Shiv Sena Case: SC में शिंदे गुट की दलील, कहा- Uddhav Thackeray ने पार्टी को बनाया 'निजी जागीर'
शिवसेना के नाम और 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे गुट ने बुधवार को दावा किया कि पार्टी संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने संगठन में सत्ता के केंद्रीकरण को रोकने और उसे अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए एक ढांचा तैयार किया था, लेकिन उद्धव ठाकरे ने 2018 में पार्टी संविधान में संशोधन कर इस व्यवस्था को काफी हद तक बदल दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अबेंच के सामने शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने दलीलें रखीं। शिंदे गुट के वकील ने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष था और इसी वजह से उनके गुट ने दावा किया कि वह मूल शिवसेना है।
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शिंदे गुट की तरफ से चुनाव चिह्न के मुद्दे पर बहस करने वाले कौल ने उद्धव गुट की इस दलील का विरोध किया कि ECI ने शिवसेना के 2018 के पार्टी संविधान की वैधता की जांच करते समय ऐसे अधिकार का इस्तेमाल किया जो कानून में नहीं है। उन्होंने कहा कि 1994 से ही, ECI अलग-अलग आदेशों के ज़रिए सभी राजनीतिक दलों को लिखता रहा है - चाहे चिट्ठियों के ज़रिए हो या जारी किए गए आदेशों के ज़रिए - कि आपके संविधान लोकतांत्रिक होने चाहिए। वजह यह है कि अगर कामचलाऊ व्यवस्था (ad-hocism) और मनमानी होगी, तो हम कैसे तय करेंगे कि बहुमत किसके पास है? राजनीतिक दल का बहुमत एक अहम पैमाना है, जिसमें बड़ी संख्या में चुने हुए सदस्य होने चाहिए। क्योंकि यही कार्यकर्ताओं और आम लोगों की इच्छा को दिखाता है। अगर वे चुने हुए नहीं हैं, बल्कि कामचलाऊ व्यवस्था से हैं, तो हम कभी तय नहीं कर पाएंगे। और फिर इन आदेशों में ECI ने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दलों का यह नज़रिया इतना सामंती और तानाशाही वाला है कि वे पार्टियों को अपनी निजी जागीर समझते हैं। और यह सिर्फ़ शिवसेना के मामले में नहीं है... इससे पहले भी, दूसरे राजनीतिक दलों के मामले में ECI ने कहा था कि पार्टी में चुनाव होने चाहिए और ऐसा नहीं हो सकता कि 1-2 लोग ही बड़ी संख्या में लोगों को नियुक्त कर दें। साफ़ तौर पर चिट्ठियाँ भेजी गईं और कहा गया कि RP एक्ट में धारा 29A के आने के बाद, पार्टियों को यह पक्का करना चाहिए कि पार्टी के संविधान लोकतांत्रिक हों।
Chhattisgarh में Janmashtami पर Dry Day घोषित, शराब और मांस बिक्री पर रोक
रायपुर, तीन सितंबर छत्तीसगढ़ सरकार ने जन्माष्टमी के अवसर पर चार सितंबर को शुष्क दिवस घोषित किया है और इस दौरान शराब बेचने या परोसने वाली सभी दुकानों, बार, होटल-बार, क्लब और अन्य लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठानों को बंद रखने का आदेश दिया गया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने इस मौके पर शहरी इलाकों में बूचड़खानों और मांस बेचने वाली दुकानों को भी बंद रखने का आदेश दिया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार रात सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘‘ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर चार सितंबर को संपूर्ण छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस घोषित किया गया है। इस दिन प्रदेश की सभी मदिरा दुकानें, बार, होटल-बार, क्लब सहित मदिरा विक्रय एवं परोसने वाले सभी लाइसेंसी प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।’’ अवैध मदिरा के परिवहन, संग्रहण और विक्रय पर कड़ी निगरानी रखते हुए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने लिखा, ‘‘ हमारी संस्कृति और आस्था से जुड़े इस पावन पर्व को श्रद्धा, सात्विकता और सामाजिक सद्भाव के वातावरण में मनाएं।
भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से छत्तीसगढ़ में सुख, शांति और समृद्धि का विस्तार हो। जय श्रीकृष्ण।’’ एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर चार सितंबर को छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस घोषित करने तथा नगरीय निकाय क्षेत्रों में पशुवध गृह तथा मांस बिक्री की दुकानों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। बयान में कहा गया कि यह निर्णय स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की मांग पर मुख्यमंत्री साय ने लिया है।
अधिकारियों ने बताया कि यादव ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे पावन अवसर पर जनभावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया यह निर्णय अभिनंदनीय है।
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