Nepal Flash Flood: 5 दिन बाद मलबे से निकली 6 साल की मासूम मनीषा, पापा ने जो बताया सुनकर रो देंगे आप!
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच छह साल की मासूम मनीषा की कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है. जिस बच्ची के बाढ़ में बह जाने के बाद परिवार ने उसके जिंदा बचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, वह तीन दिन बाद जिंदा मिली. बेहद खराब हालत में रेस्क्यू की गई मनीषा फिलहाल नेपाल के एक अस्पताल में भर्ती है, जहां उसका इलाज चल रहा है.
मनीषा के पिता लोक बहादुर ने बताया कि 26 तारीख को वह बच्ची को नाश्ता देकर घर से बाहर गए थे. उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही समय बाद बाढ़ उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल देगी. अचानक आई तबाही में उनका घर भी बह गया और परिवार के सदस्य अलग-अलग हो गए.
घर के साथ बह गई बच्ची, पिता भी हो गए थे बेहोश
लोक बहादुर के मुताबिक, जब वह ऊपर से नीचे आ रहे थे, तभी बाढ़ का पानी तेजी से आया. स्थिति इतनी भयावह थी कि उनका घर तक पानी अपने साथ बहाकर ले गया. इसी दौरान बच्ची भी लापता हो गई.
उन्होंने बताया कि वह खुद भी हादसे के दौरान बेहोश हो गए थे. उनके कुछ दोस्तों ने उनकी जान बचाई. लेकिन बेटी मनीषा का कहीं पता नहीं चल रहा था. परिवार के लिए अगले तीन दिन बेहद मुश्किल और दर्दनाक रहे.
तीन दिन बाद टिमरे में मिली मनीषा
लगातार तलाश के बाद करीब तीन दिन बाद मनीषा टिमरे इलाके में मिली. सबसे बड़ी राहत यह थी कि वह जिंदा थी. हालांकि, जब उसे रेस्क्यू किया गया तो उसकी हालत बेहद नाजुक थी और वह बेहोश थी.
जब बच्ची को होश आया तो उसने जो बात कही, उसने उसके पिता को अंदर तक झकझोर दिया. मनीषा ने अपने माता-पिता से कहा, "पापा मेरे को बचाने क्यों नहीं आए?"
बच्ची ने यह भी बताया कि एक अंकल ने उसे पानी पिलाया और खाना खिलाया था. तीन दिन तक मौत और जिंदगी के बीच जूझने के बाद जब वह होश में आई, तो उसके मन में सबसे पहले अपने माता-पिता का ही ख्याल था.
पिता बोले- लगा मेरी बेटी ने दूसरा जन्म लिया है
लोक बहादुर ने बताया कि तीन दिनों तक उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उनकी बेटी जिंदा भी है या नहीं. वह और उनका परिवार इतने तनाव में थे कि तीन दिनों तक ठीक से खाना-पानी तक नहीं लिया.
जब उन्होंने अपनी आंखों से बेटी को जिंदा देखा तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ. पिता ने भावुक होकर कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी बेटी ने दूसरा जन्म लिया हो.
अब धीरे-धीरे बेहतर हो रही है बच्ची
मनीषा की हालत अब पहले से बेहतर बताई जा रही है, हालांकि वह अभी भी नाजुक है. उसके शरीर पर चोट के निशान हैं और इलाज जारी है. राहत की बात यह है कि वह अब बातचीत कर पा रही है और खाना भी खा रही है.
मनीषा के पिता ने इस मुश्किल समय में बच्ची को बचाने और रेस्क्यू करने वाली पुलिस और सभी लोगों का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया.
तबाही के बीच जिंदगी की उम्मीद
मनीषा की कहानी नेपाल में आई तबाही के बीच उम्मीद की एक ऐसी तस्वीर है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है. एक तरफ जहां बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, वहीं तीन दिन बाद मनीषा का जिंदा मिलना परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है.
एक पिता के लिए अपनी आंखों के सामने बेटी को खोने का डर कितना भयावह होता है, यह लोक बहादुर की कहानी से समझा जा सकता है. मनीषा का सवाल—"पापा मुझे बचाने क्यों नहीं आए?"—इस त्रासदी के दर्द को और गहरा कर देता है.
8th Pay Commission Update: क्या 7 फीसदी होने वाला इजाफा? जानिए कितनी बढ़ेगी कर्मचारियों की सैलरी
8th Pay Commission Update: देशभर के लाखों केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है. हर किसी के मन में बस यही सवाल तैर रहा है कि नए आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद उनके बैंक खाते में आने वाली रकम कितनी बदल जाएगी. वेतन आयोग की टीम भी पूरी सक्रियता से काम में जुटी हुई है. हाल ही में जयपुर में अहम मंथन हुआ था और अब 7 व 8 सितंबर को चेन्नई में कर्मचारियों व पेंशनर्स के विभिन्न संगठनों के साथ बड़ी बैठक होने वाली है. इन बैठकों का मुख्य मकसद कर्मचारियों की जमीनी जरूरतों और उनकी अपेक्षाओं को समझना है. इस पूरी बातचीत में सबसे अहम मुद्दा सालाना मिलने वाली वेतन वृद्धि यानी इंक्रीमेंट का बन गया है. सभी कर्मचारी संगठनों ने साफ शब्दों में कहा है कि मौजूदा 3 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी से उनका गुजारा अब मुमकिन नहीं है.
