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Aaj Ka Mausam: अगले 9 घंटे 20 राज्यों के लिए भारी, होगी मूसलाधार बारिश; IMD ने जारी किया अलर्ट

देश भर में मानसून अब तक एक्टिव है. देश के अधिकांश हिस्से बाढ़ की चपेट में हैं, बावजूद इसके लोगों को अभी आंधी और बारिश से राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है. मौसम विभाग ने एक बार फिर से कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के अनुसार, अगले 9 घंटे देश के 20 राज्यों के लिए भारी हो सकते हैं, जिसमें दिल्ली से लेकर यूपी और बिहार तक शामिल हैं. मौसम विभाग ने इस दौरान, 70 से 72 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी आशंका जताई है. 

IMD ने लोगों को दी ये सलाह

मौमस विभाग ने नदी और समुद्र किनारे रहने वाले मछुआरों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी है. इसके अलावा, पहाड़ी राज्यों में रहने वाले और पहाड़ी राज्य इस वीकेंड घूमने का प्लान बना रहे लोगों से भी मौसम विभाग ने सतर्कता बरतने के लिए कहा है. भारी बारिश के चलते किसानों की फसलों को नुकसान भी हो सकता है. IMD ने चेतावनी दी है कि मूसलाधार बारिश की वजह से भूस्खलन, पेड़ों के गिरने और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है. आइये जानते हैं, देश के विभिन्न राज्यों में कैसा रहेगा आज का मौसम…

देश के 20 राज्यों भारी बारिश-आंधी की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार, 4 सितंबर को देश के 20 राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें दिल्ली, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, असम, नागालैंड, तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है. इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी कहर बरपा सकती है. 

 

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Krishna Janmashtami 2026: आज देशभर में धूमधाम से मनाई जा रही जन्माष्टमी, जानें उनके जन्म की कहानी और अचूक उपाय

Krishna Janmashtami 2026: आज यानी 4 सितंबर 2026 शुक्रवार को जन्माष्टमी मनाई जा रही है. हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर जन्माष्टमी मनाई जाती है. भक्त इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का पूजन किया जाता है. रात के समय उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान कृष्ण सृष्टि के कर्ता-धर्ता विष्णु के आठवें अवतार हैं. उनका जन्म अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. आज उनका 5253 वां जन्मोत्सव मनाया जाता है. इसलिए, रोहिणी नक्षत्र में ही उनकी पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है.

आज भगवान का 5253 वां जन्मदिन

द्रिक पंचांग के अनुसार, आज भगवान श्रीकृष्ण का 5253 वां जन्मदिन मनाया जा रहा है. शोधकर्ताओं और खगोलीय घटनाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म लगभग 3228 ईसा पूर्व में हुआ था. यानी कि आज से करीब 5000 साल पहले. जिस समय उनका जन्म हुआ था चंद्रमा वृषभ राशि में थे और वार बुधवार का था.

ये भी पढ़ें- Krishna Janmashtami Kab Hai: आज या कल, कृष्ण जन्माष्टमी कब है? जानें सही तिथि और शुभ चौघड़िया मुहूर्त

भगवान कृष्ण का जन्म कहां हुआ था?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था. उनका जन्म मथुरा में कंस महल में कारागार में हुआ था. दरअसल, कंस जो श्रीकृष्ण के मामा थे, उन्होंने अपनी बहन और उनके पति को बंदी बनाकर जेल में रखा था. ऐसी आकाशवाणी हुई थी कि जब देवकी और वासुदेव की आंठवी संतान होगी तो वह कंस की मृत्यु का कारण बनेगी. इसलिए, कंस ने विवाह के तुरंत बाद ही देवकी और वासुदेव को जेल में डाल दिया था. वहां उनकी सात संतानों की हत्या अपने हाथों से कंस ने खुद की और आठवीं संतान का जन्म हुआ. कृष्ण का जन्म होने के बाद पृथ्वी पर मानो समय रुक गया हो, भारी वर्षा हुई जिससे पूरा गोकुल डूब गया था. इस भयावह स्थिति में वासुदेव ने अपने पुत्र को वृंदावन में अपने मित्र नंद को सौंपा. इसलिए, जन्म लेते ही कृष्ण जी यशोदा मैया की गोद में पहुंच गए. 

उनका पूरा बचपन वृंदावन में बीता और जब वे 11 वर्ष के हुए तो कंस का वध करने मथुरा पहुंचे. वहां कंस ने धनुश यज्ञ का आयोजन किया था. इस समय कान्हा ने वृंदावन छोड़ दिया. मथुरा के रंगमंच पर कंस के वध से पहले मल्ल युद्ध में श्रीकृष्ण ने शक्तिशाली पहलवानों चाणूर और मुष्टिक का भी अंत किया था. इसके बाद कंस को उसके सिंहासन से खींचकर उसका वध किया और मथुरा को उसके अत्याचारों से मुक्त करवाया. इसके बाद वे उज्जैन में गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने चले गए थे. वहां उन्होंने 64 दिनों में ही 64 कलाओं का पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लिया था. आश्रम से मथुरा लौटने के बाद भगवान कृष्ण का जीवन पूरी तरह से राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल और लोक-कल्याण के कार्यों में लग गया था. इसके बाद समुद्र के बीच द्वारका नगरी का निर्माण हुआ और वहां यदुवंशी प्रजा को सुरक्षित स्थानांतरित कर दिया. द्वारका बसने के बाद रुक्मिणी हरण हुआ और उनका विवाह संपन्न हुआ.

