2 करोड़ में बनी हनुमान अंश ने कमाए 42 करोड़:टॉक्सिक हटाकर इसे स्क्रीन दी गईं, जय संतोषी मां के साथ यही हुआ; जानिए एक्सपर्ट की राय
इन दिनों तीन बड़ी फिल्में आवारापन 2, टॉक्सिक और बंटवारा 1947 सिनेमाघरों में हैं। तीनों ही फिल्मों में बड़ी स्टारकास्ट है, किसी में सनी देओल, किसी में केजीएफ स्टार यश और एक में इमरान हाशमी। बॉक्स ऑफिस क्लेश में आवारापन 2 और टॉक्सिक आगे निकल गईं और बंटवारा 1947 पीछे रह गई। इसी बीच एक लड़की का सिनेमाघरों में खड़े रोते हुए वीडियो वायरल हो गया। हर किसी ने माना की लड़की इन तीनों में से कोई एक फिल्म की टिकट न मिलने से भावुक हो गई। लेकिन पूछे जाने पर उसने कहा- मैं फिल्म हनुमान अंश देखने आई थी, लेकिन टिकट नहीं मिले। हैरानी की बात है कि जहां टॉक्सिक जैसी 500-1000 करोड़ में बनी फिल्मों के सिनेमाघर खाली पड़े हैं, वहां महज 2 करोड़ में बनी हनुमान अंश हाउसफुल कैसे हुई। इस फिल्म के हीरो का न तो इससे पहले किसी ने नाम सुना और न ही डायरेक्टर का। फिल्म का न तो भव्य प्रमोशन किया गया और न ही इसके फर्स्ट लुक, टीजर और ट्रेलर की कोई खबर थी। इन्हें फिल्म के ही सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट किया गया। नीम करोली बाबा पर बनी ये फिल्म शुरुआती 2 हफ्तों तक कोई कमाई नहीं कर सकी, लेकिन चौथे हफ्ते कुछ ऐसा हुआ कि टॉक्सिक जैसी बड़ी फिल्म से क्लैश के बावजूद इसने 800 प्रतिशत मुनाफा कमाते हुए 42 करोड़ का कलेक्शन कर लिया। बड़ी-बड़ी फिल्में हटाकर अब इसे स्क्रीन्स दी जा रही हैं। टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी इसकी बुकिंग ज्यादा हैं। कम बजट की इस फिल्म की सक्सेस से कई बड़े सवाल खड़े होते हैं। पहला सवाल- आखिर फिल्म ने बिना प्रमोशन ऐसी कमाई कैसे की? दूसरा सवाल- फिल्म दर्शकों को इतना पसंद क्यों आ रही है? तीसरा सवाल- बड़ी फिल्मों से टक्कर के बावजूद इसे स्क्रीन्स कैसे मिलीं? जानिए इन तीन बड़े सवालों के जवाब ट्रेड एक्सपर्ट से, साथ ही जानिए कैसे 50 साल पहले शोले से क्लैश के बावजूद कैसे जय संतोषी मां ने बनाया इतिहास- 50 साल पहले जय संतोषी मां के साथ भी ऐसा ही हुआ था, शोले से थी टक्कर आज से 50 साल पहले 15 अगस्त 1975 को अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र की फिल्म शोले रिलीज हुई। बड़े बजट, बड़ी स्टारकास्टिंग और बड़े डायरेक्टर रमेश सिप्पी की इस फिल्म पर हर किसी की नजरें थीं। कोई बड़ा फिल्ममेकर इस फिल्म के आसपास अपनी फिल्में रिलीज नहीं करना चाहता था। लेकिन इस फिल्म के साथ ही 25 लाख में बनी धार्मिक फिल्म जय संतोषी मां रिलीज की गई। फिल्म में कोई टॉप एक्टर नहीं था, इसके बावजूद फिल्म ऐसी चली कि इसने 5 करोड़ रुपए का ऐतिहासिक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया। जहां-जहां फिल्म 'जय संतोषी मां' रिलीज हुई, वहां-वहां ‘शोले’ की कमाई पर असर पड़ा। लोग चप्पल उतारकर सिनेमाघरों में जाते और स्क्रीन की आरती उतारते थे। जल्द ही ये हिंदी सिनेमा की सबसे कामयाब अध्यात्मिक फिल्मों में शामिल हो गई। इसके गाने, मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की और जय संतोषी मां आज भी सुने जाते हैं। सवाल-1: कैसे छोटे बजट की फिल्म ने कमाए 42 करोड़ रुपए? ट्रेड एक्सपर्ट तरण आदर्श ने फिल्म की कमाई पर कहा- ‘अगर आप कलेक्शन देखेंगे तो पहले दिन से लेकर अब तक, खासकर थर्ड वीक और चौथे वीकेंड में वो ऐतिहासिक है। ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।’ 'कंटेंट तो है ही, लेकिन 'वर्ड ऑफ माउथ' से फिल्म को फायदा मिला। अगर नेगेटिव पब्लिसिटी होती है, तो दूसरे-तीसरे दिन फिल्म पर असर दिखता है, लेकिन अगर रिव्यू पॉजिटिव हैं, तो फिल्म चल जाती है। यही हनुमान अंश के साथ हुआ। दूसरे वीक में ये फिल्म उतरने वाली थी। सिर्फ 40 लाख का कलेक्शन था। पहले हफ्ते भी कुछ खास कलेक्शन नहीं था।' सवाल-2: बड़ी फिल्मों से क्लैश के बावजूद हनुमान अंश को स्क्रीन्स कैसे मिलीं? 