Responsive Scrollable Menu

Assam Congress ने Akhil Gogoi की Raijor Dal से तोड़ा गठबंधन, अनुशासनहीनता का आरोप

असम कांग्रेस ने गुरुवार को अखिल गोगोई की अगुवाई वाली 'रायजोर दल' के साथ अपना राजनीतिक गठबंधन औपचारिक रूप से खत्म कर दिया। कांग्रेस ने इस क्षेत्रीय पार्टी पर विपक्षी गठबंधन के नियमों और सिद्धांतों का बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया। यह फैसला तुरंत लागू हो गया है और इसे असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के उप-नेता गौरव गोगोई के निर्देश पर लिया गया।
 

इसे भी पढ़ें: 5 करोड़ में Rape केस डील! Punjab CM Bhagwant Mann पर BJP का गंभीर आरोप


इस फैसले की घोषणा करते हुए APCC के महासचिव (संगठन) रमन्ना बरुआ ने एक संगठनात्मक सर्कुलर जारी किया। कांग्रेस ने कहा कि यह गठबंधन लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले क्षेत्रीय और वामपंथी दलों (जिनमें राइजर दल भी शामिल था) को एक साथ लाने के लिए बनाया गया था। इसका मकसद उन ताकतों के खिलाफ एकजुट विपक्ष पेश करना था जिन्हें कांग्रेस ने 'सांप्रदायिक ताकतें' बताया था। हालांकि, पार्टी ने आरोप लगाया कि गठबंधन के दौरान राइजर दल के नेताओं ने दुर्भावनापूर्ण प्रचार और व्यक्तिगत हमलों के जरिए बार-बार कांग्रेस को निशाना बनाया।

कांग्रेस पार्टी ने क्षेत्रीय पार्टी के नेतृत्व पर विपक्षी समूह में शामिल अन्य दलों के नेताओं के खिलाफ बेबुनियाद, अनुचित और अपमानजनक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस के मुताबिक, ऐसी घटनाओं ने गठबंधन सहयोगियों के बीच आपसी समझ को कमजोर कर दिया और आखिरकार राइजर दल के साथ राजनीतिक संबंध बनाए रखना असंभव हो गया। यह फैसला हाल के दिनों में दोनों पार्टियों के बीच हुई तीखी सार्वजनिक बहस के बाद लिया गया है। रविवार को APCC ने अखिल गोगोई की टिप्पणियों की आलोचना की थी और उन पर गठबंधन के अनुशासन का पालन न करने का आरोप लगाया था।
 

इसे भी पढ़ें: Kolkata Politics: अभिषेक बनर्जी के ऑफिस में तोड़फोड़ के बाद TMC-BJP में जुबानी जंग तेज, पुलिस ने 6 को किया गिरफ्तार


एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में, असम प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर और APCC के मीडिया और कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन बेदाब्रत बोरा ने गोगोई के बर्ताव पर सवाल उठाए और उन्हें "सरकारी एजेंट" की तरह काम करने के आरोप को लेकर चेतावनी दी। बोरा ने गौरव गोगोई और विपक्ष के पूर्व नेता देबब्रत सैकिया का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राज्य में बाढ़ राहत और पुनर्वास के कामों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
 
देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। 

Continue reading on the app

Vanakkam Poorvottar: हिमालय पर बढ़ते खतरे और पहाड़ों के फूटते गुस्से के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने की बैठक, India ने शुरू कर दी बड़ी तैयारी

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में हुई हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई है, जब नेपाल में हाल में आई भीषण हिमालयी आपदा ने पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी पैदा कर दी है। हम आपको बता दें कि नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अगस्त के अंत में ग्लेशियर और चट्टानी हिस्से के विशाल ढहाव के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं।

इस पृष्ठभूमि में भारत द्वारा ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और हिमस्खलन के खतरों पर की गई यह समीक्षा बदलते हिमालयी पर्यावरण के सामने एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय रणनीतिक पहल है। हम आपको बता दें कि बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग, भारत मौसम विज्ञान विभाग और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। केंद्रीय गृह सचिव ने विशेष रूप से संवेदनशील ग्लेशियल झीलों, हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों और संभावित जल-प्रवाह मार्गों की निरंतर एवं सक्रिय निगरानी पर जोर दिया।

इसे भी पढ़ें: भावी संकट की पूर्व चेतावनी है नेपाल त्रासदी

देखा जाये तो नेपाल की ताजा त्रासदी ने इस आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है। वैज्ञानिक अध्ययनों और उपग्रह विश्लेषणों के अनुसार यह घटना सामान्य नदी-बाढ़ नहीं थी। नेपाल के लांगटांग क्षेत्र के निकट ग्लेशियर और चट्टान का एक बड़ा हिस्सा ढहा, जिसके बाद बर्फ, पानी, चट्टानों और मलबे का विशाल प्रवाह संकरी हिमालयी घाटियों से नीचे आया और विनाशकारी फ्लैश फ्लड में बदल गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के पिघलने और पर्माफ्रॉस्ट के कमजोर होने से ऊंचाई वाले पर्वतीय ढलान अधिक अस्थिर हो रहे हैं। हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक जांच आवश्यक होती है, लेकिन गर्म होते हिमालय में ऐसी घटनाओं की संभावना बढ़ने पर व्यापक वैज्ञानिक सहमति है।

