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Uttarakhand News: देहरादून में बैठी उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग की अदालत, 26 मामलों का मौके पर हुआ फैसला

Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वंचित और पीड़ित परिवारों की समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर एक बड़ी पहल सामने आई है. राज्य अनुसूचित जाति आयोग के दफ्तर में आयोजित तीन दिवसीय विशेष जनसुनवाई कार्यक्रम में लोगों की पुरानी और उलझी हुई समस्याओं का समाधान किया गया. इस दौरान दूरदराज के पर्वतीय और मैदानी जिलों से पहुंचे फरियादियों ने अपनी पीड़ा खुलकर सामने रखी. आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार की सीधी निगरानी में चली इस सुनवाई में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बात की गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए.

तीन दिन चला शिकायतों के समाधान का दौर

देहरादून स्थित आयोग मुख्यालय में यह जनसुनवाई एक सितंबर से तीन सितंबर तक आयोजित की गई थी. इस दौरान टिहरी, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, चंपावत और बागेश्वर सहित राज्य के तमाम हिस्सों से लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे थे. तीन दिनों के भीतर कुल पैंतालीस शिकायतों को क्रमवार सुना गया. आयोग की सक्रियता और दोनों पक्षों की सीधी मौजूदगी के चलते छब्बीस संवेदनशील मामलों का समाधान मौके पर ही कर दिया गया. जिन मामलों में तुरंत निर्णय संभव नहीं था, उनमें संबंधित विभागों के अफसरों को तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया.

संविधान के दायरे में न्याय दिलाना आयोग की प्राथमिकता

जनसुनवाई की अध्यक्षता करते हुए आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को संविधान और कानून के तहत समय पर न्याय दिलाना है. उन्होंने कहा कि कई बार लोग अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए लंबे समय तक भटकते रहते हैं. ऐसे में आयोग का यह प्रयास रहता है कि दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर बातचीत के जरिए मामले का स्थायी हल निकाला जाए. इसके अलावा आयोग इस बात पर भी लगातार ध्यान दे रहा है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ जरूरतमंद परिवारों तक बिना किसी रुकावट के पहुंचे.

अधिकारियों को जिम्मेदारी से काम करने की दी सीख

अध्यक्ष ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर जोर देते हुए कहा कि जनसुनवाई में सक्षम और जिम्मेदार अफसरों की मौजूदगी से मामलों को निपटाने में काफी आसानी होती है. उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी कि वे अपने दैनिक कामकाज और दायित्वों को पूरी ईमानदारी और जवाबदेही के साथ निभाएं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्थानीय स्तर पर ही अधिकारी जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर उनका समाधान कर दें, तो आम नागरिक को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों के लिए आयोग या मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.

जमीन से लेकर नौकरी तक के मामलों पर हुई सुनवाई

इस तीन दिवसीय आयोजन में कई गंभीर और लंबे समय से लटके हुए प्रकरण सामने आए. इनमें मुख्य रूप से अनुसूचित जाति परिवारों की पुश्तैनी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने, जमीन की सही पैमाइश कराने, भूमि का मालिकाना हक दिलाने और सामाजिक उत्पीड़न से जुड़े मामले शामिल रहे. इसके साथ ही विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को बेवजह सेवा से हटाने, पदोन्नति में अड़चन, नौकरी में दोबारा बहाली और जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों पर भी गहनता से विचार किया गया. आयोग ने इन सभी मामलों में पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा को सबसे ऊपर रखा.

आदेशों का समय पर पालन कराने पर जोर

आयोग की सचिव कविता टम्टा ने पूरी जनसुनवाई का ब्योरा देते हुए बताया कि जिलों से आई शिकायतों को बेहद संवेदनशीलता के साथ सुना गया है. उन्होंने कहा कि जनसुनवाई में जो भी निर्देश संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दिए गए हैं, उनका तय समय के भीतर पालन होना बेहद आवश्यक है. आयोग इस बात की लगातार निगरानी करेगा कि दिए गए फैसलों पर धरातल पर कितना अमल हुआ है. अधिकारियों की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

जनसुनवाई में आयोग के प्रमुख पदाधिकारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई के दौरान आयोग के सदस्य विशाल मुखिया, सुनीता देवी, भागीरथी कुंजवाल और विधि सलाहकार राजू मेहर प्रमुख रूप से मौजूद रहे. इसके अलावा आयोग से जुड़े अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी पूरी प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहे. सभी सदस्यों ने मामलों की कानूनी बारीकियों को परखा और पीड़ितों को कानूनी व प्रशासनिक स्तर पर हर संभव मदद का भरोसा दिया. आयोग के इस कदम से दूरदराज से पहुंचे लोगों में न्याय की नई उम्मीद जगी है.