7 अगस्त को जब फिल्म हनुमान अंश रिलीज हुई, तो इसे चुनिंदा स्क्रीन्स मिलीं। 14 अगस्त को आवारावन 2 और बंटवारा 1947 आने से फिल्म की स्क्रीन्स और कम हो गईं। फिल्म की कमाई भी खास नहीं हो रही थी, तो इसे सिनेमाघरों से हटाया जाने लगा। लेकिन फिल्म अब भी कई सिनेमाघरों में है। इसकी वजह क्या थी, सवाल पूछे जाने पर तरण आदर्श कहते हैं, ‘फिल्म के प्रोड्यूसर्स ने डिस्ट्रीब्यूटर्स से रिक्वेस्ट की कि कैसे भी हमारी फिल्म थर्ड वीक में चलाओ। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कहा कि टॉक्सिक आ रही है, फिल्म वैसे भी उतार दी जाएगी। लेकिन प्रोड्यूसर्स ने कहा- प्लीज इसे कैसे भी चलाइए।’ टॉक्सिक हटाकर हनुमान अंश को दिए जा रहे हैं शोज हनुमान अंश 7 अगस्त को रिलीज हुई। इसे पहले दिन 300 से ज्यादा शोज मिले। 14 अगस्त को आवारापन 2 और बंटवारा 1947 रिलीज हुई, जिनकी वजह से फिल्म महज 29-30 शोज में सिमटकर रह गई। दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर सकीं, जिसके बाद 22 अगस्त से फिल्म को ज्यादा शोज दिए जाने लगे। 25 अगस्त को फिल्म को 1847 स्क्रीन्स मिलीं, लेकिन 26 अगस्त को यश की फिल्म टॉक्सिक आने से इसे कई सिनेमाघरों से हटा दिया गया। पहले दिन टॉक्सिक को मिले नेगेटिव रिव्यू के चलते हनुमान अंश को ज्यादा स्क्रीन्स दी जाने लगीं। मौजूदा समय में फिल्म देशभर के 5363 स्क्रीन्स पर है। 24 दिन पहले आई इस फिल्म को 5 दिन पहले आई टॉक्सिक से भी ज्यादा स्क्रीन्स मिले हैं। फिल्म के तीन बड़े चेहरों के बारे में- डायरेक्टर- विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। ये उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2012 की वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। वह टीवी सीरीज और फिल्मों के डायलॉग राइटर के तौर पर काम कर चुके हैं। एक्टर- शोभिनव सत्या एक्टर शोभिनव सत्या ने हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार निभाया है। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई की है। एक्टिंग के साथ वह असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘महापौर’, ‘CID’, ‘रागिनी एमएमएस’ और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। एक्टर- चंदन के.आनंद चंदन आनंद ने फिल्म में लीड रोल निभाया है। इससे पहले वो कई फिल्मों और टीवी शोज में साइड रोल कर चुके हैं। वह आलू चाट, पार्च्ड, लव आज कल, गुंजन सक्सेना, फाइटर, होमबाउंड जैसी फिल्मों के अलावा टीवी शो बैरिस्टर बाबू, ये प्यार न होगा कम, मीत जैसे दर्जनों शोज कर चुके हैं। सवाल-3: क्यों पसंद की जा रही है हनुमान अंश? फिल्म की कामयाबी में सोशल मीडिया का अहम रोल: फिल्म से जुड़े वीडियोज लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फिल्म के कई सीन, नीम करोली बाबा के असल वीडियोज से हुबहू मेल खाते हैं, इसके वीडियोज लगातार सामने आ रहे हैं। सिनेमाघरों से फैंस के वीडियो भी चर्चा में हैं, जिसमें वह भावुक होते और स्क्रीन के सामने हाथ जोड़े नजर आ रहे हैं। हाउसफुल शोज दिखाए जाने से भी दर्शकों के मन में फिल्म को लेकर उत्सुकता है। फिल्म एक ऐसे सब्जेक्ट पर बनी, जिसमें लोगों की रुचि, लेकिन जानकारी सीमित: ये फिल्म नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनी है। उनके भक्त दुनियाभर में हैं। उनके कैंची धाम आश्रम में सालाना हजारों लोग पहुंचते हैं। उनकी जिंदगी पर अब तक कई बुक लिखी गई हैं और डॉक्यूमेंट्री बनी हैं, हालांकि ज्यादातर इंग्लिश में