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Teachers Day: देश के इन ‘सुपर टीचर्स’ ने बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर, पढ़ाने के अनोखे तरीकों से रचा इतिहास 

Teachers Day 2026: भारत में कुछ शिक्षिकाएं ऐसी भी हैं, जिन्होंने पढ़ाने के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर शिक्षा को बच्चों के लिए आसान, रोचक और व्यावहारिक बना दिया। किसी ने घरेलू सामान और खेल के जरिए गणित को सरल किया, तो किसी ने डिजिटल तकनीक और स्पेस साइंस से ग्रामीण छात्राओं के सपनों को नई उड़ान दी। इन ‘सुपर टीचर्स’ की अनूठी पहल ने न सिर्फ सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदला, बल्कि हजारों बच्चों के आत्मविश्वास और भविष्य को भी नई दिशा दी।

घरेलू सामानों से करातीं पढ़ाई- शोभा सिंह, बिहार  
बिहार के जमुई के अपग्रेडेड हाई स्कूल की शिक्षिका शोभा सिंह गणित को कहानियों और दैनिक जीवन की वस्तुओं से जोड़कर पढ़ाती हैं। वे त्रिकोणमिति के कठिन चैप्टर जैसे ‘हाइट एंड डिस्टेंस’ और एरिया पैरामीटर को रटवाने के बजाय क्लासरूम में रखी वस्तुओं का इस्तेमाल करके एक जादुई ट्रिक की तरह समझाती हैं। शोभा सिंह बिहार के जमुई जिले के बरहट प्रखंड में स्थित कृत्यानंद अपग्रेडेड उच्च विद्यालय, मलयपुर में कार्यरत हैं। उन्हें उनके इसी इनोवेटिव और घरेलू जुगाड़ वाले शिक्षण शैली के लिए बिहार सरकार और विभिन्न संस्थाओं द्वारा ‘राजकीय शिक्षक पुरस्कार’ तथा ‘टीचर ऑफ द बिहार’ जैसे सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है।

लर्न बाई डूइंग मैथड-  रेखा चौधरी, बिहार 
बिहार की इस शिक्षिका को बच्चों के बुनियादी गणित को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। मुजफ्फरपुर की रेखा चौधरी ने टीचिंग लर्निंग मैटिरियल और रचनात्मक तरीकों का उपयोग करके बच्चों के बुनियादी गणित और हिंदी को सरल बनाया है। उन्होंने पारंपरिक रटने वाले तरीके को पूरी तरह बदलकर ‘लर्न बाय डूइंग’ को बढ़ावा दिया है। वे गत्ते, माचिस की तीलियों और रंगीन पत्थरों की मदद से बच्चों को ‘जोड़-घटाओ’ और पहाड़े इतनी आसानी से सिखाती हैं कि बच्चे खेल-खेल में गणित सीख जाते हैं।

हिंदी भाषा सिखाने के लिए वे अक्षर कार्ड और फ्लैश कार्ड का उपयोग करती हैं। बच्चे अक्षरों को आपस में जोड़कर नए शब्द बनाना एक खेल की तरह सीखते हैं, जिससे उनकी शब्दावली और पढ़ने की क्षमता बहुत तेजी से विकसित होती है। उनके इस अनूठे और प्रभावी शिक्षण कौशल को यूनिसेफ इंडिया द्वारा बच्चों की शिक्षा और सीखने की मजबूत नींव तैयार करने के वास्ते सराहा गया है। रेखा मैम के इन्हीं अनूठे प्रयासों का नतीजा था कि जब 22 वर्षों की सेवा के बाद उनका तबादला हुआ, तो पूरे गांव और स्कूल के बच्चों की आंखें नम थीं।

डिजिटल मॉड्यूल से टीचिंग- मनिमाला, आंध्र प्रदेश 
मनिमाला जी आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के राजमुंदरी के पास स्थित जिला परिषद गर्ल्स हाई स्कूल, डोवलेश्वरम में भौतिक विज्ञान  की शिक्षिका और अटल टिंकरिंग लैब की प्रभारी हैं। मनिमाला जी को उनके स्कूल में स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए जाना जाता है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में उनकी एक छात्रा कंडुला जेसी का ग्लोबल स्पेस मिशन में चयन है। मनिमाला जी ने अपनी कक्षा 10 की एक अत्यंत होनहार छात्रा, कंडुला जेसी की विज्ञान में रुचि को पहचाना। उन्होंने जेसी को दुनिया के पहले ऑल-गर्ल्स लूनर क्यूबसैट मिशन ‘मिशन शक्तिसैट’ के लिए नामांकित किया।

