Janmashtami Bhog Recipes: माखन-मिश्री से खीर और लड्डू तक, जन्माष्टमी पर कान्हा को लगाएं ये 8 खास भोग
Janmashtami Bhog Recipes: जन्माष्टमी पर घर में पूजा की तैयारियों के साथ भोग की थाली को लेकर भी उत्साह रहता है। कान्हा को माखन-मिश्री बेहद प्रिय मानी जाती है, लेकिन इसके अलावा खीर, पंचामृत, पंजीरी, हलवा और लड्डू जैसे कई पकवान भी भोग में शामिल किए जा सकते हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें से ज्यादातर चीजें घर में मौजूद सामान से आसानी से तैयार हो जाती हैं।
1. माखन-मिश्री
जन्माष्टमी के भोग में माखन-मिश्री सबसे आसान और खास विकल्प है। इसके लिए ताजा माखन और मिश्री की जरूरत होगी। दोनों को एक साथ मिलाकर साफ कटोरी में रखें और पूजा के समय कान्हा को भोग लगाएं।
2. पंचामृत
पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, मिश्री और थोड़ा घी लें। सभी चीजों को एक बर्तन में डालकर अच्छी तरह मिला लें। पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में भी ग्रहण किया जा सकता है।
3. खीर
भोग की थाली में चावल की खीर भी शामिल कर सकते हैं। दूध में चावल डालकर धीमी आंच पर पकाएं। चावल अच्छी तरह गल जाएं तो इसमें चीनी, इलायची और कटे हुए मेवे डाल दें। कुछ देर पकाने के बाद स्वादिष्ट खीर तैयार हो जाएगी।
4. मिश्री पंजीरी
मिश्री पंजीरी के लिए आटे को घी में अच्छी तरह भून लें। इसमें मिश्री का पाउडर और कटे हुए मेवे मिलाएं। मिश्रण ठंडा होने के बाद इसे भोग के लिए परोसा जा सकता है।
5. फलों का भोग
अगर आप बिना ज्यादा मेहनत के भोग तैयार करना चाहते हैं तो फलों की प्लेट सबसे अच्छा विकल्प है। केला, सेब, अंगूर और अपनी पसंद के मौसमी फलों को धोकर साफ प्लेट में सजाएं और भोग में शामिल करें।
6. सूजी का हलवा
सूजी का हलवा बनाने के लिए पहले सूजी को घी में धीमी आंच पर सुनहरा होने तक भूनें। अब इसमें दूध या पानी और चीनी डालकर लगातार चलाते रहें। हलवा गाढ़ा होने पर इलायची डालें और गैस बंद कर दें।
7. मूंग दाल का पकवान
भोग की थाली में मूंग दाल का पकवान भी रखा जा सकता है। इसके लिए भिगोई हुई मूंग दाल को पीसकर आटे के साथ मिलाएं और अपनी पसंद के अनुसार पकवान तैयार करें। इन्हें घी में सेंककर या तलकर भोग में शामिल किया जा सकता है।
8. बेसन के लड्डू
बेसन के लड्डू बनाने के लिए बेसन को घी में धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनें। जब बेसन से खुशबू आने लगे तो इसे ठंडा करें और इसमें बूरा या पिसी चीनी और इलायची मिलाएं। मिश्रण से छोटे-छोटे लड्डू बना लें।
सजाएं कान्हा की भोग थाली
भोग की सभी चीजों को छोटे-छोटे कटोरियों में रखकर एक साफ थाली में सजाएं। थाली में माखन-मिश्री, पंचामृत, खीर, पंजीरी, फल, हलवा और लड्डू जैसे पकवान रखें।
थाली को तुलसी के पत्ते और फूलों से भी सजा सकते हैं। पूजा के दौरान श्रद्धा से भगवान श्रीकृष्ण को भोग अर्पित करें और इसके बाद परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
यह भी पढ़ें: सोसाइटी में बच्चों की डांस परफॉर्मेंस की तैयारी? इन गानों से बनाएं जन्माष्टमी की शानदार प्लेलिस्ट
Supreme Court: लॉ स्टूडेंट्स पर बार काउंसिल नहीं कर सकता अनुशासनात्मक कार्रवाई, NALSAR विवाद में कोर्ट की अहम टिप्पणी
NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बार काउंसिल की शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BCI या किसी State Bar Council का वैधानिक अनुशासनात्मक अधिकार लॉ स्टूडेंट्स पर लागू नहीं होता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल का अनुशासनात्मक अधिकार उस समय लागू होता है, जब कोई व्यक्ति एडवोकेट के रूप में एनरोल हो जाता है। लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्रों के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार उनके संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान के पास रहता है।
यूनिवर्सिटी अपने नियमों के तहत ले सकती है कार्रवाई
तीन जजों की बेंच ने कहा कि लॉ स्टूडेंट्स के आचरण से जुड़े मामलों को संबंधित यूनिवर्सिटी या शिक्षण संस्थान अपने नियमों और विनियमों के तहत देख सकते हैं।
इसका मतलब यह है कि किसी छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जरूरत होने पर पहले संबंधित शैक्षणिक संस्थान के नियम लागू होंगे। बार काउंसिल का नियामक और अनुशासनात्मक अधिकार मुख्य रूप से अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण से जुड़ा है।
CJI सूर्यकांत की बेंच ने की टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब Bar Council of India के NALSAR Law University से जुड़े एक आदेश को लेकर विवाद सामने आया था। BCI की ओर से जारी आदेश को बाद में वापस ले लिया गया था।
क्या है NALSAR विवाद?
NALSAR यानी National Academy of Legal Studies and Research देश के प्रमुख कानून विश्वविद्यालयों में शामिल है। इससे जुड़े मामले में BCI की कार्रवाई और उसके बाद आदेश वापस लिए जाने के घटनाक्रम ने लॉ एजुकेशन और बार काउंसिल की शक्तियों को लेकर सवाल खड़े किए।
सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी में इसी व्यापक मुद्दे के संदर्भ में यह स्पष्ट किया गया कि लॉ कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे छात्रों पर अनुशासनात्मक अधिकार और बार काउंसिल में एनरोल हो चुके अधिवक्ताओं पर नियामक अधिकार अलग-अलग हैं।
छात्रों और अधिवक्ताओं के मामले में फर्क
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का अहम पहलू यह है कि लॉ स्टूडेंट और एनरोल्ड एडवोकेट की कानूनी स्थिति अलग है। छात्र के तौर पर व्यक्ति संबंधित शिक्षण संस्थान के नियमों के अधीन रहता है, जबकि एडवोकेट के रूप में एनरोल होने के बाद बार काउंसिल के पेशेवर अनुशासन संबंधी नियम लागू होते हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi





