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WATCH VIDEO: जमीन की डील से भड़के बेटे, पुणे में सड़क पर बुजुर्ग माता-पिता को डंडों से पीटा

Pune Land Dispute: पुणे जिले के इंदापुर में जमीन के सौदे को लेकर दो बेटों ने सड़क पर अपने बुजुर्ग माता-पिता की डंडों से जमकर पिटाई कर दी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। जानिए क्या है पूरा मामला।

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भावी संकट की पूर्व चेतावनी है नेपाल त्रासदी

एक बात साफ हो जानी चाहिए कि दुनिया के देशों के लिए नेपाल त्रासदी को हल्के में लेना बड़ी भूल होगी। 2020 की कनाड़ा की रॉक स्लाइड और 2023 की सिक्किम में साउथ ल्होनक झील की ग्लेशियल फटने की घटना हमारे सामने हैं। यह कोई पहली या अंतिम घटनाएं नहीं हैं अपितु देखा जाएं तो यह समय रहते प्रयास नहीं किये गये तो ऐसी घटनाओं की आवृति जल्दी जल्दी और अतिविनाशकारी होगी, इससे नकारा नहीं जा सकता। जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले सालों में जिस तरह से प्रकृति का विकराल रुप देखने को मिल रहा है वह चाहे तूफानों के रुप में हो, चाहे जंगलों में लगती आग के कारण हो, ग्लेशियरों के पिघलने की हो, ग्लेशियलों के फटने की हो, भूकंपों की हो, बैमौसम आंधी बरसात की हो, अतिवृष्टि या अनावृष्टि की हो, मौसम चक्र में भले ही आंशिक परिवर्तन की हो या समुद्र्री तूफानों की बढती फ्रिक्वेंसी की हो बेहद गंभीर हो जाती है। वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों की लगातार चेतावनी को नजरअंदाज करने का ही परिणाम है कि नेपाल जैसी त्रासदियां आम होती जा रही है। यह केवल नेपाल या इससे जुड़े क्षेत्र के लिए ही गंभीर हालात नहीं हैं अपितु अमेरिका, चीन, भारत सहित दुनिया के दस देश नेपाल जैसी त्रासदी के मुहाने पर खड़े हैं। ग्लेशियल के फटने या यों कहें किग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी कि ग्लोफ जैसे हालात कभी भी इनके दायरें में आने वाले देशों में हो सकते हैं। यह भी सही है कि अभी तक भारत-नेपाल ही नहीं दुनिया के इस दायरें में आने वाला कोई भी देश इन आपदाओं से निपटने में पूरी तरह सक्षम नहीं हो सके हैं। जानकारों की मानें तो भारत, चीन, पाकिस्तान, पेरु के एक करोड़ 50 लाख लोग इनके दायरें में सीधे सीधे आ रहे हैं। यह वह लोग है जो इन ग्लेशियलों के एक किलोमीटर से 10 किलोमीटर के दायरें में रह रहे हैं। आज ग्लोफ खतरें के दायरें में भारत, पाकिस्तान, कनाड़ा, पेरु, अमेरिका, चिली, इटली, नेपाल और कोलंबिया आए हुए हैं।

उत्तराखंड त्रासदी हमारे सामने हैं और उस त्रासदी के परिणाम सामने होने के बावजूद लगभग साल दर साल भूस्खलन के मामले हर सीजन में सामने आ रहे हैं। यह साफ हो जाना चाहिए कि प्रकृति से एक सीमा से अधिक खिलवाड़ किया जाता है तो विकृति का सामना हमें करना ही पड़ेगा। जीवनदायी यही प्रकृति अपने विकराल रुप में पलटवार करती है। ऐसे में समय के साथ सबक लेना जरुरी हो जाता है। आज सारी दुनिया में पर्यावरण संरक्षण की बात तो की जाती है पर उस पर अमल पूरी तरह से हो नहीं पा रहा है। विशेषज्ञों की माने तो हालात यही रहे तो सदी के अंत तक समुद्र का जलस्तर दो मीटर तक बढ़ सकता है। तो दूसरी और अभी से समुद्र तटीय कई शहर डूबने की जद में आने की चेतावनियां दी जा रही है। 

