इसरो ने जीएसएलवी-एफ 17 ने ईओएस-05 को ऑर्बिट में पहुंचाकर मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया
नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। इसरो ने जीएसएलवी-एफ 17 ने ईओएस-05 को तय कक्षा (ऑर्बिट) में पहुंचाकर अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक्स पर पोस्ट किया, मिशन सफल! जीएसएलवी-एफ 17 ने ईओएस-05 को तय कक्षा में स्थापित करके अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
सफल लॉन्च के बाद इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि जीएसएलवी-एफ 17 व्हीकल ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-05 (जियो इमेजिंग सैटेलाइट) को सफलतापूर्वक और सटीक रूप से उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है। यह श्रीहरिकोटा से 107वां लॉन्च और जीएसएलवी का 19वां मिशन है। जैसा कि आप जानते हैं, जीएसएलवी का पहला प्रक्षेपण जीएसएलवी-डी1 था, जिसमें 1,536 किलोग्राम का पेलोड ले जाया गया था। तब से हमने इसके स्ट्रक्चरल मास को ऑप्टिमाइज़ करके और प्रोपल्शन सिस्टम में सुधार करके इस व्हीकल की परफॉर्मेंस को धीरे-धीरे बेहतर बनाया है। आज, हमने इसी लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल करके 2,367 किलोग्राम वज़न वाले सबसे भारी सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित किया है।
डॉ. वी. नारायणन ने कहा, इसे पूरी तरह से भारत सरकार स्थापित करेगी। हम लॉन्च पैड बनाएंगे, सब कुछ भारत सरकार ही बनाएगी। लेकिन अब इसे ऑपरेट करना है। इसे ऑपरेट करने के दो तरीके हैं। आप बहुत सारे स्थायी कर्मचारी रख सकते हैं और उन्हें इसे ऑपरेट करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरा विकल्प यह है कि हम इसे प्राइवेट प्लेयर्स को सौंप दें और वे इसे ऑपरेट करें।
इसरो प्रमुख ने कहा, अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लगातार भारत की निगरानी और स्कैनिंग करेगा। इसलिए, इसका इस्तेमाल कई कामों के लिए किया जा सकता है। जासूसी शब्द का इस्तेमाल करना बहुत नकारात्मक है। यह सैटेलाइट काम का होगा और इससे मिलने वाला डेटा हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगा।
डॉ. वी. नारायणन ने कहा, गगनयान एक टेक्नोलॉजी-प्रधान मिशन है। इसलिए, हमें व्हीकल की ह्यूमन-रेटिंग करनी होगी, और उसके बाद क्रू एस्केप सिस्टम और एनवायरनमेंटल कंट्रोल सिस्टम को डेवलप करना होगा। अब तक लगभग 8,000 टेस्ट पूरे हो चुके हैं। दूसरे सैटेलाइट मिशन के उलट, इसमें इंसान शामिल हैं, इसलिए इंसानों की सुरक्षा बहुत ज़रूरी है। हमने क्रू वाले मिशन से पहले तीन बिना क्रू वाले मिशन की योजना बनाई है। पहला बिना क्रू वाला मिशन इस साल लॉन्च के लिए तैयार हो रहा है। नतीजों की समीक्षा करने के बाद, हम दो और बिना क्रू वाले मिशन करेंगे, और उसके बाद क्रू वाला मिशन होगा।
इसरो के अनुसार, जीएसएलवी-एफ 17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) का 19वीं मिशन है और जीएसएलवी-एफ के पेलोड फेयरिंग का कॉन्फ़िगरेशन 4 मीटर व्यास वाले ओजाइव (कम्पोजिट) ढांचे का उपयोग किया गया है। जीएसएलवी-एफ 17 व्हीकल ने ईओएस-05 सैटेलाइट को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया है। इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर, एसएचएआर के दूसरे लॉन्च पैड (एसएलपी) से लॉन्च करने की योजना थी। ईओएस-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन स्पेसक्राफ्ट है। यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है।
परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक्स पोस्ट में कहा, अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के लिए एक और बड़ी उपलब्धि! जीएसएलवी-एफ 17/ ईओएस-05 के सफल लॉन्च के लिए इसरो की टीम को बधाई। ईओएस-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है और जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। यह विज़िबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में एडवांस्ड इमेजिंग की सुविधा देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं लगातार नई ऊंचाइयां छू रही हैं और एक ग्लोबल स्पेस पावर के तौर पर हमारी स्थिति मजबूत हो रही है।