इस वैश्विक प्रतियोगिता के लिए ऑनलाइन कोर्स की समय सीमा शुरू हो चुकी थी, लेकिन मनिमाला जी ने व्यक्तिगत रूप से आयोजकों से संपर्क किया और जेसी सहित अपने स्कूल की 9 छात्राओं को इसमें भाग लेने का एक और अवसर दिलवाया। दुनिया भर के 108 देशों की लगभग 12,000 लड़कियों में से भारत से केवल 20 लड़कियों का चयन हुआ, जिनमें आंध्र प्रदेश से चुनी जाने वाली एकमात्र छात्रा कंडुला जेसी बनीं। मनिमाला जी ने जेसी को सैटेलाइट आर्किटेक्चर, प्रोपल्शन सिस्टम और थर्मोडायनामिक्स जैसे कठिन विषयों की तैयारी के साथ-साथ वैज्ञानिकों के साथ अंग्रेजी में इंटरव्यू देने के लिए भी विशेष रूप से तैयार किया।

मनिमाला जी की देखरेख में संचालित यह अटल टिंकरिंग लैब सरकारी और ग्रामीण पृष्ठभूमि की लड़कियों को आधुनिक तकनीकों, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग और स्पेस साइंस से जोड़कर उनके सपनों को नई उड़ान दे रही है। सरकारी स्कूल की छात्राओं के लिए अंग्रेजी और विज्ञान को सुलभ बनाने के लिए वे तकनीक, डिजिटल मॉड्यूल्स और प्रेजेंटेशन का उपयोग करती हैं। 

शिक्षित करने की अनोखी पहल- तनुश्री दास, पश्चिम बंगाल 
पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर, के कुचलाचटी प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका हैं तनु श्री दास। इन्होंने आदिवासी और आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए ‘मदर ऑफ द ईयर अवार्ड’ की शुरुआत की। गरीबी और अज्ञानता के कारण स्कूल में बच्चे आते ही नहीं थे। इन्होंने शून्य लागत शिक्षण सामग्री और स्कूल पिगी बैंक जैसी अनूठी पहल से शिक्षा को सीधे समुदाय से जोड़ दिया। उनकी माताओं को प्रोत्साहन देना शुरू किया। इनके प्रयासों से 2016 से स्कूल में ड्रॉपआउट रेट शून्य हो गया है। इन्हें भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया गया।

यू-ट्यूब से करती टीचिंग- रश्मि झा, दिल्ली 
रश्मि झा दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले राजनिवास मार्ग स्थित राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय, में गणित की शिक्षिका हैं। वर्ष 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब स्कूल पूरी तरह बंद हो गए थे, तब छात्र ब्लैकबोर्ड की पढ़ाई और गणित जैसे कठिन विषय से दूर न हों, इसके लिए उन्होंने यह कदम उठाया। उन्होंने ‘गणित पाठशाला’ नाम से एक यूट्यूब चैनल शुरू किया।

इसके माध्यम से उन्होंने विशेष रूप से कक्षा 10 के सरकारी स्कूल के बच्चों को गणित पढ़ाना शुरू किया, ताकि छात्र अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी वीडियो देखकर पढ़ सकें। रश्मि ने शॉर्ट वीडियो के जरिए बिल्कुल ब्लैकबोर्ड स्टाइल में गणित के मुश्किल सूत्रों को विजुअल और मजेदार तरीके से पेश किया, ताकि बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार कभी-भी सीख सकें। ऐसे छात्र जिनके पास 24 घंटे इंटरनेट की सुविधा नहीं थी, वे इन वीडियो को डाउनलोड करके ऑफलाइन भी सीख सकते थे। इसके अलावा वे छात्रों को रिवीजन के लिए पीडीएफ नोट्स भी भेजती थीं।
 

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IND vs PAK Women Asia Cup: भारत का अगला मैच पाकिस्तान से, कब-कहां और कितने बजे शुरू होगा मुकाबला?