हैं, जिसे आम जनता कम ही जानती है। फिल्म की सादगी और फैक्ट्स: फिल्म हनुमान अंश को बेहद सादगी से फैक्चुअल बनाया गया है। फिल्म को पसंद किए जाने का एक कारण ये भी है कि इसे कमर्शियली नहीं बनाया गया है। डायरेक्टर ने खुद एक इंटरव्यू में दावा किया है कि इस फिल्म को जानकारी मात्र के लिए बनाया गया है, न कि मुनाफे के लिए। एक वजह यह भी है कि फिल्म को भक्तों और दर्शकों का प्यार मिल रहा है। फिल्म का धार्मिक जुड़ाव, एक्टर ने संत की तरह जिए कई महीने जिस समय ये फिल्म बननी शुरू हुई थी, तब फिल्ममेकर्स प्रेमानंद महाराज के पास गए थे। उन्होंने प्रेमानंद महाराज से फिल्म पर सुझाव मांगा था। जिस पर उन्हें सलाह दी गई कि एक्टर्स को संतों की तरह जीना चाहिए। सावधानी से जीवन यापन करना चाहिए और शाकाहारी खाना चाहिए। फिल्म के लीड एक्टर्स ने इसका पालन किया। नीम करौली बाबा से जुड़े चर्चित किस्से- ट्रेन से उतरे तो आगे नहीं बढ़ी ट्रेनः कहा जाता है कि वे एक बार ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। उन्हें नीचे उतार दिया गया तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बाद में उन्हें वापस बुलाया गया और ट्रेन चल पड़ी। यह एक भक्तिपरक कथा है, जिसका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं है। नीम करोली बाबा से मिलने पहुंचे थे स्टीव जॉब्सः 1974 में 19 साल के स्टीव जॉब्स भारत आए थे। उनका मकसद पर्यटन नहीं बल्कि आध्यात्मिक खोज था। वे अपने दोस्त डैन कोटके के साथ भारत आए और नीम करौली बाबा से मिलने के लिए कैंची धाम पहुंचे। लेकिन यहां उन्हें पता चला कि बाबा का सितंबर 1973 में निधन हो चुका था। जॉब्स फिर भी भारत में करीब सात महीने रहे। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को करीब से समझने की कोशिश की। बाद में उन्होंने इस यात्रा को अपने जीवन पर गहरा असर डालने वाला अनुभव माना। मार्क जुकरबर्ग भी मिलने पहुंचे थेः 2015 में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भारत आए और कैंची धाम गए। उन्होंने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया था कि जब फेसबुक मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत जाकर उस मंदिर/आश्रम को देखने की सलाह दी थी, जहां वे स्वयं कभी गए थे। हॉलीवुड एक्ट्रेस थीं नीम करोली बाबा से प्रेरितः हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स ने भी नीम करौली बाबा से प्रभावित होने की बात कही है। उनके अनुसार, उन्होंने बाबा की एक तस्वीर देखी और उन्हें उनके प्रति एक गहरा आकर्षण महसूस हुआ। अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट ने लिखी बुकः अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट भारत आए और नीम करौली बाबा के शिष्य बने। बाबा ने उन्हें राम दास नाम दिया। इसके बाद राम दास अमेरिका लौटे और उन्होंने पश्चिमी दुनिया में बाबा की शिक्षाओं और भारतीय आध्यात्मिक विचारों को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी प्रसिद्ध किताब ‘बी हेयर नाऊ’ ने लाखों लोगों को ध्यान, योग और भारतीय आध्यात्मिक विचारों से परिचित कराया।
परिवार के रक्षाबंधन सेलिब्रेशन में नहीं पहुंचे गोविंदा:कृष्णा अभिषेक ने गोविंदा के बच्चों संग मनाया त्योहार; सुनीता आहूजा शामिल हुईं
