही गई थी।

बेल्जियम के नेता ने कहा कि यूरोप अब ऐसी निर्भरता बढ़ने देने के नतीजों का सामना कर रहा है, जिसमें आर्थिक संबंधों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किए जाने की संभावना भी शामिल है।

उन्होंने इस व्यापक खतरे के बारे में यूरोप को चेतावनी देने का श्रेय सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दिया।

डी वेवर ने कहा, "आपके प्रधानमंत्री ने बहुत पहले ही यूरोप को इस बारे में चेतावनी दी थी। लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। उनकी बात नहीं सुनी गई। लेकिन अब हम सुन रहे हैं।"

'हमारी लिस्ट में भारत नंबर 1 पर है'
डी वेवर ने स्पष्ट किया कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में ब्रुसेल्स अब भारत को एक बेहद महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने कहा, "हमारी लिस्ट में भारत नंबर 1 पर है। अगर भारत आपकी लिस्ट में नहीं है, तो आप किसी बुनियादी चीज को नजरअंदाज कर रहे हैं।" उन्होंने उन देशों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया जो अचानक व्यापार नीतियां बदल सकते हैं या टैरिफ लगा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बेल्जियम को ऐसे साझेदारों की जरूरत है जिनके साथ वह भरोसे पर आधारित संबंध बना सके।

डी वेवर ने पूछा, "भरोसे के आधार पर हमारे साथ और कौन सहयोग कर सकता है?" बेल्जियम के नेता ने कहा कि उनका देश भारत के साथ रिश्तों को "एक नए स्तर पर ले जाना चाहता है -- आर्थिक और राजनीतिक रूप से, और साथ ही रणनीतिक रूप से भी।"

पाकिस्तान को मिलिट्री हार्डवेयर पर बेल्जियम का संदेश
भारत की सुरक्षा चिंताओं के संदर्भ में बेल्जियम के प्रधानमंत्री की बातें भी अहम हैं। रक्षा क्षेत्र में गहरे होते रिश्तों के बीच, माना जा रहा है कि बेल्जियम ने नई दिल्ली को यह संदेश दिया है कि वह पाकिस्तान को ज़रूरी मिलिट्री हार्डवेयर की सप्लाई नहीं करेगा।

यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत और बेल्जियम रक्षा-उद्योग के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मज़बूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसमें ऐसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं जिनसे बेल्जियम की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके भारत में मिलिट्री हार्डवेयर का संयुक्त उत्पादन (joint production) आसान हो सके।

प्रधानमंत्री मोदी और डी वेवर के बीच बातचीत के दौरान भारत और बेल्जियम के रक्षा उद्योगों से जुड़े दस समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। इस सहयोग के तहत भारत में रॉकेट समेत मिलिट्री उपकरणों के संयुक्त उत्पादन की भी उम्मीद है। दोनों देश सैन्य आदान-प्रदान और ट्रेनिंग को बढ़ाने के साथ-साथ अपनी एजेंसियों के बीच इंटेलिजेंस-शेयरिंग और सहयोग को मज़बूत करने पर भी सहमत हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भारत-बेल्जियम के व्यापक रिश्तों का एक "मुख्य स्तंभ" बताया।

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  Sports

Mike Hesson का बड़ा खुलासा: Rizwan और Imam-ul-Haq को हटाने के फैसले में मेरा कोई हाथ नहीं, PCB पर फोड़ा ठीकरा

पाकिस्तान क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो हार के बाद मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में टीम में किए गए बड़े बदलावों को लेकर अंतरिम लाल गेंद कोच माइक हेसन ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। हेसन ने कहा कि मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा और इमाम-उल-हक को टीम से बाहर करने के फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि जब उन्हें जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया, तब तक ये तीनों खिलाड़ी टीम छोड़कर स्वदेश लौट चुके थे।

बता दें कि इंग्लैंड ने सीरीज के पहले मुकाबले में हेडिंग्ले में पाकिस्तान को पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी इंग्लैंड ने 194 रन से जीत दर्ज की। इन लगातार दो हार के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अब दोनों टीमों के बीच तीसरा और अंतिम टेस्ट 9 सितंबर से एजबेस्टन में खेला जाना है।

इन हार के बाद पाकिस्तान बोर्ड ने टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों के स्तर पर बड़े बदलाव किए। मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा, इमाम-उल-हक, अली उस्मान, आमिर जमाल, मुहम्मद आवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टीम से हटा दिया गया। इसके अलावा मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।

माइक हेसन को इसके बाद अंतिम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की लाल गेंद वाली टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई। बर्मिंघम में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने रिजवान, आगा और इमाम को हटाए जाने के फैसले से खुद को अलग करते हुए कहा कि बोर्ड ने जब उनसे अंतिम टेस्ट की जिम्मेदारी संभालने के बारे में पूछा, तब तक तीनों खिलाड़ी टीम से बाहर किए जा चुके थे और घर लौट रहे थे।

हालांकि हेसन ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी खिलाड़ियों को हटाने और कुछ नए चेहरों को टीम में शामिल करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका थी। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य अंतिम टेस्ट के लिए टीम में बेहतर संतुलन तैयार करना था।

मौजूद जानकारी के अनुसार, हेसन पाकिस्तान की सीमित ओवरों वाली टीम के साथ काम करने के बाद जापान से लौटे थे। जापान में एशियाई खेलों का आयोजन चल रहा है। लाहौर में पाकिस्तान का सीमित ओवरों का प्रशिक्षण शिविर भी हुआ था। इसी दौरान क्रिकेट बोर्ड ने उनसे टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा।

हेसन ने कहा कि अब उनका मुख्य जोर ऐसी गेंदबाजी इकाई तैयार करने पर है जिसमें अलग-अलग तरह के गेंदबाज मौजूद हों। वह टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ियों को भी रखना चाहते हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में योगदान दे सकें। उनके अनुसार, अंतिम टेस्ट में टीम का संतुलन सुधारना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

नई पाकिस्तान टीम में सैम अयूब और अब्दुल्ला फजल जैसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इनके अलावा अराफात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बैग, मोहम्मद इमरान और रजाउल्लाह जैसे ऐसे खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा हैं जिन्हें अभी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करना बाकी है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले ही श्रृंखला गंवा चुका है, इसलिए एजबेस्टन टेस्ट उसके लिए परिणाम से ज्यादा अपनी कमजोरियों को सुधारने का अवसर होगा। लगातार हार के बाद टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को मौका देकर भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करना चाहता है। ऐसे में अंतिम मुकाबले में नए चेहरों के प्रदर्शन और माइक हेसन की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Fri, 04 Sep 2026 21:59:00 +0530

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