IND vs PAK Women Asia Cup LIVE streaming: पाकिस्तान को भारत को चुनौती देने के लिए अपनी बल्लेबाजी में बड़े सुधार की जरूरत है. बल्लेबाजी की कमजोरी लंबे समय से टीम की परेशानी रही है. भारत जैसी मजबूत टीम को चुनौती देने के लिए पाकिस्तान को अपनी हैसियत से बेहतर प्रदर्शन करना होगा.

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  Sports

Mike Hesson का बड़ा खुलासा: Rizwan और Imam-ul-Haq को हटाने के फैसले में मेरा कोई हाथ नहीं, PCB पर फोड़ा ठीकरा

पाकिस्तान क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो हार के बाद मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में टीम में किए गए बड़े बदलावों को लेकर अंतरिम लाल गेंद कोच माइक हेसन ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। हेसन ने कहा कि मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा और इमाम-उल-हक को टीम से बाहर करने के फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि जब उन्हें जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया, तब तक ये तीनों खिलाड़ी टीम छोड़कर स्वदेश लौट चुके थे।

बता दें कि इंग्लैंड ने सीरीज के पहले मुकाबले में हेडिंग्ले में पाकिस्तान को पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी इंग्लैंड ने 194 रन से जीत दर्ज की। इन लगातार दो हार के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अब दोनों टीमों के बीच तीसरा और अंतिम टेस्ट 9 सितंबर से एजबेस्टन में खेला जाना है।

इन हार के बाद पाकिस्तान बोर्ड ने टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों के स्तर पर बड़े बदलाव किए। मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा, इमाम-उल-हक, अली उस्मान, आमिर जमाल, मुहम्मद आवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टीम से हटा दिया गया। इसके अलावा मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।

माइक हेसन को इसके बाद अंतिम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की लाल गेंद वाली टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई। बर्मिंघम में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने रिजवान, आगा और इमाम को हटाए जाने के फैसले से खुद को अलग करते हुए कहा कि बोर्ड ने जब उनसे अंतिम टेस्ट की जिम्मेदारी संभालने के बारे में पूछा, तब तक तीनों खिलाड़ी टीम से बाहर किए जा चुके थे और घर लौट रहे थे।

हालांकि हेसन ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी खिलाड़ियों को हटाने और कुछ नए चेहरों को टीम में शामिल करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका थी। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य अंतिम टेस्ट के लिए टीम में बेहतर संतुलन तैयार करना था।

मौजूद जानकारी के अनुसार, हेसन पाकिस्तान की सीमित ओवरों वाली टीम के साथ काम करने के बाद जापान से लौटे थे। जापान में एशियाई खेलों का आयोजन चल रहा है। लाहौर में पाकिस्तान का सीमित ओवरों का प्रशिक्षण शिविर भी हुआ था। इसी दौरान क्रिकेट बोर्ड ने उनसे टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा।

हेसन ने कहा कि अब उनका मुख्य जोर ऐसी गेंदबाजी इकाई तैयार करने पर है जिसमें अलग-अलग तरह के गेंदबाज मौजूद हों। वह टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ियों को भी रखना चाहते हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में योगदान दे सकें। उनके अनुसार, अंतिम टेस्ट में टीम का संतुलन सुधारना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

नई पाकिस्तान टीम में सैम अयूब और अब्दुल्ला फजल जैसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इनके अलावा अराफात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बैग, मोहम्मद इमरान और रजाउल्लाह जैसे ऐसे खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा हैं जिन्हें अभी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करना बाकी है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले ही श्रृंखला गंवा चुका है, इसलिए एजबेस्टन टेस्ट उसके लिए परिणाम से ज्यादा अपनी कमजोरियों को सुधारने का अवसर होगा। लगातार हार के बाद टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को मौका देकर भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करना चाहता है। ऐसे में अंतिम मुकाबले में नए चेहरों के प्रदर्शन और माइक हेसन की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Fri, 04 Sep 2026 21:59:00 +0530

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