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नेपाल की हालिया त्रासदी का कारण ग्लेशियल का फटना माना जा रहा है। दरअसल ग्लेशियर और ग्लेशियल में हमें भेद करके चलना होगा। ग्लेशियर भौगोलिक संरचना होती है। यह पहाड़ों और ध्रुवों पर लंबे समय से जमा बर्फ खण्ड होते हैं। यह अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण जमे रहते हैं पर जलवायु परिवर्तन और तापमान के बढने के कारण आज बड़ी मात्रा में ग्लेशियर के पिघलने की गति तेज होती जा रही है। दरअसल ग्लेशियरों के बड़े खण्डों के पिघल कर गिरने से ग्लेशियल झील बनती हैं। ग्लेशियल झील बन जाती है इसे हिमनदी झील भी कह सकते हैं। नेपाल की हालिया त्रासदी ग्लेशियल झील के फटने के कारण ही हुई है। वैज्ञानिकों की माने तो ग्लेशियलों के निर्माण की गति में काफी तेजी आई है। यदि हम हिमालय क्षेत्र की ही बात करें तो सतलुज बेसिन में 2019 में 560 ग्लेशियल झीलें थी जो चार साल यानी की 2023 तक 1048 हो गई हैं। नेपाल त्रासदी ग्लेशियल लेक आदटबर्स्ट फ्लड यानी की ग्लोफ का परिणाम है। साधारण शब्दों में कहा जाएं तो यह ग्लेशियल झील के फटने का परिणाम है। ऐसा नहीं है कि वैज्ञानिक इन हालातों पर नजर नहीं रख रहे हो बल्कि देखा जाएं तो लीड्स विश्वविद्यालय के ग्लेशियल फ्लडिंग के विशेषज्ञ डॉ. जानाथन कारीविक पहले ही चेता चुके हैं। हमारे देश के ही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एनडीएमए के विशेषज्ञों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी को रिपोर्ट प्रस्तुत कर हालात से रुबरु कराने के साथ ही ठोस सुझाव भी दिए हैं। दरअसल एक सीमा से अधिक प्रकृति से छेड़छाड़ का ही परिणाम इस तरह की त्रासदियां होती हैं। आज लाख चेतानें के बावजूद सतलुज बेसिन में बांधों के साथ साथ विद्युत परियोजनाओं सहित विकास परियोजनाओं का दखल बढ़ा है। एक सीमा से अधिक मानवीय दखल बढ़ी है। इससे तापमान में स्वाभाविक रुप से बढ़ोतरी होने के साथ ही अपशिष्ट भी फैल रहा है। दरअसल प्रकृति से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुप से छेडछाड़ बढ़ रही है। एनडीएमए ने साफ साफ कहा है कि सतलुज बेसिन में नए निर्माण कार्यां या नई परियोजनाओं की स्वीकृति से पहले उनके परिणामों का भली प्रकार से अध्ययन और विश्लेषण किया जाएं। परिणामों का आंकलन कर गुणावगुण के आधार पर निर्णय लिए जाए। पर्यावरणीय परिणामों को देखकर ही कोई निर्णय लिया जाएं। यह भी देखा जाएं कि ऐसे स्थानों में मानवीय दखल को एक सीमित दायरें तक ही रखा जाएं। इसके साथ ही जलवायु व पर्यावरण विशेषज्ञों का दायित्व अधिक हो जाता है और आवश्यकता होने पर प्रकृति को बचाने के लिए इस क्षेत्र में कार्य कर रहे गैरसरकारी संगठनों को भी आगे आना होगा। आपदा प्रबंधन को भी ऐसा सिस्टम विकसित करना होगा जिससे इस तरह की घटनाओं की समय रहते चेतावनी मिल सके ताकि कम से कम जन हानि को तो बचाया जा सके। 

- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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  Sports

Mithali Raj से आगे निकलीं Smriti Mandhana, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली Indian Player बनीं

दुबई में भारत की सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने गुरुवार को महिला क्रिकेट की दुनिया में एक और बड़ा मुकाम हासिल कर इतिहास रच दिया। हांगकांग के खिलाफ महिला एशिया कप के मुकाबले में उतरते ही मंधाना ने अपनी शानदार बल्लेबाजी के साथ कई पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। उन्होंने भारतीय क्रिकेट की दिग्गज मिताली राज को पीछे छोड़ते हुए महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

मंधाना ने यह उपलब्धि अपने 303वें अंतरराष्ट्रीय पारी में हासिल की। उन्होंने मिताली राज के 10,868 रन के आंकड़े को पीछे छोड़ा। इसके साथ ही वह महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। न्यूजीलैंड की सूजी बेट्स 10,740 रन के साथ इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं। इंग्लैंड की चार्लोट एडवर्ड्स 10,273 रन और वेस्टइंडीज की स्टेफनी टेलर 10,007 रन के साथ अगले स्थानों पर हैं।

गौरतलब है कि रिकॉर्ड बनाने के साथ मंधाना ने मुकाबले में बल्ले से भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने केवल 64 गेंदों में 124 रन की तूफानी पारी खेली। आखिरी ओवर में रन आउट होने से पहले उनकी पारी में चौकों और छक्कों की बारिश देखने को मिली। मंधाना की इस पारी के दम पर भारत ने निर्धारित ओवरों में पांच विकेट पर 193 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया।

यह पारी मंधाना के अंतरराष्ट्रीय करियर का 18वां शतक भी रहा। इसके साथ उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की पूर्व कप्तान मेग लैनिंग को पीछे छोड़ दिया, जिनके नाम अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में 17 शतक थे। मंधाना अब इस सूची में अकेले शीर्ष पर हैं। दक्षिण अफ्रीका की लौरा वोल्वार्ड्ट भी 17 शतकों के साथ उनके करीब हैं, जबकि वेस्टइंडीज की हेली मैथ्यूज के नाम 15 शतक हैं।

मंधाना ने अपनी इस पारी के दौरान एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 50 या उससे अधिक रन बनाने वाली पारियों की संख्या 93 हो गई है। इस मामले में उन्होंने मिताली राज की बराबरी कर ली है। दोनों के नाम अब महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा 93 ऐसी पारियां हैं।

छोटे प्रारूप में भी मंधाना का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। महिला ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उनके नाम 37 बार 50 या उससे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड है। ऑस्ट्रेलिया की बेथ मूनी 33 ऐसी पारियों के साथ इस सूची में उनके पीछे हैं।

बता दें कि हांगकांग के खिलाफ 124 रन की पारी महिला एशिया कप के इतिहास में किसी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर भी बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड श्रीलंका की चमारी अट्टापट्टू के नाम था, जिन्होंने 2024 में डंबुला में मलेशिया के खिलाफ नाबाद 119 रन बनाए थे।

मंधाना का 124 रन महिला ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किसी भारतीय बल्लेबाज का भी सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है। इसके अलावा वह महिला ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक से ज्यादा शतक लगाने वाली पहली भारतीय बल्लेबाज बन गई हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, मंधाना का यह रिकॉर्ड उनके लगातार मजबूत होते करियर का हिस्सा है। वह महज 280 अंतरराष्ट्रीय पारियों में 10 हजार रन पूरे करने वाली महिला क्रिकेट की सबसे तेज बल्लेबाज भी बनी थीं। इतना ही नहीं, वह तीनों प्रारूपों में शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर हैं।

महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली बल्लेबाजों की सूची में अब स्मृति मंधाना 10,880 रन के साथ सबसे ऊपर हैं। उनके पीछे मिताली राज 10,868, सूजी बेट्स 10,740, चार्लोट एडवर्ड्स 10,273 और स्टेफनी टेलर 10,007 रन के साथ मौजूद हैं। मंधाना की इस उपलब्धि ने न केवल भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है, बल्कि विश्व क्रिकेट में उनकी लगातार बढ़ती विरासत को भी और मजबूत किया।
Thu, 03 Sep 2026 22:31:00 +0530

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