अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा और वरुणा नदियों के बढ़ते जलस्तर तथा बाढ़ जैसे हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद चिंतित हैं। काशी में बाढ़ का असर लगातार बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री ने खुद मोर्चा संभालते हुए वाराणसी के महापौर और जिलाधिकारी से सीधे बातचीत की और राहत-बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने साफ निर्देश दिया कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि बाढ़ और जलभराव से प्रभावित लोगों को कम से कम परेशानी हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाए।
लोकसभा में वाराणसी संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहर की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, उन्हें बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से प्रभावित लोगों की सुरक्षा और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा।
हम आपको बता दें कि वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर चुका है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, बुधवार को गंगा का जलस्तर 70.29 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 70.26 मीटर है। खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है और शहर का उच्चतम बाढ़ स्तर 73.90 मीटर तय किया गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने गंगा में सभी नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे घाटों और तेज बहाव वाले इलाकों की ओर न जाएं। प्रशासन गंगा के साथ-साथ वरुणा नदी के जलस्तर, जलभराव और वरुणा किनारे बसे इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
काशी में बाढ़ का असर केवल जलस्तर बढ़ने तक सीमित नहीं रहा। भारी बारिश और गंगा के उफान ने शहर की सामान्य जिंदगी को प्रभावित किया है। कई जलभराव वाली गलियों में नावें चलाने की नौबत आ गई। सबसे चिंताजनक तस्वीर वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों से सामने आई, जहां पारंपरिक दाह संस्कार स्थलों के जलमग्न होने के बाद अंतिम संस्कार की व्यवस्था छतों और आसपास की गलियों में करनी पड़ी। यह दृश्य बताता है कि बाढ़ और जलभराव ने काशी के धार्मिक और सामाजिक जीवन को किस हद तक प्रभावित किया है।
जिले के करीब 11 इलाके और वार्ड बाढ़ से आंशिक रूप से प्रभावित बताए गए हैं। वरुणा नदी में आई बाढ़ से 328 परिवारों के 1,388 लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन प्रभावित परिवारों को जरूरत के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था कर रहा है। जिले में 13 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां 219 प्रभावित परिवारों के 935 लोग रह रहे हैं। राहत शिविरों में विस्थापित लोगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर लोगों को बिना देरी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। प्रशासनिक अमला संवेदनशील इलाकों पर नजर रखे हुए है ताकि जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी या किसी अन्य आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने भी पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की टीमों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर निगरानी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस, प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियों की तैनाती के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि किसी भी इलाके में फंसे लोगों तक समय रहते मदद पहुंच सके।
वाराणसी की स्थिति ऐसे समय गंभीर हुई है जब उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन प्रभावित किया है। लेकिन प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में गंगा का चेतावनी निशान पार करना प्रशासन के लिए विशेष चुनौती बन गया है। काशी की तंग गलियां, घाट और नदी किनारे के घनी आबादी वाले इलाके बाढ़ के दौरान स्थिति को और जटिल बना देते हैं।
फिलहाल राहत की बात यह है कि गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन चेतावनी स्तर पार होने के बाद प्रशासन किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। नाव संचालन बंद कर दिया गया है, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है और राहत शिविरों को सक्रिय कर दिया गया है।
बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी निगरानी ने साफ कर दिया है कि वाराणसी की बाढ़ की स्थिति पर सरकार की नजर है। अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर के बीच राहत, बचाव और लोगों की सुरक्षा में कोई चूक न हो। काशी इस समय पानी के बढ़ते दबाव से जूझ रही है और प्रशासन के सामने चुनौती है कि आस्था की इस नगरी में बाढ़ की मार को मानवीय संकट बनने से पहले ही रोका जाए।
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अमेरिकी एविएशन रेगुलेटर 'फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन' (FAA) जल्द ही भारतीय एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए और यहां की एयरलाइंस की सेफ्टी ऑडिट करने के लिए आने वाला है। FAA की टीम में पांच से सात अधिकारी शामिल होंगे, जो अक्टूबर-नवंबर में करीब एक सप्ताह तक दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में जाकर हां एविएशन सेक्टर के सुरक्षा मानकों की परख करेंगे।इसके पीछे का मकसद FAA को यह सुनिश्चित करना है कि क्या भारतीय एविएशन वॉच डॉग डीजीसीए एयर इंडिया और दूसरी एयरलाइंस और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया समेत अन्य संबंधित स्टेक होल्डर अंतरराष्ट्रीय उड़ान मानकों पर कितने खरे उतरते हैं। सूत्रों का कहना है कि FAA की इस विजिट को देखते हुए डीजीसीए समेत अन्य संबंधित एयरलाइंस और विभाग अपनी तरफ से पूरी तैयारियों में जुट गए हैं। इससे पहले FAA की टीम ने 2021 में भारत में आकर यहां इंटरनेशनल एविएशन सिक्योरिटी असेस्मेंट (IASA) किया था।
FAA एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल हैंडऑफ़ का काम करती है और यह देखती है कि क्या कोई विदेशी सिविल एविएशन अथॉरिटी अंतरराष्ट्रीय एविएशन स्टैंडर्ड्स का पालन करती है या नहीं। यह रिपेयर स्टेशनों की जांच करती है, नेविगेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर की देखरेख करती है, सुरक्षा के नियम तय करती है और एयर ट्रैफ़िक के लिए ग्लोबल निगरानी रखती है। IndiGo के एक अधिकारी ने HT को बताया कि एयरलाइन ने DGCA की फाइंडिंग्स का जवाब दिया है। हालांकि, प्रवक्ता ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। Air India, SpiceJet और Akasa Air के प्रवक्ताओं ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, Air India के एक अधिकारी ने कहा, "DGCA की ओर से कुछ दौरे हुए हैं, लेकिन एयरलाइन को इसकी जानकारी है और वह ऑडिट के होने का इंतज़ार कर रही है।
FAA ने आखिरी बार 2021 में भारत में एक असेसमेंट किया था। अभी भारत के पास FAA के इंटरनेशनल एविएशन सेफ्टी असेसमेंट प्रोग्राम के तहत कैटेगरी 1 का स्टेटस है। 2026 में होने वाली यह समीक्षा पिछले साल हुई कई घटनाओं और ऑपरेशनल दिक्कतों के बाद हो रही है, जिनमें जून 2025 में अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट का क्रैश होना और दिसंबर 2025 में इंडिगो के ऑपरेशन में आई रुकावट शामिल हैं।
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