व्रत में Satvik Food ही क्यों खाया जाता है? जानिए इसके पीछे की पूरी परंपरा
हिंदू धर्म में त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। व्रत का मतलब सिर्फ भूखा रहना नहीं है, बल्कि इस दौरान शरीर, मन और विचारों पर संयम रखने पर जोर दिया जाता है। यही वजह है कि व्रत में खान-पान का भी खास ध्यान रखा जाता है। व्रत के दौरान ज्यादातर लोग सात्विक और हल्का भोजन करते हैं। माना जाता है कि इससे शरीर पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता और पूजा-पाठ, ध्यान और मंत्र जाप में मन लगाने में आसानी होती है।
व्रत में सात्विक भोजन ही क्यों खाया जाता है?
हमने अक्सर सुना है, "जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन।" सात्विक भोजन को सादा, शुद्ध और आसानी से पचने वाला माना जाता है। व्रत का उद्देश्य सिर्फ खाना छोड़ना नहीं, बल्कि खुद को संयमित रखना और भगवान की भक्ति में मन लगाना भी है। अगर व्रत में बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी खाना खाया जाए तो शरीर में सुस्ती और आलस महसूस हो सकता है। वहीं, हल्का और सात्विक भोजन शरीर को आराम देता है और मन को शांत रखने में मदद कर सकता है।
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व्रत में क्या-क्या खा सकते हैं?
व्रत में फलाहार को सबसे आसान और अच्छा विकल्प माना जाता है। आप अपनी पसंद के अनुसार सेब, केला, अनार, पपीता, नारियल जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा एनर्जी के लिए मखाना और सूखे मेवे भी खाए जाते हैं। दूध, दही और छाछ भी व्रत के दौरान कई लोग अपनी डाइट में शामिल करते हैं।
सामान्य अनाज की जगह व्रत में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और राजगीरा जैसी चीजों से बने व्यंजन खाए जाते हैं। आलू और शकरकंद भी व्रत के दौरान खाए जाने वाले आम खाद्य पदार्थ हैं।
व्रत में सेंधा नमक ही क्यों खाया जाता है?
व्रत के दौरान सामान्य सफेद नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा है। इसे कई धार्मिक परंपराओं में उपवास के लिए उपयुक्त माना जाता है। व्रत में फल, सब्जियों या चाट जैसी चीजों में स्वाद बढ़ाने के लिए सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसे "सबसे शुद्ध" या स्वास्थ्य के लिए अपने आप बेहतर मानने का दावा हर स्थिति में सही नहीं है, सेंधा नमक भी मुख्य रूप से नमक ही है, इसलिए इसकी मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
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व्रत में किन चीजों से परहेज किया जाता है?
व्रत के नियमों के अनुसार आमतौर पर गेहूं, चावल, दाल, चना और मटर जैसे रोजमर्रा के अनाज और दालों से परहेज किया जाता है। कई हिंदू परंपराओं में प्याज और लहसुन को तामसिक भोजन माना जाता है, इसलिए व्रत के दौरान इन्हें नहीं खाया जाता। इसके अलावा मांस, अंडा और शराब जैसी चीजों से भी पूरी तरह दूरी रखी जाती है। व्रत के दौरान बहुत ज्यादा तेल और मसाले वाला खाना खाने से भी बचना चाहिए। आखिर व्रत का मकसद सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि सादगी और संयम के साथ दिन बिताना है।
हर व्रत के नियम अलग हो सकते हैं
यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि हर व्रत में खान-पान के नियम एक जैसे नहीं होते। नवरात्रि, एकादशी और जन्माष्टमी जैसे व्रतों में फलाहार और खाने-पीने के नियमों में अंतर हो सकता है। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ व्रतों में दिन में एक बार फलाहार या सात्विक भोजन किया जाता है। इसलिए किसी भी व्रत को रखने से पहले उसकी परंपरा और नियमों की जानकारी लेना बेहतर होता है।
सात्विक भोजन व्रत का अहम हिस्सा
व्रत में सात्विक भोजन को सिर्फ एक खान-पान की परंपरा नहीं, बल्कि सादगी, संयम और ईश्वर के प्रति समर्पण से जोड़कर देखा जाता है। हल्का और सीमित भोजन करने से व्यक्ति अपना ध्यान पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों पर केंद्रित करने की कोशिश करता है। इसलिए अगली बार जब आप व्रत रखें तो सिर्फ यह न सोचें कि क्या खाना है, बल्कि यह भी समझें कि व्रत का असली उद्देश्य संयम और भक्ति है।
PM Modi ने SIAM सम्मेलन में वाहन उद्योग से 2047 तक विकसित भारत के लिए नवाचार बढ़ाने का किया आह्वान
(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, तीन सितंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के वाहन उद्योग से नवाचार जारी रखने, उत्कृष्टता हासिल करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में सक्रिय रूप से साहसिक राह बनाने का बृहस्पतिवार को आह्वान किया। ‘सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (सियाम) के वार्षिक सम्मेलन 2026 में बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री मोदी का संदेश पढ़ा गया। मोदी ने इसमें कहा कि हाल में हुए मुक्त व्यापार समझौतों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने के साथ, भारत का वाहन क्षेत्र जिसे दुनिया के कई हिस्सों में पहले से ही पहचान मिली हुई है, अब वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी और बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में है।
वाहन उद्योग संगठन सियाम के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने प्रधानमंत्री का संदेश पढ़ते हुए कहा, ‘‘मैं भारतीय वाहन उद्योग से नवाचार जारी रखने, उत्कृष्टता हासिल करने और सक्रिय रूप से विकसित भारत की दिशा में साहसिक राह बनाने का आह्वान करता हूं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि इस यात्रा से परिवहन क्षेत्र में बदलाव लाने वाले अवसर तथा उल्लेखनीय वृद्धि आएगी तथा राष्ट्रीय विकास के प्रमुख आधार के रूप में परिवहन और मजबूत होगा। मोदी ने कहा, ‘‘पिछले एक दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा है। जैसे-जैसे हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, वाहनों की मांग भी बढ़ रही है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि राजमार्गों तथा अन्य बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार से लोगों और वस्तुओं की आवाजाही सुगम हो रही है तथा वाहन उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
मोदी ने कहा, ‘‘बेहतर संपर्क और अधिक दक्ष लॉजिस्टिक, लागत कम कर रहे हैं और भारतीय विनिर्माण को अधिक प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं। इससे वाहन क्षेत्र मजबूत हो रहा है और भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान मिल रहा है।’’ उन्होंने कहा कि भारत स्वच्छ और अधिक सतत परिवहन व्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘चार्जिंग से जुड़े बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार से इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक अपनाने को बढ़ावा मिल रहा है और नवाचार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।’’ मोदी के संदेश में कहा गया कि भारत जब परिवहन की अगली पीढ़ी की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में सियाम इस बदलाव को आकार देने और भारत की वाहन विनिर्माण क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हाल के वर्षों में कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए गए सुधारों से उद्योग को नई गति मिली है। इनमें अप्रचलित कानूनों को हटाना और अनावश्यक अनुपालन समाप्त करना शामिल है। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों ने वाहन उद्योग की विनिर्माण क्षमताओं को और मजबूत किया है।
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