SSC ने जूनियर इंजीनियर के 1,748 पदों पर निकाली भर्ती:एज लिमिट 32 साल, सैलरी 1 लाख 12 हजार तक
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने जूनियर इंजीनियर के 1748 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट ssc.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्ट्रीम के उम्मीदवारों का चयन केंद्र सरकार के प्रमुख विभागों में किया जाएगा। ऑनलाइन फीस जमा करने की आखिरी तारीख 23 सितंबर 2026 रात 11 बजे तक है। करेक्शन विंडो 28 सितंबर 2026 से लेकर 30 सितंबर 2026 तक ओपन रहेगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : संबंधित विषय सिविल, इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल में बीई, बीटेक की डिग्री या 3 साल का इंजीनियरिंग डिप्लोमा। एज लिमिट : सैलरी : 35,400 - 1,12,400 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : ऐसे करें आवेदन : ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक बैंक ऑफ बड़ौदा की कंपनी में 2049 पदों पर भर्ती:ग्रेजुएट्स से लेकर इंजीनियर, सीए को मौका, बिना एग्जाम के होगा सिलेक्शन बैंक ऑफ बड़ौदा की सब्सिडियरी कंपनी बड़ौदा ग्लोबल शेयर्ड सर्विसेज लिमिटेड (BGSSL) ने 2049 पदों पर भर्ती निकाली है। ये नियुक्तियां भारत में कंपनी के अलग-अलग विभागों और केंद्रों के लिए की जाएंगी, जिनमें GIFT सिटी, गांधीनगर सहित अन्य स्थान शामिल हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
UNICEF Online Child Abuse Report: यूनिसेफ की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा; हर 5वां बच्चा हो रहा ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार
डिजिटल दुनिया के बढ़ते दायरे के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक डरावनी सच्चाई सामने आई है। यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाला हर पांचवां बच्चा किसी न किसी रूप में ऑनलाइन यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग या उत्पीड़न की चपेट में आ रहा है।
यह रिपोर्ट दुनिया भर के विभिन्न देशों से एकत्र किए गए डेटा और अध्ययनों के आधार पर तैयार की गई है, जो दर्शाती है कि डिजिटल स्पेस बच्चों के लिए किस तरह खतरनाक बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया और गेमिंग ऐप्स बने साइबर अपराधियों का जरिया
यूनिसेफ की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि साइबर अपराधी बच्चों को निशाना बनाने के लिए मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम्स का सहारा ले रहे हैं।
अपराधी फर्जी पहचान बनाकर या बहला-फुसलाकर बच्चों का विश्वास जीतते हैं और फिर उन्हें अनुचित तस्वीरें भेजने या आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर करते हैं। कई मामलों में बच्चों को डरा-धमकाकर या ब्लैकमेल करके लंबे समय तक उनका शोषण किया जाता है।
जागरूकता की कमी और रिपोर्ट न होना बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन शोषण का शिकार होने वाले अधिकांश बच्चे डर, शर्म या जागरूकता की कमी के कारण इस बात की जानकारी अपने माता-पिता या कानूनी एजेंसियों को नहीं दे पाते हैं। कई मामलों में माता-पिता को भी इस बात का अंदाजा नहीं होता कि उनका बच्चा ऑनलाइन क्या कर रहा है या वह किस तरह के मानसिक दबाव से गुजर रहा है। यही वजह है कि ऐसे मामलों का एक बड़ा हिस्सा सामने ही नहीं आ पाता।
यूनिसेफ ने सरकारों और टेक कंपनियों को दी सख्त सलाह
यूनिसेफ ने दुनिया भर की सरकारों, टेक कंपनियों और नीति निर्माताओं से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की है। संस्था ने टेक कंपनियों से अपने ऐप्स में मजबूत पैरेंटल कंट्रोल, आयु सत्यापन और कंटेंट फिल्टरिंग सिस्टम लागू करने को कहा है। इसके साथ ही, सरकारों से साइबर कानूनों को और सख्त बनाने तथा स्कूलों में बच्चों व अभिभावकों के लिए डिजिटल साक्षरता अभियान चलाने का सुझाव दिया है।
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