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Mumbai में Shivraj Chouhan का बड़ा बयान: 3.5 करोड़ Lakhpati Didi, लक्ष्य 6 करोड़

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को मुंबई में 'लखपति दीदियों' के साथ वृक्षारोपण अभियान में हिस्सा लिया और बैंकरों के साथ बैठक से पहले स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं से बातचीत की। चौहान ने कहा कि आज मैंने मुंबई में 'लखपति दीदियों' के साथ पेड़ लगाए। हमारे प्रधानमंत्री ने छह करोड़ लखपति दीदियां बनाने का संकल्प लिया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि लगभग 3.5 करोड़ लखपति दीदियां पहले ही बन चुकी हैं, और अब हम छह करोड़ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
 

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मंत्री ने माना कि महिलाओं को बैंक लोन लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि इसमें कई तरह की औपचारिकताएं और लोन मिलने में देरी होती है। उन्होंने कहा कि बैंकरों से मिलने से पहले, आज मुंबई में एक बैठक रखी गई है; हमने तय किया कि पहले खुद उन महिलाओं से बात की जाए जो सेल्फ-हेल्प ग्रुप में काम कर रही हैं और 'लखपति दीदी' बनने के लिए अलग-अलग तरह के बिज़नेस शुरू कर रही हैं। हम उनकी मुश्किलों और चुनौतियों को समझना चाहते हैं।

असम, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड से 100 से ज़्यादा 'लखपति दीदी' इस बातचीत में वर्चुअली शामिल हुईं। एक लाभार्थी, जो कस्टमर सर्विस पॉइंट (CSP) सेंटर चलाती हैं, ने बताया कि उन्हें चार अलग-अलग लोन मिले, लेकिन दूसरी महिलाओं को ऐसा नहीं हुआ और कुछ बैंक शाखाओं ने एक से ज़्यादा आवेदन लेने से मना कर दिया। इसके जवाब में चौहान ने कहा कि हम बैंक से पूछेंगे कि वे एक से ज़्यादा आवेदन क्यों ले रहे हैं।
 

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महाराष्ट्र के एक स्वयं-सहायता समूह की सदस्य ने बताया कि वहाँ की 21.49 प्रतिशत आबादी आदिवासी है और उनके पास बैंकिंग के लिए ज़रूरी डिजिटल दस्तावेज़ नहीं हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं को उनके पतियों के खराब सिबिल (CIBIL) स्कोर की वजह से लोन नहीं मिल पा रहा है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि वह बैंक अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाएंगे। बिजनौर की एक महिला उद्यमी ने बताया कि उन्होंने 2023 में साबुन बनाने का काम शुरू किया था, जो तेज़ी से बढ़ा; लेकिन बैंक ने और विस्तार के लिए लोन देने से मना कर दिया, जिससे उनकी फाइलें अटकी रह गईं। इसके अलावा, पुणे की एक लाभार्थी, जो 'उमेद अभियान' योजना के तहत 'बैंक सखी' के तौर पर काम कर रही हैं, ने बताया कि उन्हें बैंक से 4 लाख रुपये मिले, जबकि कुछ बैंकों ने प्रदूषण प्रमाण-पत्र (pollution certificate) की मांग की।
 
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Shiv Sena Case: SC में शिंदे गुट की दलील, कहा- Uddhav Thackeray ने पार्टी को बनाया 'निजी जागीर'

शिवसेना के नाम और 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे गुट ने बुधवार को दावा किया कि पार्टी संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने संगठन में सत्ता के केंद्रीकरण को रोकने और उसे अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए एक ढांचा तैयार किया था, लेकिन उद्धव ठाकरे ने 2018 में पार्टी संविधान में संशोधन कर इस व्यवस्था को काफी हद तक बदल दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अबेंच के सामने शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने दलीलें रखीं। शिंदे गुट के वकील ने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष था और इसी वजह से उनके गुट ने दावा किया कि वह मूल शिवसेना है।

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शिंदे गुट की तरफ से चुनाव चिह्न के मुद्दे पर बहस करने वाले कौल ने उद्धव गुट की इस दलील का विरोध किया कि ECI ने शिवसेना के 2018 के पार्टी संविधान की वैधता की जांच करते समय ऐसे अधिकार का इस्तेमाल किया जो कानून में नहीं है। उन्होंने कहा कि 1994 से ही, ECI अलग-अलग आदेशों के ज़रिए सभी राजनीतिक दलों को लिखता रहा है - चाहे चिट्ठियों के ज़रिए हो या जारी किए गए आदेशों के ज़रिए - कि आपके संविधान लोकतांत्रिक होने चाहिए। वजह यह है कि अगर कामचलाऊ व्यवस्था (ad-hocism) और मनमानी होगी, तो हम कैसे तय करेंगे कि बहुमत किसके पास है? राजनीतिक दल का बहुमत एक अहम पैमाना है, जिसमें बड़ी संख्या में चुने हुए सदस्य होने चाहिए। क्योंकि यही कार्यकर्ताओं और आम लोगों की इच्छा को दिखाता है। अगर वे चुने हुए नहीं हैं, बल्कि कामचलाऊ व्यवस्था से हैं, तो हम कभी तय नहीं कर पाएंगे। और फिर इन आदेशों में ECI ने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दलों का यह नज़रिया इतना सामंती और तानाशाही वाला है कि वे पार्टियों को अपनी निजी जागीर समझते हैं। और यह सिर्फ़ शिवसेना के मामले में नहीं है... इससे पहले भी, दूसरे राजनीतिक दलों के मामले में ECI ने कहा था कि पार्टी में चुनाव होने चाहिए और ऐसा नहीं हो सकता कि 1-2 लोग ही बड़ी संख्या में लोगों को नियुक्त कर दें। साफ़ तौर पर चिट्ठियाँ भेजी गईं और कहा गया कि RP एक्ट में धारा 29A के आने के बाद, पार्टियों को यह पक्का करना चाहिए कि पार्टी के संविधान लोकतांत्रिक हों। 

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US Open 2026 में एक चिड़िया ने करा दिया ड्रामा, डेनिल मेदवेदेव पॉइंट जीते; मगर अंपायर ने...

US Open 2026 में एक चिड़िया ने कोर्ट पर ड्रामा कर दिया। डेनिल मेदवेदेव पॉइंट जीत गए थे, लेकिन अंपायर ने मैच को रोक दिया, क्योंकि जब विनिंग शॉट मेदवेदेव ने खेला तो चिड़िया नेट से उड़ गई थी।  Thu, 03 Sep 2026 13:46:42 +0530

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