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दिल्ली मेट्रो की खिड़की पर मोबाइल चिपका स्टाइल मार रहा था लड़का, तभी चल पड़ी ट्रेन, 20 घंटे में मच गया तहलका!

आज के युवा रील्स बनाने के शौक़ीन हैं. चाहे कोई भी जगह हो, वो रील बनाने लगते हैं. एक युवक ने दिल्ली मेट्रो में रील बनाने का फैसला किया लेकिन इस वजह से उसे अपने मोबाइल से हाथ धोना पड़ गया. रील बनाने के दौरान ही मेट्रो चल पड़ी और शख्स का फोन उसी के साथ आगे बढ़ गया.

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Strait of Hormuz: ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का बड़ा ऑपरेशन, 40 जहाजों को निकाला; 1.8 करोड़ बैरल तेल की हुई आवाजाही

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर दुनिया के केंद्र में है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को यहां एक बड़े एस्कॉर्ट ऑपरेशन को अंजाम दिया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, करीब 40 वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य सुरक्षा के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से गुजारा गया।

इन जहाजों के जरिए लगभग 18 मिलियन बैरल यानी करीब 1.8 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही हुई। युद्ध शुरू होने से पहले इस रास्ते से हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता था।

जहाजों की सुरक्षा के लिए कई स्तर पर तैनाती
इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने सिर्फ नौसैनिक ताकत पर निर्भर नहीं किया। जहाजों की सुरक्षा के लिए हवाई, समुद्री और अंतरिक्ष आधारित संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना का उद्देश्य एक तरफ कॉमर्शियल जहाजों को ड्रोन हमलों से बचाना था, वहीं दूसरी ओर ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना भी था, जिससे वह समुद्री यातायात को निशाना बना सकता है।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि एस्कॉर्ट ऑपरेशन के दौरान ईरान की ओर से इस्तेमाल किए जा सकने वाले एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को निष्क्रिय किया गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों है इतनी नजर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।

इसी वजह से अमेरिका ने अपनी मौजूदा युद्ध रणनीति में इस समुद्री मार्ग को खास महत्व दिया है। अमेरिकी रणनीति में जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले, व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा और ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक दबाव शामिल है।

अमेरिका ने करीब 60 सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को अमेरिकी सेना ने होर्मुज के आसपास करीब 60 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन, समुद्री सैन्य संसाधन, माइन बिछाने की क्षमता और संचार केंद्र शामिल थे।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमता को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर सकता है। इसलिए अमेरिकी सेना आने वाले समय में भी इस इलाके में सैन्य कार्रवाई जारी रख सकती है।

ट्रंप बोले- अब जहाजों को नहीं देख सकता ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ताजा हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई सिर्फ ईरानी रडार सिस्टम तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने की ईरान की क्षमता को कम करना भी था। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के पास जहाजों को ट्रैक करने के लिए पहले जैसी रडार क्षमता नहीं बची है।

तेल बाजार पर बढ़ रहा दबाव
होर्मुज में लगातार बने सैन्य तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर बनी चिंता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दबाव है।

ऊर्जा कंपनियां सैन्य सुरक्षा मिलने के बावजूद इस रास्ते से जहाज भेजने को जोखिम भरा मान रही हैं। तेल की कीमतों में तेजी और अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप का नया रुख
इस बीच ट्रंप ने ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को लेकर भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इस सामग्री को जमीन के अंदर ही छोड़कर सैटेलाइट के जरिए उसकी निगरानी की जा सकती है।

यह रुख उनके पहले के बयानों से कुछ अलग माना जा रहा है, जब उन्होंने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित करना संघर्ष की प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया था।

आगे भी जारी रह सकता है सैन्य दबाव
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से विकसित करने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक तनाव बना रहा तो इसका असर कच्चे तेल की आपूर्ति, ईंधन की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ता है।

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  Sports

England Tour से पहले मुश्किल में श्रीलंका, Kusal Mendis की जगह Charit Asalanka को मिली कप्तानी की बड़ी जिम्मेदारी

श्रीलंका क्रिकेट टीम को इंग्लैंड दौरे से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के कप्तान कुसल मेंडिस मांसपेशियों की चोट से समय पर उबर नहीं सके हैं और अब वह इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज में नहीं खेल पाएंगे। उनकी गैरमौजूदगी में चरित असलंका टीम की कप्तानी संभालेंगे।

बता दें कि कुसल मेंडिस को जुलाई में लंका प्रीमियर लीग के दौरान कोलंबो कैप्स की ओर से खेलते हुए चोट लगी थी। प्रतियोगिता में केवल दो मुकाबले खेलने के बाद उनकी जांघ की पिछली मांसपेशी में खिंचाव की समस्या सामने आई थी। इस चोट के कारण वह भारत के खिलाफ घरेलू मैदान पर खेली गई दो टेस्ट मैचों की सीरीज से भी बाहर हो गए थे। अब तक पूरी तरह फिट नहीं होने के चलते इंग्लैंड के खिलाफ सबसे छोटे प्रारूप की श्रृंखला से भी उन्हें बाहर बैठना पड़ेगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार, चरित असलंका को पहले इस दौरे के लिए उपकप्तान बनाया गया था, लेकिन अब उन्हें सीधे टीम की कमान सौंपी गई है। यह सीरीज उनके लिए छोटे प्रारूप में वापसी का भी मौका होगी। असलंका को जून में वेस्टइंडीज दौरे के लिए श्रीलंका की टी20 टीम में जगह नहीं मिली थी। ऐसे में कप्तानी की जिम्मेदारी के साथ उनकी वापसी भी टीम के लिए अहम मानी जा रही है।

कुसल मेंडिस की जगह बल्लेबाज पवन रथनायके को टीम में शामिल किया गया है। वहीं बाएं हाथ के तेज गेंदबाज बिनुरा फर्नांडो की जगह दिलशान मदुशंका को भी टीम में बुलाया गया है। बिनुरा पीठ की चोट से परेशान हैं और इसी वजह से वह टी20 श्रृंखला में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

श्रीलंका और इंग्लैंड के बीच टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 15 सितंबर को साउथम्पटन के रोज बाउल मैदान में खेला जाएगा। दोनों टीमों के लिए यह श्रृंखला आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। श्रीलंका को खास तौर पर अपने प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता और फिटनेस पर नजर रखनी होगी।

श्रीलंका की संशोधित टीम में कप्तान चरित असलंका के अलावा पथुम निसांका, कमिल मिशारा, लाहिरु उदारा, कामिंदु मेंडिस, जनिथ लियानगे, दासुन शनाका, दुनिथ वेल्लालागे, वानिंदु हसरंगा, महीश तीक्षणा, थारिंदु रथनायके, दुश्मंथा चमीरा, ईशान मलिंगा, नुवान तुषारा, पवन रथनायके और दिलशान मदुशंका शामिल हैं।

गौरतलब है कि कुसल मेंडिस श्रीलंका के अहम बल्लेबाजों में गिने जाते हैं और टीम की कप्तानी भी संभाल रहे थे। ऐसे में उनका बाहर होना श्रीलंका के लिए बड़ा नुकसान है। दूसरी ओर चरित असलंका के सामने युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के मिश्रण वाली टीम को संभालने की चुनौती होगी। इंग्लैंड की मजबूत टीम के खिलाफ उनकी कप्तानी की असली परीक्षा 15 सितंबर से शुरू होने वाली है।
Fri, 04 Sep 2026 20:30:00 +0530

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