Modi Rubber की 59 एकड़ जमीन के अवैध ट्रांसफर पर Allahabad High Court ने दिए नए सिरे से जांच के आदेश
लखनऊ, तीन सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सरकारी अनुदान अधिनियम के तहत मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ में से 59 एकड़ जमीन के कथित गैर-कानूनी अंतरण की नये सिरे से जांच का आदेश दिया है। अदालत ने ‘बोर्ड ऑफ रेवेन्यू’ के अधिकारियों की एक समिति को छह हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। पीठ ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि जांच रिपोर्ट मिलने के तीन हफ्ते के अंदर इस पर फैसला ले।
पीठ ने अपने पहले के निर्देशों का पालन करने में हुई देर पर सख्त नाराजगी जताते हुए राज्य पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है और यह रकम जनहित में मामला लड़ रहे याचिकाकर्ता को दी जाएगी। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने लोकेश कुमार खुराना की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई की तारीख आगामी 18 नवंबर नियत की गयी है।
राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा पिछले आदेश के पालन में दो सितंबर को पीठ के सामने पेश हुईं और अदालत को बताया कि जिला स्तर की शुरुआती जांच में जमीन अंतरण के आरोप सही पाए गए थे और चूंकि राज्य स्तर पर निर्णय लिया जाना था इसलिए 24 फरवरी 2024 को बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के अधिकारियों को जांच का काम सौंपा गया था। अपर्णा ने बताया कि जांच रिपोर्ट तीन जून 2025 को मिली थी लेकिन वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी। इसके बाद तीन दिसंबर 2025 के एक पत्र के माध्यम से समिति के सदस्यों को एक और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।
हालांकि याद दिलाने के बावजूद अब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अनुदान अधिनियम के तहत मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ ज़मीन में से लगभग 59 एकड़ जमीन राज्य सरकार की मंजूरी लिए बिना अंतरित कर दी गई थी। हालांकि, इस मामले पर कंपनी का अपना पक्ष है।
मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि आठ अक्टूबर 2025 के आदेश के बावजूद पूरक जवाबी हलफनामा दाखिल न करने का कोई उचित कारण नहीं हो सकता। पीठ ने ‘बोर्ड ऑफ रेवेन्यू’ के अधिकारियों वाली जांच समिति द्वारा समय पर रिपोर्ट न सौंपने और मामले को लटकाए रखने के लिए भी कोई उचित कारण नहीं पाया। पीठ को बताया गया कि नई जांच समिति में उत्तर प्रदेश के राजस्व परिषद के विशेष अधिशासी अधिकारी राज कुमार द्विवेदी, मेरठ के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), मेरठ के मुख्य कोषागार अधिकारी और सरधना के उप जिलाधिकारी शामिल हैं।
Rajya Sabha चेयरमैन CP Radhakrishnan ने गठित की विभिन्न समितियां, खरगे भी शामिल
नयी दिल्ली, तीन सितंबर राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को उच्च सदन के कुछ नवनिर्वाचित सदस्यों को विभिन्न संसदीय समितियों में नियुक्त किया। इनमें सामान्य प्रयोजन समिति भी शामिल है, जिसके सभापति राधाकृष्णन हैं। राधाकृष्णन ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कुछ संसदीय समितियों के अध्यक्षों को सामान्य प्रयोजन समिति के लिए नामित किया।
इस समिति का काम सदन के कामकाज से जुड़े उन मामलों पर विचार करना और सलाह देना है, जिन्हें समय-समय पर सभापति इसके पास भेजते हैं। सामान्य प्रयोजन समिति में सभापति, उपसभापति, उपसभापतियों के पैनल के सदस्य, राज्यसभा की सभी संसदीय स्थायी समितियों के अध्यक्ष, राज्यसभा में मान्यता प्राप्त दलों और समूहों के नेता तथा सभापति द्वारा नामित किए गए अन्य सदस्य शामिल होते हैं। राज्यसभा के सभापति इस समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
सभापति ने खरगे के अलावा उपसभापतियों के पैनल में शामिल एम. थंबी दुरई (अन्नाद्रमुक) को भी समिति के लिए नामित किया। इसके अलावा संसदीय स्थायी समितियों के अध्यक्षों में से मुकुल वासनिक (कांग्रेस), तिरुचि शिवा (द्रमुक), मेधा विश्राम कुलकर्णी (भाजपा), के. लक्ष्मण (भाजपा), राघव चड्ढा (भाजपा) और रंजीत रंजन (कांग्रेस) को भी सामान्य प्रयोजन समिति में शामिल किया गया है। मान्यता प्राप्त दलों के नेताओं में से मानस रंजन मंगराज (बीजद) को तथा अन्य सदस्यों के रूप में सना सतीश बाबू (तेदेपा) और राजीव शुक्ला (कांग्रेस) को नामित किया गया है।
सभापति ने सना सतीश बाबू को कार्य मंत्रणा समिति के लिए नामित किया। इसके अलावा लक्ष्मीकांत बाजपेयी (भाजपा) और सुखेंदु शेखर रे (भाजपा) को नियम समिति में तथा तरुण चुग (भाजपा), मिथिलेश कुमार (भाजपा), भीम सिंह (भाजपा), अखिलेश प्रसाद सिंह (कांग्रेस) और तिरुचि शिवा को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति में नामित किया गया है। राधाकृष्णन ने एस. कल्याणसुंदरम (द्रमुक), मस्तान राव यादव बीदा (तेदेपा) और एल. के. सुदीश (डीएमडीके) को सदन समिति के लिए नामित किया।
इसके अलावा हरीस बीरन (आईयूएमएल) और राजीव शुक्ला को सरकारी आश्वासन समिति में तथा सुष्मिता देव (भाजपा), चुन्नीलाल गरासिया (भाजपा), स्वाति मालीवाल (भाजपा), हर्ष महाजन (भाजपा), नीरज डांगी (राजस्थान) और आई. एस. इंबादुरई (एआईएडीएमके) को अधीनस्थ विधान समिति के लिए नामित किया गया। इसके अलावा, एम. नागराज (भाजपा), मानसिंह मेरामन परमार (भाजपा), अजीत माधवराव गोपचड़े (भाजपा), खियांग्ते ललतलुआंगकिमा (जेडपीएम) और जेम्स पांगसांग कोंगल संगमा (एनपीपी) को सदन में प्रस्तुत पत्रों की समिति के लिए नामित किया गया। वहीं एस. आर. शिवलिंगम (द्रमुक) और संजय सेठ (भाजपा) को राज्यसभा की आचार समिति में तथा जॉन ब्रिटास (माकपा), जोस के. मणि (केसी(एम)) और उपेंद्र कुशवाहा (आरएलएम) को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) समिति के लिए नामित किया गया है।
राज्यसभा सचिवालय की अधिसूचना में कहा गया, ‘‘राज्यसभा के सभापति ने तीन सितंबर को राज्यसभा सदस्य मानस रंजन मंगराज को आचार समिति का सदस्य नामित किया है। वह इसमें डॉ. सस्मित पात्रा के स्थान पर शामिल होंगे।
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