--आईएएनएस
ओपी/एएस
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अब ईरान के खिलाफ ये कदम उठाएगा अमेरिका? उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने किया खुलासा
Vice President JD Vance: अमेरिका ईरान के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है. कई दिनों की शांति के बाद दोनों देशों के बीच सीधी जंग शुरू हो गई है. इसी बीच अमेरिका का नया बयान सामने आया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के खिलाफ मौजूद विकल्पों के बारे में बताया है. साथ ही होर्मुज को लेकर भी अमेरिका ने चिंता जताई है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा है कि ईरान से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन के पास कई विकल्प खुले हैं. इनमें आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक कदमों के साथ-साथ गुप्त तरीके से दबाव बनाने के विकल्प भी शामिल हैं. वाशिंगटन डीसी में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान वैंस ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है. उन्होंने साफ किया कि प्रशासन ईरान को लेकर अपनी आगे की रणनीति सार्वजनिक नहीं करेगा.
Vice President JD Vance on Iran:
— Tabz (@TabzLIVE) September 3, 2026
There are a lot of additional tools that we have at our disposal. Some of those the President will use and some of them he won't, but I'm not going to advertise exactly how we're going to engage with the Iranians in the months and years to come… pic.twitter.com/z96DlT370c
अमेरिका क्यों नहीं कर रहा खुलासा?
वैंस ने कहा कि अगर अमेरिका पहले ही अपनी सभी योजनाओं का खुलासा कर देगा, तो इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फैसले लेने की क्षमता सीमित हो सकती है. उन्होंने कहा कि हमारे पास कई अतिरिक्त विकल्प मौजूद हैं. इनमें से कुछ का इस्तेमाल राष्ट्रपति करेंगे और कुछ का नहीं. उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति के पास आर्थिक, सैन्य, कूटनीतिक और गुप्त दबाव समेत कई तरह के कदम उठाने के विकल्प मौजूद हैं.
क्या है मकसद?
वैंस ने आगे कहा कि अमेरिकी प्रशासन की रणनीति का एक मकसद बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट को रोकना भी है. उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में अभी भी वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रहा है. वैंस ने कहा कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में इस तरह की गतिविधियां जारी रखता है, तो दुनिया को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा और तेल-गैस की सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिकी सेना की कार्रवाई का बचाव किया.
गुंजाइश बनाए रखनी की कही बात
उपराष्ट्रपति वैंस ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई करनी है, इसका फैसला करने में पूरी आजादी रखना चाहता है. उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि आने वाले महीनों में अमेरिका ईरान के खिलाफ कौन से कदम उठा सकता है. वैंस ने कहा कि अमेरिका अपनी पूरी रणनीति पहले से सार्वजनिक नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि अगर सरकार पहले ही बता दे कि वह क्या करने वाली है, तो इससे उसकी कार्रवाई की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
वैंस ने कहा कि इन विकल्पों को तैयार रखने का एक कारण यह है कि कोई भी समझदार व्यक्ति लाखों अमेरिकियों के सामने खड़े होकर यह नहीं बताएगा कि सरकार वास्तव में क्या करने की योजना बना रही है. वैंस का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच करीब सात महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने का कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है. हालांकि, ऐसी अटकलें भी हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध खत्म करने की घोषणा करने पर विचार कर सकते हैं.
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