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भारत ने हांगकांग चाइना को 137 रनों से चटाई धूल, Womens Asia Cup 2026 में टीम इंडिया ने हासिल की लगातार दूसरी बड़ी जीत

Womens Asia Cup 2026: महिला एशिया कप 2026 के 7वें मुकाबले में भारतीय टीम ने हांगकांग चाइना को 137 रनों के बड़े अंतर से हरा दिया है. पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने स्मृति मंधाना के शतक के दम पर 193 रन बनाए थे. जवाब में भारतीय गेंदबाजों ने हांगकांग चाइना की टीम को 16.2 ओवरों में सिर्फ 56 रनों पर समेट दिया. भारत की ओर से नंदिनी शर्मा, दीप्ति शर्मा, श्री चरणी और प्रतिका रावल ने घातक गेंदबाजी की. इस टूर्नामेंट में हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय टीम की यह लगातार दूसरी जीत है. इससे पहले अपने पहले मैच में टीम इंडिया ने थाईलैंड को हराया था.

 

 

भारत की ओर से स्मृति मंधाना ने खेली 124 रनों की तूफानी पारी

हांगकांग चाइना के खिलाफ टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने 5 विकेट पर 193 रनों का स्कोर खड़ा किया था. सलामी बल्लेबाज शैफाली वर्मा ने भी तेज शुरुआत की और 17 गेंदों पर 3 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 28 रन बनाकर आउट हुईं. उनके बाद बल्लेबाजी के लिए उतरीं प्रतिका रावल ज्यादा देर तक मंधाना का साथ नहीं दे सकीं और 12 गेंदों पर 10 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं. विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने भी 13 गेंदों पर 1 चौके की मदद से 11 रनों का योगदान दिया, जबकि कप्तान हरमनप्रीत कौर 9 गेंदों पर 1 चौका लगाकर 10 रन के निजी स्कोर पर आउट हुईं. भारत की ओर से उपकप्तान स्मृति मंधाना ने शानदार शतक जड़ा. उन्होंने महज 64 गेंदों पर 124 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 14 चौके और 7 छक्के शामिल रहे. उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड दिया गया. 

हांगकांग चाइना की ओर से गेंदबाजी में मरीना लैम्प्लो सबसे सफल रहीं, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 विकेट चटकाए. इसके अलावा रुचिता वेंकटेश ने भारत को पहला बड़ा झटका देते हुए खतरनाक दिख रहीं सलामी बल्लेबाज शैफाली वर्मा को आउट कर 1 विकेट लेने में कामयाब रहीं. वहीं जॉयलीन कौर ने भी एक विकेट चटकाए.

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Nepal Flash Flood: 5 दिन बाद मलबे से निकली 6 साल की मासूम मनीषा, पापा ने जो बताया सुनकर रो देंगे आप!

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच छह साल की मासूम मनीषा की कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है. जिस बच्ची के बाढ़ में बह जाने के बाद परिवार ने उसके जिंदा बचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, वह तीन दिन बाद जिंदा मिली. बेहद खराब हालत में रेस्क्यू की गई मनीषा फिलहाल नेपाल के एक अस्पताल में भर्ती है, जहां उसका इलाज चल रहा है.

मनीषा के पिता लोक बहादुर ने बताया कि 26 तारीख को वह बच्ची को नाश्ता देकर घर से बाहर गए थे. उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही समय बाद बाढ़ उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल देगी. अचानक आई तबाही में उनका घर भी बह गया और परिवार के सदस्य अलग-अलग हो गए.

घर के साथ बह गई बच्ची, पिता भी हो गए थे बेहोश

लोक बहादुर के मुताबिक, जब वह ऊपर से नीचे आ रहे थे, तभी बाढ़ का पानी तेजी से आया. स्थिति इतनी भयावह थी कि उनका घर तक पानी अपने साथ बहाकर ले गया. इसी दौरान बच्ची भी लापता हो गई.

उन्होंने बताया कि वह खुद भी हादसे के दौरान बेहोश हो गए थे. उनके कुछ दोस्तों ने उनकी जान बचाई. लेकिन बेटी मनीषा का कहीं पता नहीं चल रहा था. परिवार के लिए अगले तीन दिन बेहद मुश्किल और दर्दनाक रहे.

तीन दिन बाद टिमरे में मिली मनीषा

लगातार तलाश के बाद करीब तीन दिन बाद मनीषा टिमरे इलाके में मिली. सबसे बड़ी राहत यह थी कि वह जिंदा थी. हालांकि, जब उसे रेस्क्यू किया गया तो उसकी हालत बेहद नाजुक थी और वह बेहोश थी.

जब बच्ची को होश आया तो उसने जो बात कही, उसने उसके पिता को अंदर तक झकझोर दिया. मनीषा ने अपने माता-पिता से कहा, "पापा मेरे को बचाने क्यों नहीं आए?"

बच्ची ने यह भी बताया कि एक अंकल ने उसे पानी पिलाया और खाना खिलाया था. तीन दिन तक मौत और जिंदगी के बीच जूझने के बाद जब वह होश में आई, तो उसके मन में सबसे पहले अपने माता-पिता का ही ख्याल था.

पिता बोले- लगा मेरी बेटी ने दूसरा जन्म लिया है

लोक बहादुर ने बताया कि तीन दिनों तक उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उनकी बेटी जिंदा भी है या नहीं. वह और उनका परिवार इतने तनाव में थे कि तीन दिनों तक ठीक से खाना-पानी तक नहीं लिया.

जब उन्होंने अपनी आंखों से बेटी को जिंदा देखा तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ. पिता ने भावुक होकर कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी बेटी ने दूसरा जन्म लिया हो.

अब धीरे-धीरे बेहतर हो रही है बच्ची

मनीषा की हालत अब पहले से बेहतर बताई जा रही है, हालांकि वह अभी भी नाजुक है. उसके शरीर पर चोट के निशान हैं और इलाज जारी है. राहत की बात यह है कि वह अब बातचीत कर पा रही है और खाना भी खा रही है.

मनीषा के पिता ने इस मुश्किल समय में बच्ची को बचाने और रेस्क्यू करने वाली पुलिस और सभी लोगों का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया.

तबाही के बीच जिंदगी की उम्मीद

मनीषा की कहानी नेपाल में आई तबाही के बीच उम्मीद की एक ऐसी तस्वीर है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है. एक तरफ जहां बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, वहीं तीन दिन बाद मनीषा का जिंदा मिलना परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है.

एक पिता के लिए अपनी आंखों के सामने बेटी को खोने का डर कितना भयावह होता है, यह लोक बहादुर की कहानी से समझा जा सकता है. मनीषा का सवाल—"पापा मुझे बचाने क्यों नहीं आए?"—इस त्रासदी के दर्द को और गहरा कर देता है.

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  Sports

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