घर की दीवारों को सजाने के लिए लोग अक्सर तरह-तरह की पेंटिंग्स या मूर्ति आदि का इस्तेमाल करते हैं। कोई घर में दौड़ते हुए घोड़ों की पेंटिंग्स लगाना पसंद करते हैं। तो कुछ घर की दीवार पर उगते हुए सूर्य की छवि लगाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर में दौड़ते हुए बुल की पेंटिंग्स लगाने के क्या फायदे होते हैं। वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर में दौड़ते हुए बुल की पेटिंग्स लगाना काफी शुभ और फायदेमंद माना जाता है।
वहीं बॉलीवुड इंडस्ट्री के शहंशाह अमिताभ बच्चन के घर पर भी इस तरह की पेंटिंग्स लगी हुई है। जिसकी फोटो सोशल मीडिया पर काफी लंबे समय से वायरल हो रही है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको घर में बिग बुल की पेंटिंग्स लगाने के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।
जानें बिग बुल की पेंटिंग्स लगाने के फायदे
वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर में बिग बुल की पेंटिंग्स या फिर प्रतिमा लगाने से घर में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ता है। साथ ही धन का प्रवाह भी अच्छा रहता है। बैल की मूर्ति या पेंटिंग लगाने के लिए सबसे अच्छी दिशा घर का साउथ ईस्ट डायरेक्शन माना जाता है। वहीं बैल को कभी भी खड़ी मुद्रा में नहीं लगाना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
बैल की मूर्ति या पेंटिंग्स दौड़ती हुई मुद्रा में लगाना चाहिए। इससे आर्थिक संबंधों में तेजी आती है। घर में हमेशा पॉजिटिव एनर्जी का संचार रहता है और यह घर में रहने वाले लोगों के मूड पर भी अच्छा असर दिखाता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में साउथ ईस्ट दिशा को फाईनेंनशियल कॉर्नर माना जाता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बुल हमेशा आगे की तरफ मूवमेंट करता हो।
जानिए महत्व
भारतीय संस्कृति में सिर्फ बैल ही नहीं बल्कि सभी जानवर पूजा के योग्य माने जाते हैं। वहीं बैल का महत्व अधिक इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह महादेव के वाहन कहे जाने वाले नंदी का प्रतीक माना जाता है। भारतीय संस्कृति के मुताबिक नंदी बैल के कान में अपनी बात बोलने से मनोकामना पूरी होती है। इसलिए बुल की पेटिंग्स लगाने से घर की एनर्जी पर इसका अच्छा असर होता है।
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हिंदू धर्म और वैदिक ग्रंथों में रुद्राक्ष को बेहद पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। भारत और दुनिया में कई लोग सदियों से रुद्राक्ष को धारण करते आ रहे हैं। हिंदू धर्म में रुद्राक्ष की मान्यता और भी खास इसलिए हो जाती है। क्योंकि इसको भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है। शिव महापुराण के मुताबिक भगवान शिव के आंसुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई है।
इसको धारण करने से जातक के कर्म शुद्ध होते हैं और आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको रुद्राक्ष से जुड़े कुछ ऐसे मिथकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको लेकर लोग असमंजस की स्थिति में रहते हैं।
पीरियड्स के दौरान रुद्राक्ष उतारना सही है या नहीं
कई महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि पीरियड्स के समय रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। लेकिन इस बात में बिलकुल भी सच्चाई नहीं है। दरअसल, रुद्राक्ष एक बीज है, जिसकी एनर्जी नाजुक नहीं है। किसी भी धार्मिक शास्त्र में पीरियड्स के समय इसको न धारण करने के किसी भी नियम के बारे में नहीं बताया गया है। यह फैसला पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है।
अलग-अलग मुखी का रुद्राक्ष धारण करना अशुभ
सबसे पहले यह समझें कि हिंदू धर्म में रुद्राक्ष का आध्यात्मिक महत्व बेहद होता है। जिस कारण इसको धारण करना अशुभ नहीं माना जाता है। 5 मुखी और 7 मुखी रुद्राक्ष को एक साथ पहने से एक साथ मनके की एनर्जी काम करती है। न कि उसके खिलाफ। अलग-अलग मुखी रुद्राक्ष आपकी ऊर्जा को समर्थन करने के लिए है।
साधु-संत और हिंदू ही धारण कर सकते हैं रुद्राक्ष
हिंदू धर्म के मुताबिक कोई भी व्यक्ति रुद्राक्ष को पहन सकता है। फिर चाहे उसका धर्म, जीवनशैली और लिंग कुछ भी हो। कई लोगों का मानना होता है कि सिर्फ साधु-संतों या कट्टर धार्मिक अनुयायी की मालाएं आदि पहन सकते हैं। जबकि रुद्राक्ष सार्वभौमिक आध्यात्मिक साधन है, जिसको कोई भी पहन सकता है।
एक बार रुद्राक्ष पहनने के बाद कभी नहीं उतारें
जबकि सच्चाई यह है कि कई लोग नहाते समय, शारीरिक संबंध बनाते समय या शमशान घाट जाते समय रुद्राक्ष को उतार देते हैं। हालांकि ऐसा सम्मान के दृष्टिकोण से किया जाता है, न कि इससे रुद्राक्ष की एनर्जी कमजोर होती है। हिंदू धर्म में सम्मान का असल अर्थ पवित्र चीजों का सम्मान करना है। वहीं बार-बार इसको उतारने से रुद्राक्ष की ऊर्जा कम नहीं होती है।
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