200MP कैमरा और 'मक्खन' जैसा स्मूद डिस्प्ले, OnePlus ला रहा 'ऑलराउंडर' फोन
OnePlus Ace 7 स्मार्टफोन बाजार में आते ही तहलका मता देगा। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यह फोन कई हैवी स्पेसिफिकेशन्स पैक करेगा। फोन में 185 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट वाला मक्खन जैसे स्मूद डिस्प्ले मिलेगा। फोन में 200MP कैमरा होने की भी खबर है।
Brent crude price: क्रूड ऑयल की कीमतें 95 डॉलर के पार, महंगे तेल से भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
Brent crude oil price: पश्चिम एशिया में सुलगते संघर्ष और नए सिरे से भड़की हिंसा के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (कच्चा तेल) के दाम आसमान छूने लगे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं। जुलाई की शुरुआत में जो कीमतें करीब 79 डॉलर थीं, वे अब लगभग 20 प्रतिशत तक उछल चुकी हैं, जिससे बाजार में कुछ समय की शांति के बाद राहत का दौर थम गया है।
बीते सप्ताह कच्चे तेल की कीमतें 88 से 97 डॉलर के दायरे में कारोबार करती नजर आईं। 31 अगस्त को ईरान के दक्षिणी तट पर अमेरिकी हमलों और उसके बाद ईरान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई के बाद यह तेजी आई है। इस सैन्य तनातनी ने क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात पर अनिश्चितता के बादल गहरा दिए हैं।
भारत के लिए क्यों चिंता का विषय है महंगा तेल?
भारत अपनी कुल क्रूड ऑयल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसकी वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील है। वित्त वर्ष 2026 में देश का कुल तेल आयात बिल करीब 123 अरब डॉलर रहा था। एक अनुमान के मुताबिक, यदि क्रूड ऑयल की कीमतों में एक डॉलर की भी बढ़ोतरी पूरे सालभर बनी रहती है, तो इससे देश के सालाना आयात बिल में लगभग 18,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।
चालू वित्त वर्ष 2027 के शुरुआती चार महीनों में भारत ने 63.4 अरब डॉलर मूल्य का कच्चा तेल आयात किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 56.5 प्रतिशत अधिक है। यदि ये बढ़ी हुई कीमतें आम उपभोक्ताओं तक पहुंचती हैं, तो इससे देश में महंगाई भड़क सकती है, आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी चौड़ा हो सकता है।
सप्लाई रूट पर संकट और भारत का विकल्प
पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया भारत की कुल क्रूड जरूरतों का 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करता रहा है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जिससे पहले वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता था, के बंद होने से इन सप्लीज में भारी गिरावट आई है।
इस संकट से निपटने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने रूस, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात की दिशा में अपने विकल्प बढ़ाए हैं। बाजार में तेल की उपलब्धता तो है, लेकिन लंबे शिपिंग रूट्स और कुछ क्रूड ग्रेड्स की भारी प्रकृति (Heavier nature) के कारण ढुलाई और प्रोसेसिंग की लागत काफी बढ़ गई है।
देश में लगातार बढ़ रही है ईंधन की मांग
एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं, तो दूसरी तरफ देश के भीतर भी मांग तेजी से ऊपर जा रही है। अगस्त महीने में भारत में पेट्रोल की खपत सालाना आधार पर 7.88 प्रतिशत बढ़कर 3.82 मिलियन टन पर पहुंच गई, जबकि डीजल की मांग 6.46 प्रतिशत की तेजी के साथ 7 मिलियन टन दर्ज की गई। ईंधन की यह बढ़ती खपत आने वाले दिनों में देश की आयात जरूरतों को और ज्यादा बढ़ाएगी।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदम
अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए भारत अब लगभग 41 देशों से तेल की खरीद कर रहा है और नए आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में जुटा है। इसके अलावा, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 84,000 करोड़ रुपए की 'समुद्र मंथन' अपतटीय अन्वेषण (Offshore exploration) योजना पर भी जोर दिया जा रहा है। अनुमान है कि भारत के पूर्वी और पश्चिमी अपतटीय बेसिनों में 5,600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल-समकक्ष हाइड्रोकार्बन की क्षमता मौजूद है।
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