एक साल में 4 बार हो सकती है NEET UG:तनाव कम होगा, कोचिंग पर निर्भरता घटेगी - टास्क फोर्स कमेटी को मिले सुझाव
NEET UG 2026 में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के चलते 2027 में जो बदलाव किए जा रहे हैं, उनमें हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन भी है। इसके अध्यक्ष नंदन नीलेकणि हैं। टास्क फोर्स ने अब आम लोगों और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगना शुरू कर दिया है। केंद्र ने इसके लिए सुझाव देने की आखिरी तारीख 13 सितंबर 2026 रखी है। इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि इस हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। वे केवल NEET नहीं, बल्कि NTA समेत देश की प्रमुख परीक्षाओं की सुरक्षा, डिजाइन, संचालन और गवर्नेंस में सुधार के लिए लोगों से सुझाव मांग रहे हैं। साल में 4 बार टेस्ट से 90% समस्याओं का समाधान इन्हीं सुझावों के चलते शिक्षाविद और बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल का कहना है कि अगर उम्मीदवार को एक से डेढ़ साल में 4 बार एंट्रेंस टेस्ट में बैठने का मौका मिले और उसके बेस्ट स्कोर को माना जाए तो 90% तक समस्याओं का समाधान हो सकता है। डॉ. मित्तल ने कहा कि वह उच्च स्तरीय समिति से मिलने का समय मांगेंगे और कमेटी के सामने अपनी बात रखेंगे। उनका कहना है कि NEET UG के लिए छात्र 10वीं के बाद या कुछ तो पहले से ही तैयारी करने लग जाते हैं। इतनी मेहनत के बाद उनका एडमिशन केवल एक दिन में तीन घंटे की परीक्षा पर निर्भर करता है। ये छात्र के मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण है क्योंकि उसे लगता है कि अगर उस दिन वह बेहतर नहीं कर पाया तो करियर खत्म हो जाएगा। इसी चीज का फायदा एग्जाम में गड़बड़ी करने वाले लोग भी उठाते हैं। अगर NEET UG देने का मौका साल में चार बार मिले तो उससे साल में एक बार होने वाली एग्जाम पर निर्भरता कम होगी। एक ही टेस्ट पर निर्भर रहेंगे तो परीक्षा को लेकर समस्या का पूरी तरह से समाधान नहीं हो सकता। जहां तक एग्जाम फीस की बात है तो उसको कम से कम रखा जा सकता है। सुझाव जुटाने में लगी है कमेटी अभी NEET UG 2027 का नया पैटर्न घोषित नहीं हुआ है। फिलहाल कमेटी सुझाव जुटा रही है और अक्टूबर के आसपास नया पैटर्न तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। ये खबर भी पढ़ें दिल्ली के बाद दूसरा आंदोलन जब सरकार ने मानी मांगें:जंतर - मंतर पर छात्रों की जीत से बढ़े हौसले, झारखंड में मांगें पूरी होने के बाद खूब नाचे कार्यकर्ता हाल ही में हुए छात्र आंदोलन में यह तीसरा आंदोलन है जिसमें सरकार ने छात्रों की मांगे मान ली हैं। इसके चलते BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) को एक ही चरण में करने का फैसला किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें
बाढ़ में प्रिंसिपल ने 1643 बच्चों को बचाया:आंखों के सामने स्कूल का पुल ढहा, अब तक 900 से ज्यादा मौतें, 4 हजार से ज्यादा लापता