मौजूदा 3 फीसदी बढ़ोतरी से निराशा
वर्तमान नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों को हर साल उनकी मूल तनख्वाह पर 3 फीसदी की दर से वेतन वृद्धि दी जाती है. कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जिस तेजी से रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, उस हिसाब से यह तीन फीसदी की रकम ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है. साल भर कड़ी मेहनत के बाद भी हाथ में आने वाला इजाफा बेहद मामूली रहता है. इसी वजह से संगठनों ने एक सुर में आवाज उठाई है कि सालाना इंक्रीमेंट की दर को कम से कम 5 से 7 फीसदी के दायरे में लाया जाना चाहिए. उनका कहना है कि जब तक सालाना बढ़ोतरी को सम्मानजनक स्तर पर नहीं पहुंचाया जाएगा, तब तक कर्मचारियों को महंगाई की मार से राहत नहीं मिल पाएगी.
संगठनों ने रखी अपनी अलग-अलग मांग
कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने मजबूती से अपनी बात रखी है. उनका कहना है कि नए वेतन आयोग में कम से कम 6 फीसदी का सालाना इंक्रीमेंट अनिवार्य रूप से तय होना चाहिए. रक्षा क्षेत्र से जुड़े ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलॉयीज फेडरेशन और डाक विभाग के फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन ने भी 6 फीसदी की ही वकालत की है. वहीं दूसरी तरफ ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्पलॉयीज फेडरेशन ने सीधे 7 फीसदी सालाना इंक्रीमेंट की पुरजोर मांग उठाई है. रेलवे कर्मचारियों से जुड़े संगठन ने थोड़ा लचीला रुख अपनाते हुए 5 फीसदी बढ़ोतरी को भी पर्याप्त माना है. कुल मिलाकर सभी संगठन इस बात पर पूरी तरह एकमत हैं कि 3 फीसदी का पुराना ढर्रा अब बदलना ही चाहिए.
पुराने सिस्टम में नुकसान का गणित
अगर मौजूदा व्यवस्था को बारीकी से समझें तो पता चलता है कि कर्मचारियों को असल में कितना कम फायदा मिल रहा है. सातवें वेतन आयोग के तहत लेवल 1 पर आने वाले शुरुआती कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18 हजार रुपये है. इस पर 3 फीसदी के हिसाब से हर साल केवल 540 रुपये की मामूली बढ़ोतरी होती है. इसका मतलब यह हुआ कि पूरे दस साल की सेवा के बाद भी उसकी बेसिक सैलरी में कुल 5,400 रुपये का ही इजाफा हो पाता है और वह 23,400 रुपये तक ही पहुंच पाती है. इसी तरह लेवल 5 के कर्मचारी की बात करें तो 29,200 रुपये की बेसिक पर सालाना केवल 876 रुपये बढ़ते हैं. दस साल में यह कुल जमा 8,760 रुपये की बढ़ोतरी बनती है, जिससे सैलरी 37,960 रुपये पर अटक जाती है.
फिटमेंट फैक्टर और नई उम्मीदें
कर्मचारी संगठनों का गणित एकदम साफ है कि अगर इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया जाए, तो एक वेतन आयोग के दस साल के पूरे दौर में कर्मचारी की बेसिक पे करीब दोगुनी हो जाएगी. मान लेते हैं कि नए वेतन आयोग में 2.15 का फिटमेंट फैक्टर तय किया जाता है. लेवल 8 के कर्मचारी का मौजूदा मूल वेतन 47,600 रुपये है, जो इस नए फैक्टर के लागू होते ही बढ़कर सीधे 1,02,340 रुपये पर पहुंच जाएगा. इसके बाद असली खेल सालाना इंक्रीमेंट की दरों का शुरू होता है, जो आने वाले दस सालों की माली हालत तय करेगा.
इंक्रीमेंट बढ़ने से कितना बदलेगी सैलरी
अगर लेवल 8 के नए बेसिक पे यानी 1,02,340 रुपये पर पुराना 3 फीसदी का नियम ही लागू रहा, तो दस वर्षों के दौरान कर्मचारी को कुल मिलाकर 1,40,78,561 रुपये का मूल वेतन मिलेगा. वहीं अगर आयोग कर्मचारियों की मांग पर मुहर लगाते हुए इसे 5 फीसदी कर देता है, तो दस साल में कुल बेसिक पे बढ़कर 1,54,46,658 रुपये हो जाएगी, जो कि सीधे तौर पर 13,68,097 रुपये का बड़ा फायदा है. अगर इसे 6 फीसदी किया गया तो यह कुल आंकड़ा 1,61,87,071 रुपये तक पहुंचेगा. सबसे बेहतरीन स्थिति तब बनेगी जब सरकार 7 फीसदी की मांग मान ले. सात फीसदी की दर लागू होते ही 10 साल में कुल बेसिक सैलरी का भुगतान 1,69,67,703 रुपये तक पहुंच जाएगा. यह अंतर साफ दिखाता है कि कर्मचारी संगठन 3 फीसदी के नियम को बदलने के लिए इतने आमादा क्यों हैं.
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