आज पूजा करने का शुभ मुहूर्त

पहला मुहूर्त- सुबह 5:46 से 10:26 तक

दूसरा मुहूर्त- दोपहर 12:05 से लेकर 1 बजकर 33 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:36 से लेकर दोपहर 12:24 तक

चौथा मुहूर्त- शाम 4:41 से लेकर 6 बजकर 14 मिनट तक

पांचवां मुहूर्त- रात 9:07 से लेकर 10 बजकर 33 मिनट तक

छठा मुहूर्त- रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर सुबह 4:19 बजे 

इसके अलावा, आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:26 से लेकर 5 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. आज राहुकाल का समय सुबह 10:39 से लेकर दोपहर 12:13 मिनट तक रहेगा.

आज करें ये जरूरी उपाय

  • तुलसी का भोग- आज कान्हा को भोग में तुलसी पत्र जरूर अर्पित करें. कहा जाता है कि इन पत्रों के बिना वह भोग स्वीकार नहीं करते हैं.
  • तुलसी की परिक्रमा- जन्माष्टमी की शाम को तुलसी के पौधे के सामने देसी घी का दिया जलाना चाहिए और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए. इसके बाद आप पौधे की 11 या 21 बार परिक्रमा करें.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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  Sports

BCCI का Cricket Expansion प्लान: Japan में पहली बार भिड़ेंगे दोनों देश, 75 साल की दोस्ती का ऐतिहासिक क्षण

भारत और जापान के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर क्रिकेट के मैदान पर एक ऐतिहासिक मुकाबला देखने को मिलेगा। बीसीसीआई ने घोषणा की है कि दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें पहली बार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में आमने-सामने उतरेंगी। यह एकमात्र बीस ओवर का अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 22 सितंबर को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में खेला जाएगा।

बता दें कि यह मुकाबला केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण और कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के समारोह का हिस्सा है। दोनों देशों के बीच क्रिकेट का यह पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होने के कारण इसे खास माना जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह आयोजन खेल के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाने की व्यापक पहल से जुड़ा है। भारत द्वारा वर्ष 2036 के ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पहल को खेल सहयोग के नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

यह पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान बने व्यापक सहयोग के विचार से आगे बढ़ी है। इसके तहत भारत और जापान खेल के क्षेत्र में आपसी संपर्क, खिलाड़ियों के आदान-प्रदान और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों के बीच खेल आधारित इस कार्यक्रम को “खेल 75” पहल की शुरुआती कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने इस फैसले को क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उनके अनुसार, भारतीय और जापानी पुरुष टीमों का जापान में विशेष मुकाबले के लिए एक साथ आना ऐतिहासिक क्षण है। इससे भारतीय टीम को एक नए क्रिकेट क्षेत्र में खेलने का मौका मिलेगा और जापान के साथ-साथ पूर्वी एशिया के अन्य हिस्सों में भी क्रिकेट को नए दर्शकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

देवजीत सैकिया ने कहा कि भारत और जापान के बीच मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर क्रिकेट का जुड़ना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इस मुकाबले को संभव बनाने में जापान क्रिकेट संघ के प्रयासों की भी सराहना की है।

गौरतलब है कि बीसीसीआई लंबे समय से क्रिकेट के विस्तार को पारंपरिक क्रिकेट देशों तक सीमित न रखने की बात करता रहा है। दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट संगठनों में शामिल होने के नाते भारतीय बोर्ड का मानना है कि खेल को नए देशों और नए दर्शकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसकी है। बोर्ड ने संकेत दिया है कि वह आने वाले समय में जापान क्रिकेट संघ के साथ मिलकर वहां क्रिकेट को मजबूत करने के लिए काम करेगा।

जापान क्रिकेट संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नाओकी मियाजी ने भी भारतीय टीम के आगमन को अपने देश के क्रिकेट इतिहास का बड़ा अवसर बताया है। उनके अनुसार, मौजूदा विश्व विजेता भारतीय टीम का जापान आना जापानी क्रिकेट के लिए यादगार क्षण होगा। उन्होंने कहा कि यह मुकाबला स्थानीय लोगों को क्रिकेट को करीब से समझने और इस खेल से जुड़ने का अवसर देगा।

जापान में क्रिकेट अभी उतना लोकप्रिय नहीं है जितना बेसबॉल, फुटबॉल या अन्य खेल हैं, लेकिन वहां इस खेल को विकसित करने की कोशिश लगातार की जा रही है। भारतीय टीम की मौजूदगी से जापान में क्रिकेट को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग और क्रिकेट फैंस भी इस मुकाबले को देखने पहुंच सकते हैं।

कुल मिलाकर 22 सितंबर का यह मुकाबला केवल जीत और हार तक सीमित नहीं रहेगा। यह भारत और जापान के बीच 75 वर्षों की साझेदारी, दोस्ती और आपसी सहयोग का प्रतीक भी बनेगा। साथ ही यह क्रिकेट को नए देशों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है और दोनों देशों के खेल संबंधों के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही हैं।
Fri, 04 Sep 2026 19:54:00 +0530

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