नेपाल पहले भी ऐसे खतरों का सामना कर चुका है। वर्ष 2024 में थामे घाटी में ग्लेशियल झीलों के टूटने से भारी तबाही हुई थी। ICIMOD की जांच में पाया गया कि एक विशाल रॉक एवलांच ने ग्लेशियल झील में गिरकर घटनाओं की श्रृंखला शुरू की, जिसके बाद झीलों से भारी मात्रा में पानी निकला और मलबा लगभग 80 किलोमीटर नीचे तक पहुंचा। यही कारण है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की बैठक में केवल राहत और बचाव नहीं, बल्कि Risk-informed Planning, निवारक शमन और सामुदायिक तैयारी पर जोर दिया गया। राज्यों को संवेदनशील झीलों की निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली मजबूत करने, चेतावनी को अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचाने, जल-प्रवाह मार्गों की पहचान करने और निकासी योजनाओं को व्यावहारिक बनाने की सलाह दी गई।

वैसे यह चिंता केवल नेपाल तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक शोध बताता है कि तथाकथित ‘थर्ड पोल’ यानि तिब्बती पठार और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में GLOF गतिविधियां बढ़ी हैं। एक अध्ययन के अनुसार दक्षिण-पूर्वी तिब्बत और चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में पिछले दशक में जोखिम विशेष रूप से बढ़ा है और संभावित GLOF से हजारों इमारतों, सड़कों, पुलों तथा 100 से अधिक जलविद्युत परियोजनाओं को खतरा हो सकता है।

चीन के तिब्बती क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा विशाल बुनियादी ढांचा और जलविद्युत विकास भी इस बहस को महत्वपूर्ण बनाता है। चीन ने निचले यारलुंग जांगबो पर दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना का निर्माण शुरू किया है। यह नदी आगे भारत में ब्रह्मपुत्र के रूप में प्रवेश करती है। परियोजना के पर्यावरणीय, पारिस्थितिक और सीमा-पार प्रभावों को लेकर भारत सहित डाउनस्ट्रीम देशों में चिंताएं व्यक्त की गई हैं। इसे सीधे नेपाल की आपदा का कारण कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा, लेकिन तेजी से गर्म होते, भूकंपीय रूप से सक्रिय और भूगर्भीय रूप से नाजुक हिमालय में बड़े पैमाने पर निर्माण और जलविद्युत विस्तार के लिए अत्यंत कठोर पर्यावरणीय तथा आपदा-जोखिम आकलन आवश्यक हैं।

भारत के लिए यह खतरा काल्पनिक नहीं है। 2023 की सिक्किम आपदा ने दिखाया कि हिमालयी झीलों में अस्थिरता कितनी तेजी से विनाशकारी रूप ले सकती है। ICIMOD के वैज्ञानिक अध्ययन में जलवायु परिवर्तन, पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने और मोरेन की अस्थिरता को उस आपदा के महत्वपूर्ण कारकों में शामिल किया गया था।

इसी संदर्भ में केंद्र सरकार ने 2024 में अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड के लिए 150 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय GLOF जोखिम शमन परियोजना को मंजूरी दी थी। केंद्र का हिस्सा 135 करोड़ रुपये है। गृह सचिव ने अब राज्यों को इस परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि हिमालयी आपदाओं से मुकाबला केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाकर नहीं किया जा सकता। वैज्ञानिक निगरानी, उपग्रह और जमीनी आंकड़ों का समन्वय, समयबद्ध चेतावनी, जिला प्रशासन की तत्परता, सुरक्षित निकासी मार्ग और प्रशिक्षित स्थानीय समुदाय, ये सभी एक ही सुरक्षा श्रृंखला के हिस्से हैं।

बहरहाल, नेपाल की त्रासदी ने दिखा दिया है कि हिमालय में आपदा की शुरुआत ऊंचे, दूरस्थ और कभी-कभी सीमा-पार क्षेत्रों से होती है, लेकिन उसका असर सैकड़ों किलोमीटर दूर बसे लोगों तक पहुंच सकता है। इसलिए भारत की यह बैठक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रतिक्रिया-केंद्रित व्यवस्था से आगे बढ़कर पूर्वानुमान, रोकथाम, जोखिम आधारित विकास और अंतर-एजेंसी समन्वय की दिशा में संकेत देती है। हिमालय अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य और जलस्रोत का प्रश्न नहीं है, वह भारत और पूरे दक्षिण एशिया की जल, ऊर्जा, पर्यावरण और मानव सुरक्षा का केंद्रीय प्रश्न बन चुका है।

-नीरज कुमार दुबे

Continue reading on the app

  Sports

Women’s Asia Cup: टीम इंडिया की सेमीफाइनल में धमाकेदार एंट्री, हॉन्ग कॉन्ग को 137 रन से रौंदा

भारतीय टीम ने पहले मैच में थाईलैंड को हराया था और अब हॉन्ग कॉन्ग को शिकस्त देकर ग्रुप स्टेज के दोनों मैच जीत लिए. आखिरी मैच अब 6 सितंबर को पाकिस्तान से है. Thu, 03 Sep 2026 23:05:58 +0530

  Videos
See all

Pakistan 100 Year Old Hindu Temple Demolished: पाक में 100 साल पुराना हिंदू मंदिर तोड़ा गया ! #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-03T17:46:26+00:00

Ayodhya Sapt Mandir Special 7: अयोध्या में भगवान राम के 'स्पेशल-7' | #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-03T17:44:20+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers