अमेरिकी एविएशन रेगुलेटर 'फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन' (FAA) जल्द ही भारतीय एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए और यहां की एयरलाइंस की सेफ्टी ऑडिट करने के लिए आने वाला है। FAA की टीम में पांच से सात अधिकारी शामिल होंगे, जो अक्टूबर-नवंबर में करीब एक सप्ताह तक दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में जाकर हां एविएशन सेक्टर के सुरक्षा मानकों की परख करेंगे।इसके पीछे का मकसद FAA को यह सुनिश्चित करना है कि क्या भारतीय एविएशन वॉच डॉग डीजीसीए एयर इंडिया और दूसरी एयरलाइंस और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया समेत अन्य संबंधित स्टेक होल्डर अंतरराष्ट्रीय उड़ान मानकों पर कितने खरे उतरते हैं। सूत्रों का कहना है कि FAA की इस विजिट को देखते हुए डीजीसीए समेत अन्य संबंधित एयरलाइंस और विभाग अपनी तरफ से पूरी तैयारियों में जुट गए हैं। इससे पहले FAA की टीम ने 2021 में भारत में आकर यहां इंटरनेशनल एविएशन सिक्योरिटी असेस्मेंट (IASA) किया था।
FAA एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल हैंडऑफ़ का काम करती है और यह देखती है कि क्या कोई विदेशी सिविल एविएशन अथॉरिटी अंतरराष्ट्रीय एविएशन स्टैंडर्ड्स का पालन करती है या नहीं। यह रिपेयर स्टेशनों की जांच करती है, नेविगेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर की देखरेख करती है, सुरक्षा के नियम तय करती है और एयर ट्रैफ़िक के लिए ग्लोबल निगरानी रखती है। IndiGo के एक अधिकारी ने HT को बताया कि एयरलाइन ने DGCA की फाइंडिंग्स का जवाब दिया है। हालांकि, प्रवक्ता ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। Air India, SpiceJet और Akasa Air के प्रवक्ताओं ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, Air India के एक अधिकारी ने कहा, "DGCA की ओर से कुछ दौरे हुए हैं, लेकिन एयरलाइन को इसकी जानकारी है और वह ऑडिट के होने का इंतज़ार कर रही है।
FAA ने आखिरी बार 2021 में भारत में एक असेसमेंट किया था। अभी भारत के पास FAA के इंटरनेशनल एविएशन सेफ्टी असेसमेंट प्रोग्राम के तहत कैटेगरी 1 का स्टेटस है। 2026 में होने वाली यह समीक्षा पिछले साल हुई कई घटनाओं और ऑपरेशनल दिक्कतों के बाद हो रही है, जिनमें जून 2025 में अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट का क्रैश होना और दिसंबर 2025 में इंडिगो के ऑपरेशन में आई रुकावट शामिल हैं।
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कभी कश्मीर में आतंक और अलगाववाद का पर्याय रहा यासीन मलिक अब अदालत और तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे भावनात्मक कार्ड खेलता नजर आ रहा है। 1990 के चर्चित सरला भट्ट हत्याकांड में मुकदमा नहीं लड़ने और मौत की सजा पर विचार करने की बात कहने वाले प्रतिबंधित JKLF के प्रमुख ने अब अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक को तलाक देने का ऐलान भी कर दिया है। पत्नी और बेटी के नाम भावुक संदेशों के जरिए मलिक ने अपनी जिंदगी के हालात को ‘अंतरात्मा की आवाज’ बताने की कोशिश की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में पश्चाताप है या फिर अदालत की गंभीर कानूनी लड़ाई के बीच सहानुभूति बटोरने की एक नई रणनीति?
हम आपको बता दें कि तिहाड़ जेल में 2019 से बंद यासीन मलिक ने अपने वकील अबू आदिल पंडित के माध्यम से श्रीनगर की अतिरिक्त सत्र अदालत में 25 पन्नों का लिखित बयान दाखिल किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को तय की है। अपने बयान में मलिक ने साफ कहा कि वह कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या के मामले में अब कानूनी लड़ाई नहीं लड़ेगा।
मलिक ने अदालत के सामने कहा, “मैं अब इस मुकदमे का विरोध नहीं करूंगा और मेरे लिए मौत की सजा पर विचार किया जा सकता है।” हालांकि उसने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि मुकदमा न लड़ने के उसके फैसले को अपराध स्वीकार करने के रूप में न देखा जाए। उसका दावा है कि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उसे झूठे तरीके से फंसाया गया है। मलिक के मुताबिक, उसने यह फैसला लंबे विचार-विमर्श और ‘इस्तिखारा’ करने के बाद लिया है। इस्तिखारा इस्लामी परंपरा में किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले की जाने वाली प्रार्थना है। लेकिन इस फैसले का राजनीतिक और कानूनी महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब यासीन मलिक ने अदालत में अपने बचाव से पीछे हटने का रास्ता चुना है।
हम आपको याद दिला दें कि मई 2022 में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने उसे आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में दोषी ठहराया था। उस समय भी मलिक ने आरोपों का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं किया और बाद में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अब NIA उसकी उम्रकैद को मौत की सजा में बदलने की मांग कर रही है। ऐसे में सरला भट्ट हत्याकांड में उसका यह नया रुख और भी गंभीर हो जाता है।
सरला भट्ट की हत्या: तीन दशक से ज्यादा पुराना जख्म
हम आपको याद दिला दें कि सरला भट्ट श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में स्टाफ नर्स थीं। अप्रैल 1990 में, जब कश्मीर घाटी आतंकवाद और हिंसा के सबसे भयावह दौर से गुजर रही थी, उनका अपहरण कर लिया गया था। कुछ दिनों बाद उनका शव बरामद हुआ। एक कश्मीरी पंडित महिला की इस हत्या ने उस दौर में पंडित समुदाय के बीच भय और असुरक्षा को और गहरा कर दिया था। लेकिन यह मामला तीन दशक से अधिक समय तक लगभग ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
वर्ष 2025 में राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने मामले को दोबारा खोला और यासीन मलिक तथा उसके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के बाद दाखिल चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी और गुलाम मोहम्मद टपलू के नाम शामिल किए गए। इनमें चाल्कू अभी भी फरार बताया जाता है, जबकि सोफी, शेख और टपलू की मौत हो चुकी है। इस तरह यासीन मलिक इस मामले में सबसे प्रमुख जीवित आरोपियों में से एक है। वह जम्मू के एक अन्य हत्या मामले में भी मुकदमे का सामना कर रहा है।
फांसी की आशंका और पत्नी को ‘आजाद’ करने का फैसला
अपने इसी हलफनामे में यासीन मलिक ने निजी जीवन को लेकर भी बेहद भावुक और असाधारण घोषणा की है। उसने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से तलाक लेने का फैसला किया है। दोनों ने 2009 में शादी की थी और उनकी 13 वर्षीय बेटी रज़िया सुल्ताना है। मलिक ने दावा किया कि पिछले आठ वर्षों से वह अपनी पत्नी की आवाज तक नहीं सुन सका है। उसके अनुसार, जेल में उसे न तो पत्नी से फोन पर बात करने की अनुमति मिली और न ही वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करने दिया गया। उसने यह भी कहा कि वह अपने परिवार से भी सामान्य तरीके से संपर्क नहीं कर पाया।
मुशाल के नाम भावुक संदेश में मलिक ने कहा कि वह नहीं चाहता कि उसकी पत्नी पूरी जिंदगी उसकी परिस्थितियों का बोझ उठाती रहे या “एक विधवा की तरह जिंदगी जिए।” उसने मुशाल से कहा कि वह उससे करीब 20 साल छोटी है और उसे सम्मान और उम्मीद के साथ जिंदगी का नया अध्याय शुरू करना चाहिए। हलफनामे में मलिक ने लिखा कि उसका यह फैसला किसी सहानुभूति या दया को हासिल करने की कोशिश नहीं है, बल्कि वह इसे अपनी “अंतरात्मा का आखिरी शब्द” मानता है। उसने कहा कि जहां भी उसका भाग्य उसे ले जाए, उसकी प्रार्थनाएं, प्यार और आशीर्वाद हमेशा मुशाल के साथ रहेंगे।
सबसे भावुक संदेश उसने अपनी बेटी रज़िया के लिए छोड़ा। मलिक ने बेटी से अपनी दादी यानी उसकी मां का ख्याल रखने और रोज कम से कम पांच मिनट उनसे बात करने की अपील की, ताकि बुजुर्ग मां को परिवार का साथ महसूस होता रहे। उसने परिवार के साथ समय न बिता पाने और उनसे दूर रहने पर अफसोस भी जताया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यासीन मलिक का यह फैसला आखिर किस दिशा में जाएगा। एक तरफ वह दावा कर रहा है कि वह निर्दोष है और उसे राजनीतिक परिस्थितियों में फंसाया गया है, दूसरी तरफ वह मुकदमे में अपना बचाव छोड़कर मौत की सजा पर विचार करने की बात कर रहा है। बहरहाल, सरला भट्ट हत्याकांड, आतंकवाद फंडिंग मामले में उम्रकैद और NIA की मौत की सजा की मांग के बीच तिहाड़ से आया यह बयान यासीन मलिक के जीवन का शायद अब तक का सबसे नाटकीय और निर्णायक मोड़ बन गया है।
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