एक्टर और कॉमेडियन कृष्णा अभिषेक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर रक्षाबंधन सेलिब्रेशन की फोटो और वीडियो शेयर किए हैं। इसमें वे अपनी बहन आरती सिंह के साथ मामा गोविंदा के बच्चों टीना आहूजा और हर्षवर्धन आहूजा संग रक्षाबंधन मनाते नजर आ रहे हैं। इस सेलिब्रेशन में गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा भी शामिल हुईं, लेकिन गोविंदा कहीं नजर नहीं आए। यह सेलिब्रेशन ऐसे समय में सामने आया है जब गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता के बीच पिछले कुछ समय से अनबन और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के आरोपों को लेकर विवाद चल रहा है। मजेदार अंदाज में बांधी राखी, बैंकॉक ट्रिप का किया जिक्र सोशल मीडिया पोस्ट में कृष्णा ने सेलिब्रेशन की कई झलकियां दिखाई हैं। एक वीडियो में टीना, कृष्णा को राखी बांधते हुए 'भैया मेरे राखी के बंधन को' गाना गाती नजर आ रही हैं, जिसे सुनकर सभी हंसने लगते हैं। इस पर कृष्णा मजाक में कहते हैं कि अगली बार बैंकॉक की टिकट चाहिए। वहीं दूसरे वीडियो में आरती सिंह अपने छोटे भाई हर्षवर्धन को राखी बांधकर उनका आशीर्वाद लेती दिख रही हैं। फोटो में चारों बच्चे सुनीता आहूजा के साथ पोज देते नजर आ रहे हैं। अफेयर के आरोपों से शुरू हुआ दोनों का विवाद गोविंदा और सुनीता के बीच हालिया विवाद तब शुरू हुआ जब गोविंदा को उनकी को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखा गया था। इसके बाद पैपराजी से बातचीत में सुनीता ने गोविंदा पर तंज कसते हुए उन्हें कोमल का 'शुगर डैडी' कह दिया था। इस बयान पर गोविंदा ने नाराजगी जताई थी और सुनीता को अपनी सीमा में रहने की सलाह दी थी। इसके बाद से दोनों के बीच दूरियां और बढ़ गई थीं। फैमिली कोर्ट पहुंची थीं सुनीता, कश्मीरा शाह ने दिया सपोर्ट विवाद के बीच सुनीता मुंबई के फैमिली कोर्ट भी पहुंची थीं, जिससे दोनों के तलाक की अटकलें लगने लगी थीं। हालांकि बाद साफ हुआ कि वे अपनी पुरानी तलाक की याचिका वापस लेने गई थीं, क्योंकि उन्हें लगा था कि गोविंदा और कोमल शादी करने वाले हैं। इस पूरे मामले में कृष्णा की पत्नी कश्मीरा शाह ने सुनीता का समर्थन किया है। पैपराजी से बातचीत में कश्मीरा ने कहा था कि वे अपने परिवार की महिलाओं के साथ खड़ी हैं और अगर सुनीता आज आवाज उठा रही हैं तो जरूर कुछ गलत हुआ होगा। लंबे समय से चल रही पारिवारिक अनबन गोविंदा और कृष्णा अभिषेक के परिवार के बीच पिछले कई सालों से रिश्ते ठीक नहीं रहे हैं। साल 2018 में कृष्णा की पत्नी कश्मीरा शाह के एक ट्वीट के बाद दोनों परिवारों में दूरियां आ गई थीं। इसके बाद कई मौकों पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ बयान दिए थे। हालांकि हाल के महीनों में कृष्णा और उनकी बहन आरती कई मौकों पर गोविंदा के बच्चों के साथ नजर आए हैं और पारिवारिक मतभेदों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। 1987 में हुई थी गोविंदा और सुनीता की शादी गोविंदा और सुनीता आहूजा ने 1987 में एक प्राइवेट समारोह में शादी की थी। उस समय गोविंदा बॉलीवुड स्टार बन चुके थे। दोनों ने गोविंदा के करियर के लिए करीब दो साल तक अपनी शादी की बात छिपाकर रखी थी। बेटी टीना आहूजा के जन्म के बाद उन्होंने शादी को सार्वजनिक किया था। इसके बाद दोनों के बेटे यशवर्धन आहूजा का जन्म हुआ। …………… गोविंदा से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… गोविंदा-सुनीता की निजी जिंदगी पर कमेंट से भड़के कृष्णा:सेलेब्स को दी नसीहत, बोले- परिवार की बातों से फुटेज लेने की कोशिश न करें गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते में चल रही अनबन के बीच उनके भांजे कृष्णा अभिषेक ने नाराजगी जताई है। सोमवार को मुंबई एयरपोर्ट पर पैपराजी ने मामा-मामी के रिश्ते पर सवाल किया तो कृष्णा ने जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनसे सिर्फ मस्ती और काम से जुड़े सवाल पूछे जाएं। साथ ही, उन सेलेब्स पर नाराजगी जताई, जो इस पारिवारिक मामले पर लगातार बयान दे रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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