नेपाल-तिब्ब्त में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ में अब तक 919 लोगों की मौत हो चुकी है। जिसमें सिर्फ नेपाल में 903 मौते हुई हैं और 4,200 से ज्यादा लोग लापता हैं। जहां एक ओर अब तक मौत का आंकड़ा 900 के पार हो गया है, वहीं नेपाल में एक प्रिंसिपल ने अपनी सूझबूझ से करीब 1600 स्कूली बच्चों की जान बचाई। त्रिशूली घाटी के हायर सेकेंडरी की घटना उत्तरी-मध्य नेपाल की त्रिशूली घाटी में बने त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में 1600 बच्चे पढ़ते हैं। 26 अगस्त को जब बाढ़ आई तब ये स्कूल खुला हुआ था। 900 बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे और सब कुछ सामान्य था। तभी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी को उनके एक दोस्त ने बताया कि बाढ़ आ गई है और पानी ने ऊपर की तरफ बसे गांवों को भी अपनी चपेट में ले चुका है। राजेंद्र ने तुरंत फैसला लिया, स्कूल की घंटी बजाई प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी खबर मिलते ही तुरंत हरकत में आए और उन्होंने तुरंत पता किया कि अभी कितनी स्कूल बसें स्कूल आ चुकी हैं और कितनी आनी बाकी हैं। थोड़ी देर में ही उनके पास लिस्ट आई कि अभी 700 बच्चे या तो पैदल या फिर स्कूल बस से स्कूल की तरफ आना बाकी हैं। तभी तुरंत राजेंद्र ने सभी स्कूल ड्राइवर को फोन किया और बसों को स्कूल न लाने का आदेश दिया। हालांकि ये स्कूल नदी से 200 की फीट की ऊंचाई पर बना था लेकिन राजेंद्र ने फिर भी कोई देरी नहीं की। आंखों के सामने स्कूल का पुल ढहा इसी बीच कुछ पेरेंट्स ने भी प्रिंसिपल को फोन किया कि बाढ़ का पानी स्कूल की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रिंसिपल राजेंद्र ने स्कूल की तरफ आती बस को तुरंत वापस भेज दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, बस ने मुड़ते ही स्कूल के सामने के पुल को जैसे ही पार किया, पुल बह गया। तब तक स्कूल में चीख-पुकार मच गई और बच्चे-टीचर सब डरे हुए थे। प्रिंसिपल ने सूझबूझ से 1600 से ज्यादा बच्चों को बचाया प्रिंसिपल ने पल के बहते ही सभी टीचर्स को बच्चों को लेकर पहाड़ी की ऊंचाई पर जाने को कहा। सभी बच्चों को पैदल पहाड़ी के ऊपर पहुंचाया गया। सारे बच्चों को भेजने और स्कूल को दोबारा चेक करने के बाद वो भी पहाड़ी की तरफ चढ़े। इस तरह प्रिंसिपल ने सभी बच्चों, टीचर्स और कर्मचारियों की जान बचा ली। स्कूल में कुल उस समय कुल 1644 लोग थे, जिनमें से 1643 लोग बचा लिए गए। सिर्फ एक सोशल हिस्ट्री के टीचर सैंटोस परियार की मौत हो गई। वो बाढ़ में बह गए। भारत से मदद की उम्मीद राजेंद्र ने बताया कि हमारे ऊपर पहुंचते ही 30 सेकेंड में स्कूल ढह गया था। हमने सभी बच्चों को उनके पेरेंट्स तक पहुंचाया। साथ ही उन्होंने बताया कि अभी जब तक उन्हें कोई मदद नहीं मिलती वे बच्चों को नहीं पढ़ा सकेंगे। क्योंकि स्कूल पूरी तरह खत्म हो गया है और कनेक्टिविटी ब्रिज भी टूट चुका है। राजेंद्र खुद भी इसी स्कूल से पढ़ें हैं और उन्होंने भारत से मदद की अपील की है। उन्होंने बताया कि जब नेपाल में भूकंप आया था, तब भारत ने इस स्कूल को दोबारा बनाने में मदद की थी और एक बस भी डोनेट की थी। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें.. 31 अगस्त के करेंट अफेयर्स:कैदियों को जेल के बाहर जाकर काम करने की छूट मिलेगी, शशिधर जगदीशन HDFC बैंक के CEO का पद छोड़ेंगे आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- पूरी खबर पढ़ें..
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