बार-बार शरीर में होती है अकड़न? डाइट में शामिल करें ये चीजें, बढ़ेगा लचीलापन
नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। शरीर का लचीलापन सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितनी देर तक स्ट्रेचिंग करते हैं। आपके खाने का भी इसमें बड़ा योगदान हो सकता है। अगर शरीर को रोजाना सही मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और जरूरी तत्व नहीं मिल रहे हैं तो मांसपेशियों की ताकत और उनकी काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
वहीं संतुलित खाना शरीर को व्यायाम के बाद खुद को ठीक करने और मजबूत बनाने में मदद करता है। हालांकि यह बात साफ है कि कोई एक फल, सब्जी या दूसरा खाद्य पदार्थ खाने से शरीर अचानक लचीला नहीं हो जाता। इसके लिए सही खान-पान के साथ नियमित व्यायाम और स्ट्रेचिंग भी जरूरी है।
सबसे पहले बात प्रोटीन वाले खाने की तो अंडा, दूध, दही, पनीर, सोया, चना, राजमा और चिकन इसके अच्छे स्रोत हैं। प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों को बनाने और उनकी मरम्मत करने में मदद करता है। जब हम कसरत करते हैं तो मांसपेशियों पर थोड़ा दबाव पड़ता है। इसके बाद शरीर को उनकी मरम्मत के लिए अमीनो एसिड की जरूरत होती है, जो प्रोटीन से मिलते हैं। मजबूत और स्वस्थ मांसपेशियां शरीर के अंगों को बेहतर तरीके से हिलाने-डुलाने में मदद करती हैं। प्रोटीन सीधे तौर पर शरीर को लचीला नहीं बनाता, लेकिन लचीलेपन के लिए जरूरी मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
विटामिन सी भी इस मामले में काफी काम का है। आंवला, अमरूद, नींबू, संतरा, कीवी, टमाटर और शिमला मिर्च जैसे खाद्य पदार्थों में विटामिन सी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। शरीर में विटामिन सी का एक महत्वपूर्ण काम कोलेजन बनाने में मदद करना है। कोलेजन एक तरह का प्रोटीन है, जो त्वचा के अलावा हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों को जोड़कर रखने वाले हिस्सों को मजबूती देने में मदद करता है। शरीर में कोलेजन बनाने के लिए विटामिन सी की जरूरत होती है। यही वजह है कि विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां शरीर के इन हिस्सों की सामान्य सेहत बनाए रखने में मदद करती हैं।
अब बात मैग्नीशियम की। बादाम, काजू, तिल, कद्दू के बीज, साबुत अनाज, पालक और दूसरी हरी सब्जियां मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं। यह तत्व हमारी मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होता है। जब हम हाथ-पैर हिलाते हैं तो मांसपेशियां कभी सिकुड़ती हैं और कभी ढीली होती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मैग्नीशियम की भी भूमिका होती है। इसलिए खाने में मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा रखना मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है।
ओमेगा-3 वाली चीजें भी खाने में शामिल की जा सकती हैं। अलसी के बीज, चिया के बीज और अखरोट जैसी चीजों में ओमेगा-3 होता है, जो शरीर में होने वाली सूजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। शरीर में ज्यादा सूजन होने पर कई बार मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द हो सकता है। ऐसे में ओमेगा-3 शरीर के सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।
पानी भी शरीर के लचीलेपन के लिए जरूरी है। कई लोग खाने पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन पानी की मात्रा को नजरअंदाज कर देते हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान और कमजोरी महसूस होती है। इससे कसरत करने की क्षमता भी कम हो सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। गर्मी में या ज्यादा कसरत करने पर शरीर से पसीने के जरिए पानी निकलता है, ऐसे में पानी की जरूरत और बढ़ सकती है।
--आईएएनएस
पीके/वीसी
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तमिलनाडु के पूर्व CM एमके स्टालिन को मद्रास हाईकोर्ट से बड़ा झटका, चुनावी हार को लेकर दायर याचिका खारिज
M.K. Stalin: तमिलनाडु के पूर्व सीएम और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन को गुरुवार को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा. दरअसल, कोर्ट ने कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में अपनी चुनावी हार को लेकर दायर उनकी याचिका खारिज कर दी. यह आदेश दो जजों की बेंच ने दिया, जिसमें कहा गया कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री की याचिका सुनवाई के लायक नहीं है.
DMK का गढ़ रहा है कोलाथुर
बता दें कि तमिलनाडु की कोलाथुर डीएमके और स्टालिन का गढ़ रहा है, लेकिन हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में वे तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) के नेता वीएस बाबू से लगभग 8,000 वोटों के अंतर से हार गए. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अनुसार, स्टालिन को 74,202 (40.32 प्रतिशत) वोट मिले, जबकि बाबू को 82,997 (45.09 प्रतिशत) वोट प्राप्त हुए.
4 मई को नतीजे घोषित होने के बाद, DMK प्रमुख ने 7 मई को वेरिफिकेशन के लिए अर्जी दी थी, जिसकी प्रक्रिया 29 जुलाई को शुरू हुई. इसके साथ ही उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट का भी रुख किया था और नतीजों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के फेल होने की बात कही.
स्टालिन ने कोलाथुर के नतीजों में गड़बड़ी का लगाया था आरोप
अपनी याचिका में पूर्व सीएम स्टालिन ने कहा था कि सीनियर वकील एन.आर. इलांगो को 14 चुने हुए EVM सेट के कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और VVPAT (वोटर वेरिफ़िएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) में बर्न मेमोरी/माइक्रोकंट्रोलर की जांच और वेरिफिकेशन के लिए उनका अधिकृत प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था. जांच के दौरान ही गड़बड़ियां पाई गईं. बाद में, इलांगो ने जिला चुनाव अधिकारी (DEO) को एक पत्र लिखा. हालांकि, DEO ने कहा था कि जांच और वेरिफिकेशन का काम सफलतापूर्वक किया गया और तय प्रक्रियाओं के अनुसार 5 अगस्त को पूरा हो गया.
स्टालिन ने किया था मद्रास हाई कोर्ट का रुख
उसके बाद 6 अगस्त को उन्होंने DEO को पत्र लिखकर उन खास कमियों के बारे में बताया जो उसमें सामने आई थीं. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इंजीनियर द्वारा जारी किए गए सर्टिफिकेट, तकनीकी/विफलता रिपोर्ट (जिनमें खराबी के कारणों का ब्यौरा हो) की जगह नहीं ले सकते और न ही उन्होंने ऐसा किया था.
इसके साथ ही उन्होंने डीईओ के दावे को भी मानने से इनकार कर दिया और मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने कहा कि विवादित आदेश बिना किसी स्पष्टीकरण या उनकी आपत्तियों पर ध्यान दिए, यांत्रिक ढंग से पारित किया गया था. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने दिन में ही उनकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सुनवाई योग्य नहीं है.
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