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में 101 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी, सीएम धामी ने बांटे नियुक्ति पत्र

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बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने मुजफ्फरपुर के कैंसर अस्पताल में 12 बेड वाले आईसीयू का उद्घाटन किया

पटना, 3 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने गुरुवार को मुजफ्फरपुर का दौरा किया और श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) परिसर में स्थित होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (एचबीसीएचएंडआरसी) में अत्याधुनिक 12-बेड वाले इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) का उद्घाटन किया।

मंत्री ने रिबन काटकर इस सुविधा का उद्घाटन किया और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) वार्ड में 30 बिस्तरों वाले नए सुपर-स्पेशियलिटी आईसीयू की भी घोषणा की।

मंत्री के दौरे के दौरान अस्पताल परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। उद्घाटन के बाद, निशांत कुमार ने कैंसर अस्पताल के विभिन्न विभागों का बारीकी से निरीक्षण किया।

उन्होंने मरीजों के लिए दवाओं, जांच सुविधाओं, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और डॉक्टरों की उपलब्धता की समीक्षा की। मंत्री ने चिकित्सा और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए और जोर दिया कि मरीजों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए निशांत कुमार ने कहा कि आने वाले दिनों में मुजफ्फरपुर कैंसर अस्पताल को आधुनिक तकनीक और व्यापक इलाज सुविधाओं के साथ और बेहतर बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर बिहार में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज के लिए पटना या राज्य के बाहर न जाना पड़े।

उन्होंने कहा कि मरीजों को घर के पास ही अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार पूरे बिहार में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है ताकि हर नागरिक को समय पर चिकित्सा सलाह और अच्छा इलाज मिल सके।

बिहार सरकार ने बुधवार को जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार अभियान शुरू किया, जिसका मकसद पूरे राज्य में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का जल्द पता लगाना और समय पर इलाज सुनिश्चित करना है।

आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर, एएनएम के साथ मिलकर घर-घर जाकर सर्वे करेंगी, परिवार के फोल्डर और सीबीएसी फॉर्म तैयार करेंगी, ज्यादा जोखिम वाले लोगों की पहचान करेंगी, मरीजों की सूची बनाएंगी और मरीजों को बताई गई दवाएं लेने और फॉलो-अप शेड्यूल का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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Mike Hesson का बड़ा खुलासा: Rizwan और Imam-ul-Haq को हटाने के फैसले में मेरा कोई हाथ नहीं, PCB पर फोड़ा ठीकरा

पाकिस्तान क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो हार के बाद मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में टीम में किए गए बड़े बदलावों को लेकर अंतरिम लाल गेंद कोच माइक हेसन ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। हेसन ने कहा कि मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा और इमाम-उल-हक को टीम से बाहर करने के फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि जब उन्हें जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया, तब तक ये तीनों खिलाड़ी टीम छोड़कर स्वदेश लौट चुके थे।

बता दें कि इंग्लैंड ने सीरीज के पहले मुकाबले में हेडिंग्ले में पाकिस्तान को पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी इंग्लैंड ने 194 रन से जीत दर्ज की। इन लगातार दो हार के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अब दोनों टीमों के बीच तीसरा और अंतिम टेस्ट 9 सितंबर से एजबेस्टन में खेला जाना है।

इन हार के बाद पाकिस्तान बोर्ड ने टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों के स्तर पर बड़े बदलाव किए। मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा, इमाम-उल-हक, अली उस्मान, आमिर जमाल, मुहम्मद आवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टीम से हटा दिया गया। इसके अलावा मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।

माइक हेसन को इसके बाद अंतिम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की लाल गेंद वाली टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई। बर्मिंघम में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने रिजवान, आगा और इमाम को हटाए जाने के फैसले से खुद को अलग करते हुए कहा कि बोर्ड ने जब उनसे अंतिम टेस्ट की जिम्मेदारी संभालने के बारे में पूछा, तब तक तीनों खिलाड़ी टीम से बाहर किए जा चुके थे और घर लौट रहे थे।

हालांकि हेसन ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी खिलाड़ियों को हटाने और कुछ नए चेहरों को टीम में शामिल करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका थी। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य अंतिम टेस्ट के लिए टीम में बेहतर संतुलन तैयार करना था।

मौजूद जानकारी के अनुसार, हेसन पाकिस्तान की सीमित ओवरों वाली टीम के साथ काम करने के बाद जापान से लौटे थे। जापान में एशियाई खेलों का आयोजन चल रहा है। लाहौर में पाकिस्तान का सीमित ओवरों का प्रशिक्षण शिविर भी हुआ था। इसी दौरान क्रिकेट बोर्ड ने उनसे टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा।

हेसन ने कहा कि अब उनका मुख्य जोर ऐसी गेंदबाजी इकाई तैयार करने पर है जिसमें अलग-अलग तरह के गेंदबाज मौजूद हों। वह टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ियों को भी रखना चाहते हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में योगदान दे सकें। उनके अनुसार, अंतिम टेस्ट में टीम का संतुलन सुधारना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

नई पाकिस्तान टीम में सैम अयूब और अब्दुल्ला फजल जैसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इनके अलावा अराफात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बैग, मोहम्मद इमरान और रजाउल्लाह जैसे ऐसे खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा हैं जिन्हें अभी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करना बाकी है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले ही श्रृंखला गंवा चुका है, इसलिए एजबेस्टन टेस्ट उसके लिए परिणाम से ज्यादा अपनी कमजोरियों को सुधारने का अवसर होगा। लगातार हार के बाद टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को मौका देकर भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करना चाहता है। ऐसे में अंतिम मुकाबले में नए चेहरों के प्रदर्शन और माइक हेसन की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Fri, 04 Sep 2026 21:59:00 +0530

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